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Friday, November 28, 2025

मृत्युंजयी:भागवत झा ‘आज़ाद’ की महाकाव्य कृति का विमोचन

 प्रविष्टि तिथि: 28th November 2025 at 9:17 PM by PIB Delhi Regarding Book Release

"आज़ाद:एक सामाजिक चिंतक जो राजनीति से ऊपर उठे”–डॉ. सच्चिदानंद जोशी

भागवत झा की यात्रा:आंतरिक संघर्ष से संकल्प तक”–जनार्दन द्विवेदी


नई दिल्ली
: 28 नवंबर 2025: (PIB Delhi//हिंदी स्क्रीन डेस्क)::

सुप्रसिद्ध लेखक और प्रखर राजनीतिक चिंतक भागवत झा ‘आज़ाद’ के सम्‍मान में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित एक स्‍मरणीय अवसर पर उनके महाकाव्‍य ‘मृत्युंजयी’ का विमोचन किया गया और एक साहित्यिक चर्चा भी कार्यक्रम की अध्यक्षता राजनेता जनार्दन द्विवेदी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य–सचिव डॉ. सचिदानंद जोशी उपस्थित रहे। वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता और आशुतोष ने भी अपने विचार साझा किए। स्वागत भाषण भागवत झा आज़ाद के ज्येष्ठ पुत्र राजवर्धन आज़ाद द्वारा दिया गया।

उस अवसर पर राजनीतिक नेता जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि भागवत झा का जीवन आंतरिक संघर्ष से दृढ़ संकल्प तक की यात्रा था। उन्होंने आज़ाद के साथ बिताए कई व्यक्तिगत अनुभवों को भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि भागवत झा स्वतंत्रता सेनानियों की दूसरी पीढ़ी से थे, और वे उन्हें उसी पीढ़ी के एक प्रतिनिधि के रूप में देखते हैं। प्रारंभ से अंत तक वे एक ईमानदार और निष्कपट व्यक्ति बने रहे।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि यद्यपि उन्हें व्यक्तिगत रूप से भागवत झा आज़ाद से मिलने का अवसर कभी नहीं मिला, लेकिन धर्मयुग में उनके लेखन को पढ़ने का गहरा प्रभाव आज भी बना हुआ है। ऐसा हमेशा महसूस होता था कि राजनीति में सक्रिय रहते हुए भी वे राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्र और समाज की चिंताओं पर गहन मनन करते थे।

डॉ. जोशी ने आगे कहा कि उन्होंने लिखा है कि औपचारिक पदों और प्रचलित मार्गों से हटकर, जीवन के शांत और सरल पथों पर चलने का निर्णय स्वयं में एक गहन साधना है। विचारों की धारा भी आगे बढ़ती जाती है — उन नदियों की तरह जो एक-दूसरे में मिलकर विस्‍तृत होती जाती हैं, बिना सीमाओं के, बिना किसी अवरोध के। उनके लिए कविता केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं थी, बल्कि एक उपचार-प्रक्रिया थी जो भीतर की वेदना और संवेदनशीलता को शांत करती थी। यही कारण है कि यह कृति भी पाठक के मन पर वैसा ही शांत और पुनर्स्थापनकारी प्रभाव छोड़ती है।

आज़ाद जी के जीवन का सार मानो उनके ही शब्दों में सिमटा हुआ प्रतीत होता है — “मुझे सहारा मत दो, अवरोध दो; मैं अपना संसार स्वयं बना लूँगा। मैं भीख नहीं माँगता, मुझे स्वयं उठने दो।” ये पंक्तियाँ उनके संकल्प, आंतरिक शक्ति और अदम्य धैर्य की साक्षी हैं। यही कारण है कि इस कृति के दूसरे खंड में उनके जीवन के अनुभव, अपने क्षेत्र के प्रति वेदना, और उनकी आंतरिक दीप्ति अत्यंत प्रभावशाली रूप में प्रकट होते हैं।

