Wednesday, February 24, 2021

राजभाषा हिंदी में मौलिक पुस्तक लेखन हेतु विशेष प्रयास

 Wednesday: 24th February 2021 at 16:03 IST

 राजभाषा गौरव पुरस्कार योजना-वर्ष 2020 के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित

नई दिल्ली: 24 फरवरी 2021: (पीआईबी//हिंदी स्क्रीन ब्यूरो)::

राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय द्वारा हिंदी में मौलिक पुस्तक लेखन के लिए चलाई जा रही निम्नलिखित पुरस्कार योजनाओं के लिए 01.01.2020 से 31.12.2020 के दौरान प्रकाशित पुस्तकें आमंत्रित हैं।  इस योजना में दो वर्गों में पुरस्‍कार दिए जाते हैं।

1. केन्द्र सरकार के कार्मिकों (सेवानिवृत्त सहित) के लिए हिंदी में मौलिक पुस्तक लेखन हेतु राजभाषा गौरव पुरस्कार जिनकी पात्रता/शर्ते  निम्‍न हैं:

(I) पुस्तक के लेखक केन्द्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों/उनके सम्बद्ध/अधीनस्थ कार्यालयों, केन्द्र सरकार के उपक्रमों, राष्ट्रीयकृत बैंकों/वित्तीय संस्थानों तथा केन्द्र सरकार के स्वामित्व में या नियंत्रणाधीन स्वायत संस्थाओं/केंद्रीय विश्वविद्यालयों/प्रशिक्षण संस्थानों के सेवारत/सेवानिवृत्त अधिकारी/कर्मचारी हों। (II) सेवारत लेखक अपनी प्रविष्टि अपने विभाग के अध्यक्ष द्वारा सत्यापन एवं संस्तुति तथा सेवानिवृत्त लेखक अपनी प्रविष्टि पीपीओ की प्रति के साथ इस विभाग को सीधे भेजें।

2. भारत के नागरिकों के लिए हिंदी में ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन हेतु राजभाषा गौरव पुरस्कार

पुस्तक इंजीनियरी, इलेक्ट्रिनिक्स, कंप्यूटर विज्ञान, भौतिकी, जैव विज्ञान, ऊर्जा, अंतरिक्ष विज्ञान, आयुर्विज्ञान, रसायन विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, मनोविज्ञान आदि तथा समसामयिक विषय जैसे उदारीकरण, भूमंडलीकरण, उपभोक्तावाद, मानवाधिकार, प्रदूषण नियंत्रण आदि।आधुनिक तकनीकी/विज्ञान की किसी विधा अथवा समसामयिक विषय पर लिखी हो सकती है।

भारत का कोई भी नागरिक इस पुरस्कार योजना में भाग ले सकता है। उपर्युक्त योजनाओं के संबंध में प्रपत्र तथा पूरा विवरण विभाग की वेबसाइट http://rajbhasha.gov.in पर उपलब्ध है। पुस्तकें भेजने की अंतिम तिथि 01.05.2021 है।

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एन डब्‍ल्‍यू/आर के/प्र क/ए डी/डी डी डी

Friday, December 11, 2020

किसान आंदोलन ने उत्साहित किया है संघर्षों के साहित्य सृजन को

 पढिए डा.चित्रलेखा की नयी काव्य रचना 

इस तस्वीर को क्लिक किया है हमेशां से ही सत्य  के साथ खड़ी होने वाली डा. जगदीश  कौर ने 

डाॅoचित्रलेखा

धरती है बिछौना

 रजाई आसमान

 खाएं रोटी-दाल

 हम हैं किसान।

 नए कानून से थोड़ा 

 हम-सब हैं हलकान

 पूंजीपति से मुक्त करो

 हम मेहनतकश इंसान। 

 काहे को झगड़ा-रगड़ा

 ओ हमारे हुक्मरान

 मान लो हमर बतिया

 दे दो ना जीवनदान।

 नंगे ही आए धरा पर

 नंगे ही श्मशान/कब्रिस्तान

 जीने को सिर्फ़ चाहिए

 रोटी,कपड़ा और मकान।

 इस देश का नारा है

 जय जवान, जय किसान

 गूंजता रहेगा ये सदा

 जब तक है हिंदुस्तान।

 पंछी के कलरव से पहले

 कृषकों का होता विहान

 जब तक थमी रहेगी सांस

 होगा नहीं अवसान।

Chitralekha Yadav Madhepura अर्थात डाॅoचित्रलेखा ने फेसबुक के "विश्व हिंदी संस्थान" नामक ग्रुप में  पोस्ट किया। हम इसे यहां 7 दिसंबर 2020 की रात्रि 08:09 बजे पोस्ट किया साभार प्रकाशित कर रहे हैं। 

