Wednesday, March 18, 2026

पुण्यतिथि पर पंडित वेद दीवाना

Rajiv Kumar on Wednesday 18th March 2026 at 07:51 Regarding Anniversary of Pt. Ved Dewana

यह पंक्तियां राजीव कुमार ने पंडित वेद दीवाना जी की स्मृति में भेजी 


ख़ुश्क आँखें हो गईं ग़म भी पुराने हो गए

आ तुझे देखे हुए कितने ज़माने हो गए


ज़िंदगी की तेज़ रफ़्तारी का ये आलम रहा

सुबह के ग़म शाम होते ही पुराने हो गए


तुमने जिसको क़त्ल करके छीन ली थी जायदाद

ज़ालिमों उस शख्स के बच्चे सयाने हो गए


ख़त्म होते ही बसेरा बाग़ से शहबाज़ का

पेड़ की शाख़ों पे कितने आशिआने हो गए


चाँद निकला फूल महके चल पड़ी ठंडी हवा

तेरी याद आई तो सब मंज़र सुहाने हो गए


कया करूँ इस दिल का तो सोचा बहुत कुछ था मगर

वो जब आया ख़त्म सब हीले बहाने हो गए


आज "दीवाना "मेरे हाथों में पत्थर देख कर

शहर के सारे मकां आईनाखाने हो गए

                        वेद दीवाना

 चलते चलते उन्हीं की दो और पंक्तियां:

दिल के सिवा कोई भी शरीके सफ़र न था

गुज़री है सारी उम्र इसी अजनबी के साथ

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