पत्रकार आलोक मेहता ने कहा कि भागवत झा आज़ाद का व्यक्तित्व अत्यंत स्पष्टवादी, दृढ़-निश्‍चयी और अडिग था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इतने ऊँचे कद के व्यक्तित्व के योगदानों को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाना आवश्यक है। महाकाव्य ‘मृत्युंजयी’ के माध्यम से आज़ाद जी के बहुआयामी व्यक्तित्व को प्रभावशाली रूप से उजागर किया गया है। श्री मेहता ने यह भी सुझाव दिया कि आज़ाद जी के भाषणों का संकलन एक अलग ग्रंथ के रूप में प्रकाशित किया जाना चाहिए, जिससे उनके विचार और विज़न सबके लिए सुलभ हो सकें।

इसके अतिरिक्त, मेहता ने आज़ाद जी की कुछ कविताएँ भी प्रस्तुत कीं, जिनमें पाखंड और भ्रष्टाचार पर तीखा प्रहार किया गया है, साथ ही जातिवाद और साम्प्रदायिकता के विरुद्ध दृढ़ और अटूट संदेश भी निहित हैं। उन्होंने कहा कि इन पंक्तियों में केवल नैतिक साहस ही नहीं, बल्कि न्याय और सामाजिक सौहार्द के प्रति सतत् प्रतिबद्धता भी दिखाई देती है — जो एक ऐसे दूरदर्शी विचारक की मूल भावना को अभिव्यक्त करती हैं, जिनकी रचनाएँ आज भी प्रेरणा देती हैं।

वरिष्ठ पत्रकार अशुतोष कुमार ने कहा कि भागवत झा आज़ाद को भारतीय दर्शन और बौद्ध धर्म का गहन ज्ञान था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यदि आज़ाद जी सक्रिय राजनीति में न होते, तो वे साहित्य के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करते। यह पुस्तक बुद्ध की संपूर्ण दार्शनिक यात्रा और अष्टांगिक मार्ग का स्पष्ट और विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है। मानव मुक्ति के सिद्धांतों पर आज़ाद जी का गहन मनन रहा, और यही गंभीर चिंतन महाकाव्य मृत्युंजयी  में प्रारंभ से अंत तक पूरी तरह से प्रतिध्वनित होता है।

डॉ. सविता झा ने महाकाव्य ‘मृत्युंजयी’ से चयनित पंक्तियों का पाठ किया। उन्होंने कहा कि यद्यपि भागवत झा आज़ाद सक्रिय राजनीति में थे, परंतु मूलतः वे एक साहित्यकार थे और अंत तक साहित्यकार बने रहे। साहित्य के माध्यम से उन्होंने राजनीति से संवाद किया और अपने लेखन द्वारा राजनीतिक विमर्श को निरंतर समृद्ध किया। समारोह में अतिथियों का स्वागत भागवत झा आज़ाद के तीनों पुत्रों — डॉ. राजवर्धन आज़ाद, आईपीएस (सेवानिवृत्त) यशोवर्धन, और क्रिकेटर एवं सांसद कीर्तिवर्धन आज़ाद — ने किया।

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Sunday, September 10, 2023

किताब "द रेप फाइल" से बढ़ेगी इस अपराध पर नियंत्रण की जागृती

Saturday  9th September 2023 at 21:55 

किताब का विमोचन किया विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने 


लुधियाना
: 09 सितम्बर 2023: (मीडिया लिंक32//हिंदी स्क्रीन डेस्क)::

यह किसी ट्रेजेडी से कम तो नहीं कि सत्ता से जुड़े लोग आम तौर पर उसी बात का गंभीर नोटिस लेते हैं जिससे सत्ता को खतरा होता हो। जिस खबर या कविता के शब्दों से सत्ता का विरोध न होता हो आम तौर पर वह नज़र अंदाज़ ही रह जाती है। फिर वह खबर या कविता बेशक समाज का बेडा गर्क करने वाली हो उस पर कोई सियासत एतराज़ नहीं करती। परिणाम यह होता है कि आम  लोगों को पैदा होने वाले नए नए खतरों के खिलाफ न समाज चेत पाता है और न सत्ता या प्रशासन। वाहियात किस्म के विज्ञापन आते है कि फलां परफ्यूम लगाओ तो लड़कियां फंसने लगेंगी।  फलां टायर इस्तेमाल करो तो लड़कियां फंसेंगी। सरकार या समाज के साथ जुड़े किसी भी संगठन या विभाग ने इन लोगों के खिलाफ कभी एक्शन तक नहीं लिया। परिणाम होता है कि अनैतिकता बढ़ती चली जा रही है।  इसी के चलते रेप की घटनाएँ भी बढ़ती जा रही हैं। कानून ने थोड़ी सख्ती की तो जिस महिला वर्ग को पीड़ित समझा जाता था उसी में से कुछ लोग इसी कानून का फायदा उठाने लगे। 