Sunday, November 22, 2020

मैरी और मायकिल////कहानी//कौशल बंधना पंजाबी

 Whatsapp: 21st  November 2020 at 02:31 PM

 मानवीय मन की संवेदना जगाती नई रचना 

मैरी और मायकिल यही नाम रख दिए पड़ोसी भाभी ने उस प्रेमी जोड़े या पति पत्नी कहो। दोनों हमेशां साथ साथ रहते ,,, शायद उनको कुत्ते की योनि में अपने रिश्ते की एहमियत का अहसास हो चुका था।

दोनों ज़्यादातर रोटी भाभी के यहां ही खाते मगर राखी पूरी गली की करते। घुसने नहीं देते किसी को। बहुत बार मैरी मां बनी पर उसके बच्चे हर बार चलती फिरती गाड़ियों की भेंट चढ़ गए।

इस बार भी दो तीन बच्चे गाड़ियों की भेंट चढ़ गए थे। एक  को गंभीर चोट आई तो तरस खाकर उसे भाभी उठाकर ले आईं। उसका इलाज भी करवाया गया एक बुज़ुर्ग माता से, जो इन्सानी हड्डियों की माहिर हैं। ईश्वर की कृपा से वो बच्चा थोड़ा चलने फिरने भी लगा। यह पुण्य का काम था मुझे भी अच्छा लगा उन बेज़ुबानों की मदद करना।

मैरी के बच्चों को एक दो बार मैंने नाली में फंसने पर बचाया था उस बेज़ुबान को ये भी याद रहा आजतक। मुझे देखकर पूंछ हिलाकर परिचय देती कि वह सब समझती है।

पर मां तो मां है बेशक इन्सान हो या जानवर औलाद का मोह अलग ही होता है। इस बार उसके बच्चे मरे तो वह आक्रामकता पर उतर आई। हर आते जाते को भौंकने काटने भागने लगी।

गली वालों को फिर भी कुछ नहीं बोली यह भी उसकी समझदारी थी। मगर भाभी भी डर गईं कहीं काट लिया किसी को तो उनका नाम ख़ामख़ां बजेगा कि उनके गेट पर जो डेरा डाले रहती थी।

अब बच्चों को बेशक भाभी के घर से भी खाने को मिलता था मगर मैरी और मायकिल अपने मां बाप होने का फ़र्ज़ फिर भी निभाते,,,, कहीं से कुछ खाने को मिलता तो बच्चों के खाने को ले आते।

मगर इस बार कुछ अलग सी घटना घटी जो किसी के भी समझ ना आई,,,, मुझे बुख़ार था मैं लेटी थी,,,,गली में से लवली दीदी की आवाज़ें आ रही थीं।

मैंने बेटी को बोला ये लवली दीदी तो ऐसे बोलती नहीं कभी,,,, क्योंकि काम में बिज़ी होती, ज़रूर कोई गंभीर बात है। बेटी बोली मां आप ठीक नहीं, लेटी रहो । मगर मैं हिम्मत करके उठी । बाहर जाकर दीदी से पूछा क्या हुआ दी ,,,आप क्यों बोल रही हैंं,,,वह अपने घर के आगे की जगह धुल रही थीं। यहां मीट, चावल और हल्दी सी बिखरी थी।कुत्तों को भगाने को एक सोटी सी थी हाथ में।

बोले देखो कौशल जी ये आज दिन में तीसरी बार हुआ।अब सभी वहां इकट्ठा हो चुके थे और यह सोचने को मजबूर थे की यह किसी की कोई शरारत तो नहीं।

अब आजकल कोई जादू टोना को तो नहीं मानता वह यह भी बोले मगर सोच सभी की यह थी कि तीन बार एक खाना और कुत्तों को एक ही जगह मिली । सभी अपनी अपनी सोच में थे और अपने अपने विचार भी रख रहे थे। कुत्तों से ऐतराज़ भी सभी जता ही रहे थे बातों बातों में।