बस जब कभी कोई ऐसी घटना मीडिया में आती है तो दो चार दिन हो हल्ला होता है इसके बाद फिर लोगों को भूल जाता है कि कब हुआ था किसके साथ रेप! फिर कोई नहीं घटना सामने आती है तो फिर से भूल जाती है। गौरतलब है कि इस तरह की जितनी घटनाएँ घटित होती हैं उनमें से बहुत कम की शिकायत ही लोगों तक पहुँचती है। कई मामलों में इस तरह से समझौता भी हो जाता है कि उसका कुछ पता भी नहीं लगता।  कई मामलों में दबाव बढ़ने से शिकायत वापिस भी हो जाती है। इस के परिणामों को पूरा समाज भुगतता भी है। इस तरह के मामलों में अदालत संज्ञान लेती रही है लेकिन फिर भी सब कुछ कभी न रुक पाया। अब इस तरह की प्रमुख घटनाओं को आधार बना कर इन्हें दस्तावेज़ी की तरह संभालने का प्रयास किया है लुधियाना के एक सक्रिय वकील ने। 

लुधियाना के सीनियर एडवोकेट मुनीष पुरंग ने सच्ची घटनाओं पर अधारित पहली किताब को लिखा है। इस किताब को नाम दिया गया है "द रेप फाइल"। यह किताब उन केसों पर अधारित है, जिनमें पहले महिलाओं ने पुरुषों पर  रेप का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करवाई। जब मामला अदालत में पहुंचा तो अपनी शर्तों पर समझौता किया। इसके बाद रेप के आरोपों से किनारा कर लिया। अदालत ने आरोपियों को बा इज्जत बरी कर दिया। इस तरह की बहुत सी दास्तानें हैं इस पुस्तक में।  शुक्रवार को विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने इस किताब का विमोचन किया है। 

किताब के लेखक एडवोकेट मुनीष पुरंग बताते है कि उनकी किताब में कुल 12 कहानियां है। यह सभी सच्ची घटनाओं पर अधारित है। इन 12 मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और अदालत में केस भी चले।  इन केसों में बतौर एडवोकेट उन्होंने आरोपियों की  तरफ से केस लड़ा है। सुनवाई दौरान शिकायतकर्ता महिलाओं ने अपनी शर्तों पर समझौता किया। इसके बाद रेप के आरोपों से किनारा कर लिया। इस मामले के आरोपियों को अदालत ने बा इज्जत बरी कर दिया। इसलिए मेरे मन में ख्याल आया क्यों न समाज में चल रहे इस  ब्लैकमेलिंग का खुलासा आम लोगों के सामने रखा जाए। इसलिए इस किताब को लिखा गया है। 

इस किताब को लिखने में लुधियाना के जाने माने सर्जन डाक्टर  केके अरोड़ा ने सबसे ज्यादा प्रेरित किया। शुक्रवार को किताब के विमोचन के समय राहुल शर्मा, हरदियाल सिंह, मन्नू पुरंग, आरएस मंड, इंदरपाल सिंह, मैडम गरिमा, नरिंदर सिंह, सुखविंदर सिंह धालीवाल सहित कई अन्य लोग मौजूद थे। 

वकील मुनीश पुरंग ने केवल इस तरह की घटनाओं और मामलों को सहेजा ही नहीं बल्कि फैसला होने के बाद की हालतों में कुरेदा भी है। इनमें से ब्लैकमेलिंग की संभावना का भी पता लगाया है। समाज में ऐसा होना अब आम भी होने लगा है। इसे एक हथियार की तरह भी इस्तेमाल किया  जाने लगा है।  यही सिलसिला जारी रहा तो क्या बनेगा समाज का? क्या वकील मुनीश पुरंग की चिंताओं में सामजिक संगठन अपना योगदान देंगें? 