मैं वहां खड़ी सोच रही थी क्या मैरी को कोई ऐसा ठिकाना तो नहीं मिल गया जो खाना बच्चों के लिए चुराकर लाती हो। फिर सोचा, अब इन बच्चों का क्या होगा अगर भाभी ने छोड़ दिया।क्या इस बार भी एक एक कर गाड़ियों के नीचे आ जाएंगे। खुले आंगन में बैठे रहते थे।

सुबह उठे तो देखा पड़ोसी भाई जी ने गेट के आगे थोड़ी रोक लगा दी, अब डर तो उनका भी सच्चा था।

बच्चे उदास थे भाभी के बुलाने भागने वाले चुप चाप बैठे थे।और मैरी और मायकिल भी उदास नज़रों से गेट को ताक रहे थे। फिर मैरी और मायकिल दो बच्चों को ले गए,,मगर वह लौट आए ।अब भी गली में दूर दूर बैठे हैं उदास। पता नहीं कितनी उम्र शेष है उनकी। गाड़ियों की भेंट चढेगें या बचेंगे,,,,जिस ईश्वर ने पैदा किया अब वही जाने क्या होगा आगे। (हिंदी स्क्रीन) 

भाखड़ा nngl।

पंजाब।©®

Thursday, October 15, 2020

औरत का अपमान दुर्गा का सम्मान ,कैसे सफल होगी पूजा ?

 इस तरह तो हर पूजा अधूरी  ही होगी 

     --समझा रही हैं सक्रिय लेखिका कौशल बंधना पंजाबी    

शुभ प्रभात

अलफ़ाज़-ए-अदब ग्रुप से साभार 
मां दुर्गा की पूजा कीजिए मगर औरत को मां ने अपना रूप प्रदान किया है,,उसकी भी इज्जत करना सीखिए, नहीं तो हर पूजा अधूरी है,,,बेशक पूर्व में या वर्तमान में यदि कोई भी पापकर्म किया औरत को गंदी नज़र से देखा। कोई कुकर्म किया या करने की धारणा रखी।या किसी से धोखा किया अपनी गंदी भावनाओं की शांति हेतु।

तो पहले तोबा करो उन कर्मों से जो कर लिए आजतक।तभी दुर्गा सफ़ल होगी उन मर्दों की जो दुर्गा पूजा तो दिल से करते हैं मगर पराई औरत को थाली का निवाला समझते हैं या फिर कुछ मनचले औरतों अथवा लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाते हैं।

कुछ लोग रेप जैसी घटनाओं को अंजाम देकर भी मां दुर्गा के समक्ष पूजा करने का साहस करते हैं। कुछ दुनिया से छुपकर अच्छे आचरण तले छुपकर औरतों लड़कियों पर अपनी गंदी भावनाओं को प्रेम जाल में फंसाकर धोखा देकर भी मां दुर्गा के समक्ष पूजा करने का साहस करते हैं।

आए दिन रेप केस हो रहे यह कुंठित धारणाएं पता नहीं कैसे उत्पन्न होती होंगी और मर्द की रूह नहीं कांपती इनको धारणाओं को अंजाम देते।

मगर मां तो मां है सज़ा किसी रूप में अपने हिसाब से देती होगी ।प्रत्येक घर में मां बहन बेटी है तो मां दुर्गा की पूजा से पहले उसके प्रकोप का ध्यान भी रखिए यदि आपको सद्कर्म का फल मिलता है तो दुष्कर्म की सज़ा भी तय है।

समझिए सोचिए आपकी भावनाएं आपका आचरण किसी की रूह को ठेस ना पहुंचाए आपके कर्म आपके आगे इस तरह ना आए कि आपके परिवार में वही हो जो आपने पूर्व में किया। मां तो फल देगी ,,,,अच्छा या बुरा आपके कर्म तय करेंगे।

कहने का तात्पर्य बस इतना कि दुर्गा पूजा कीजिए अपनी सोच सुधारकर और गलतियों से तौबा कर ‌।औरत की इज्ज़त कीजिए मंदिर में बिठाकर ही नहीं मन में बिठाकर भी।हर औरत को थाली का निवाला मत समझिए।

जब गंदी भावनाएं आएं तो एक बार अवश्य सोचिए

कि आपके घर में मां,बहन बेटी भी है जो आप किसी गैर के लिए सोच कर रहे उनके साथ भी कल घट सकता है।

और आपको नवरात्री पूजन भी करना है किस मुंह से मां के समक्ष जाओगे क्या बोल पाओगे मां से जो दुनिया में तुमने अपना रूप दिया औरत उसी के साथ मैंने ग़लत किया।

धन्यवाद दुर्गा पूजा कीजिए परन्तु बाद में भूल मत जाना कि औरत मां का बनाया उसी का एक रूप है। पराई औरतों को भी मान सम्मान देना सीखिए।तभी आपकी दुर्गा पूजा सफ़ल होगी। --कौशल बंधना पंजाबी

(तेज़ी से उभतरि और तेज़ी से विकसित हो रहे "अलफ़ाज़-ए-अदब" ग्रुप से साभार) इस ग्रुप की एडमिन हैं सुश्री बेनु परवाज़, इरादीप त्रेहन, नीलू बग्गा लुधियानवी और अन्य। 

Tuesday, October 13, 2020

डा. सुरजीत पात्र की काव्य रचना बनी जसप्रीत फलक की प्रेरणा

 कविता, कथा कारवां के मंच ने करवाई किसानी पर विशेष चर्चा 


लुधियाना
: 12 अक्टूबर 2020: (हिंदी स्क्रीन ब्यूरो)::

शायर का मन बेहद संवेदनशील होता है। जब किसान घर बाहर छोड़ कर रेल पटरियों आ गये तो कलमकारों के दिल भी उठे।  उनकी खेती, उनकी मेहनत, कृषि से उनका इश्क-जब सब कुछ पूंजीपतियों के हवाले किये जाने साज़िशें कानून बनने लगीं तो शायर का अंतर्मन भी दहल उठा।  

डॉ. सुरजीत पातर जी की कृषि पर आधारित कविता 

"एह बात  निरी एनी ही नहीं  

ना ऐह मसला सिर्फ किसान दा ऐ" 

आयोजन का आधार बनी। इसी कविता को एक प्रभावशाली प्रेरणा कर जसप्रीत फलक बुद्धिजीवियों, शिक्षण के महारथियों और युवाओं को भी किसानों के दर्द और संघर्ष  की तरफ अग्रसर करने में  सफल रही। इश्क की बातें बहुत हो चुकी अब तो समय की नब्ज़ पर हाथ रख कर कुछ कहना आवश्यक हो गया था। इसी भावना से सभी उपस्थित सम्मानीयजनों का स्वागत किया गया। किसानों और किसानों को दरकिनार करके न तो खुशहाली सम्भव है और न ही सच्ची देशभक्ति। 

साहित्यिक और  सांस्कृतिक मंच कविता कथा कारवांँ की तरफ से आधुनिक कृषि में युवाओं की शमूलियत पर ऑनलाइन विचार चर्चा की गई जिसमें पंजाब के खेती माहिरों व प्रगतिशील किसानों द्वारा शिरकत की गई। कार्यक्रम का शुभारम्भ अध्यक्षा जसप्रीत कौर फ़लक ने सभी का स्वागत करते हुए किया। 

पंजाब के जॉइंट डायरेक्टर (कृषि) डॉ बलदेव सिंह बतौर मुख्य मेहमान शामिल हुए। उन्होंने बताया कि कृषि को किस प्रकार लाभदायक बनाया जा सकता है। कृषि क्षेत्र में हुनर विकास की बहुत संभावनाएं हैं उन्होंने कृषि के आधुनिक यंत्रों की जानकारी और उनके इस्तेमाल के बारे में बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी पराली को नहीं जलाना चाहिए पराली के धुएं से करोना बढ़ने की संभावना पैदा हो सकती है।  डॉ बलदेव सिंह ने उन नौजवान प्रगतिशील किसानों की मिसाल दी जिन्होंने कुछ हटकर किया और कृषि से अधिकतम मुनाफा कमाया है। पीएयू के साबका प्रोफेसर दलजीत सिंह ने कृषि के प्रगतिशील हुनर सीखने और उन्हें अमल में लाने की बात की और इसे व्यवसाय के तौर पर किस तरह अपनाना चाहिए इन सब बातों को बताया सीटी यूनिवर्सिटी के डीन एकेडमिक डॉ बक्शी ने कहा कि कृषि उद्योग के साथ जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है कृषक जसवीर सिंह गुलाल ने सारे बताया कि परिवार में मिलजुल कर बागवानी का कार्य कर घर में भी खेती कर सकते हैं। पतरस गिल ने किसानों पर एक मार्मिक गीत 

"ख़री फसल ते चल दियां तवीयां, साडी हिक उत्ते फिर दिया छवियां, 

सब भुर गईयां सधरां जो नवीयां,  

चढ़े कर्जे ही उतार दे  मर गए, 

साडे पिंडेयां ते मारां दे निशान ने" 

और इसी तरह अन्य शायरों ने भी किसान के दर्द को बहुत ही कलात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत किया।  बात बेशक पराली जलाने के मुद्दे को लेकर शुरू हुई लेकिन किसानों पर चढ़े क़र्ज़ और उसके शोषण पर भी भी काव्य चर्चा हुई:

प्रभलिखारी ने किसानों के प्रति एक संवेदनशील कविता पेश की:

ओह हक्कां दे लई लड़दा ए, 

ओह राखी फसल दी करदा हे,  

ओह अपने आप विच पूरा हे,  

ते लोकां नू पूरा कर दा ए" 

आयोजन को समाप्ति की तरफ ले जाते हुए मौजूदा संघर्ष पर भी गहन चर्चा हुई। पंजाब और देश के हालात पर भी विचार विमर्श हुआ। 

डॉ. जगतार धीमान,रजिस्ट्रार सी टी यूनिवर्सिटी ने कृषि की जानकारी देते हुए  मंच का संचालन बखूबी किया।


Saturday, October 10, 2020

नहीं रहे सोये हुए ज़हनों को झंझोड़ने वाले अज़ीम अमरोहवी साहिब

 कलम से ज़ुल्म  की कलाई मरोड़ना उन्हें बाखूबी आता था आता था  

कोरोना ने हमसे बहुत ख़ास ख़ास लोग छीन लिए। शायरी, सियासत, कला, फ़िल्में शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र बचा हो जिसमें से कोई न कोई घर सूना न हुआ हो। इसी दुखद कड़ी में एक और नाम है जनाब अज़ीम का। बहुत  करते थे। किसी का नाम चाहे इशारों से भी लें तो भी लिहाज़ नहीं करते थे। उनके इशारे भी अक्सर आसानी से समझ आ जाते कि किस किस चेहरे को बेनकाब कर रहे हैं। इस के बावजूद कभी भी तहज़ीब का साथ न छोड़ते। जैसे जैसे हालात नाज़ुक़ बनते गए वैसे वैसे अज़ीम साहिब की संवेदनशीलता भी  बारीकी से बढ़ती गई। न तो अंदाज़ बदला न ही तेवर बदले।  उनके जाने की दुखद जानकारी मिली है। 


आज के हालात में जब उनकी ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा थी तब वह रुखसत हो गए। आज के इस नाज़ुक दौर में जब सच कहना बेहद दुश्वार होता जा रहा है और बहुत से लोग खामोश रहने में ही भलाई समझने लगे हैं इसके बावजूद भी सोशल मीडिया पर अक्सर पूरी तरह बेबाकी से सरगर्म रहने वाली मोहतरमा तस्वीर नक़वी साहिबा सेवह बताती हैं:अलविदा अज़ीम अमरोहवी साहेब,बहुत कमी कर गए आप मेरे शहर अमरोहा में,पचास किताबों के लेखक ,बहुत अच्छे मर्सिय लिखते थे ,पढ़ते थे ,एक हरदिल अज़ीज़ शख्सियत,दो महीने बड़ी बहादुरी से कोविड से जंग लड़ी मगर हार गए,आप अमरोहा की तारीख में दर्ज हो गए हमेशा के लिए!! 

Sunday, October 4, 2020

हाथरस मे घटी लड़की के बलात्कारोपरांत कत्ल की लेखकों ने भी निंदा की

 कविता कथा कारवां द्वारा गांधी जयंती पर हुआ आयोजन 


लुधियाना
: 4 अक्टूबर 2020: (हिंदी स्क्रीन ब्यूरो)::
 

देश की मौजूदा हालत पर जागरूक नागरिक  बन कर नज़र रखने वाले सभी शायर और लेखक भी बेहद चिंतित हैं। हाथरस में हुई जघन्य हत्या ने सभी को हिला कर रख दिया है। लेखन और शायरी को समर्पित गंभीर संगठन "कविता कथा कारवां" की तरफ से हुए आयोजन में स्पष्ट तैर पर यह आवाज़ बुलंद हुई कि आज वह भारत तो कहीं नज़र ही नहीं आ रहा जिसके सपने महात्मा गांधी जी ने देखे थे। सीमा पार सक्रिय दुश्मनों को ललकारने वाले शास्त्री जी अगर आज हमारे दरम्यान होते तो सबसे पहले सीमाओं के अंदर बैठे समाज दुश्मनों को सबक सिखाते। अफ़सोस के  निर्भया कांड के बाद भी ऐसी जघन्य  और अमानवीय वारदातें बार बार हुईं।  देश की बहु बेटियों के लिए कोई छोटा सा कोना भी सुरक्षित नहीं। कभी कठुआ,  कभी उन्नाव और अब हाथरस। बहुत दुखद और चिंतनीय स्थिति बन चुकी है।  गौरतलब है कि यह आयोजन भी सच बोलने की जुर्रत दिखाने वाली हिम्मतवर शायरा जसप्रीत कौर फलक की देखरेख में हुआ।  

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा पूर्व  प्रधान मंत्री  श्री लाल बहादुर शास्त्री  जी  के जन्मदिन 2 अक्टूबर को मनाने के लिए संस्था कविता कथा कारवाँ के तहत,यू ट्यूब लाइव कार्यक्रम करवाया गया जिसमे विचार गोष्ठी, कवि सम्मेलन आदि  कार्यक्रम आयोजित किए गए। आज के लिए  महात्मा गाँधी जी  व श्री  लाल बहादुर शास्त्री जी के विचारों की सार्थकता  पर'  कविता पाठ एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम सुश्री शैली वधवा  ने 'रघुपति  राघव राजा राम' से कार्यक्रम का प्रारंभ किया। मंच की अध्यक्षा जसप्रीत कौर फ़लक ने सभी प्रतिष्ठित जनों का मंच पर स्वागत किया। अनेक सम्माननीय  कवियों  ने कविता के माध्यम से अपने विचार पेश किए । उन्होंने कहा कि बढ़े दु:ख को बात है कि आज भारत मे ऐसा कुछ  फिर  से हो रहा है जिसकी गांधी जी  भर्त्सना किया करते थे। डा अनु मेहता, रिशमजोत संघा विरक, आकाश ठाकुर, ज्योति बजाज, प्रभदयाल, इरादीप तरेहण, गुरमीत कौर, डा गोकुल  क्षत्रीय, डा अनु  शर्मा  कौल,   हरदीप विरदी, डा सुमन शर्मा और  शैली वाधवा ने अपनी भावनाओं को कविता के माध्यम से वयक्त किया।  भावनाऐं गांधी जी  व श्री लाल बहादुर शास्त्री जी को समर्पित रहीं।  हाल ही मे हाथरस  मे घटी लड़की के बलात्कारोपरांत कत्ल  की घिनौनी घटना  की निंदा की गई क्यूंकि इस घटना ने सभी को उद्धेलित कर रखा था। 

 डा जगतार धीमान ने अपने भाषण में  गाँधी जी  तथा श्री लाल बहादुर शास्त्री जी के जीवन  सिद्धांतों का ज़िक्र करते हुए  बुरा न सुनने, बोलने व देखने के साथ साथ  अहिंसा, शांति, सच्चाई, सहिष्णुता, आदि  की आज  अधिक आवश्यकता को दरसाया। उन्होंनें गांधी  व शास्त्री जी श्रद्धांजलि देती हुई अपनी कविता भी पढ़ी। अध्यक्षा  जसपरीत  कौर फलक ने कहा कि आज विश्व स्तर पर गांधी जी की  के दर्शन व जीवन  शैली की बढती हुई पसंद  का जिक्र करते हुए कहा किआज युवा वर्ग को देशभक्ति के साथ साथ अहिंसा को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। इसी के साथ मैडम फ़लक द्वारा सभी अतिथियों को धन्यवाद दिया गया और  शुभकामनाएं देकर  अंत में राष्ट्रगान के साथ सभा का समापन किया गया।