अब देखना है कि इस तरह के ने ट्रेंड की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। मुकरने वाली लड़कियों/महिलाओं के साथ कानून अतीत में भी सख्ती से पेश आता रहा है लेकिन शायद इस सख्ती को और बढ़ाना पड़ेगा। 

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Wednesday, January 25, 2023

अंतस् की 42 वीं गोष्ठी//दो काव्य-पुस्तकों का विमोचन

Wednesday 25th January 2023 at 01:02 PM

'अभी तो सागर शेष है..' और मन की गली (पार्ट 2) लोकार्पित हुए 


नई दिल्ली
: 21 जनवरी 2023: (
हिंदी स्क्रीन ब्यूरो):: 

स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव काल में तथा गणतंत्र दिवस और वसंत उत्सव के माहौल में आयोजित अंतस् की 42 वीं गोष्ठी काव्य के विभिन्न रसों और विधाओं में उत्कृष्ट, मनहर अभिव्यक्तियों से आच्छादित रही।

इस गोष्ठी की अध्यक्षता की डॉ आदेश त्यागी ने। आर डब्ल्यू ए, विवेक विहार, दिल्ली के प्रधान श्री आनंद गोयल  के सान्निध्य में उन्ही के निवास स्थान पर आयोजित इस गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में श्री देवेंद्र गिरी (प्रधान ए ब्लॉक) अति विशिष्ट अतिथि श्री शिव कुमार गुप्ता (प्रधान, बाला जी मंदिर) ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से ऊर्जा प्रदान की।

बतौर विशिष्ट अतिथि डॉ तारा गुप्ता ने शिरकत की।

अनुशासित एवं रोचक संचालन  पूनम माटिया का रहा।

श्रीमती अंशु जैन और श्रीमती सुनीता अग्रवाल के श्रेष्ठ संयोजन में आयोजित इस नवरस गोष्ठी में वागीश्वरी के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत वाणी-वंदना अपने सुमधुर स्वर में प्रस्तुत की डॉ ममता वार्ष्णेय ने।

स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया श्री देवेंद्र प्रसाद सिंह ने।

श्रेष्ठ काव्य प्रस्तुत किया डॉ आदेश त्यागी, डॉ तारा गुप्ता, डॉ ममता वार्ष्णेय, डॉ पूनम माटिया, श्री सत्येंद्र जैन सरस, श्री रजनीश त्यागी राज, डॉ नीलम वर्मा, श्री देवेंद्र प्रसाद सिंह, श्री विनयशील चतुर्वेदी, श्री सुरेशपाल वर्मा जसाला और श्रीमती अनुपमा पांडेय भारतीय ने।

काव्य पाठ की सरस धारा के अतिरिक्त इस गोष्ठी की विशेषता रहा दो काव्य-पुस्तकों का मंचासीन द्वारा विमोचन।

पूनम माटिया कृत 'अभी तो सागर शेष है..' द्वितीय परिष्कृत संस्करण

 तथा 

श्रीमती सुनीता अग्रवाल द्वारा लिखित -मन की गली(पार्ट 2) लोकार्पित हुए।

विशेष उद्बोधनों के क्रम में    मंचासीन अतिथियों द्वारा सभा को संबोधित किया गया तथा श्रीमती पूजा गोयल ने रोचक कविता का  पाठ किया।

सुधि और सहृदय श्रोताओं के रूप में उपस्थित अनेक गणमान्य व्यक्तियों में  श्री नरेश माटिया, श्री निर्मल जैन, श्रीमती पूजा गोयल, श्रीमती राजरानी गुप्ता, श्रीमती ऋतु भाटिया, श्री मनोज शर्मा, श्रीमती सुमन राजदान और श्रीमती बिमला शर्मा शामिल रहे।

अंत में औपचारिक रूप से सभी को श्रीमती अंशु जैन ने सभी की उपस्थिति और काव्यात्मक समिधा हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया।

जन-गण-मन के सामूहिक गान के बाद स्वादिष्ट जलपान का सभी ने आनंद लिया। श्री आनंद गोयल जी के नवजात पौत्र की ख़ुशी में ग़ज़ब रसगुल्लों के साथ समाप्त हुई यह अविस्मरणीय गोष्ठी।

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Wednesday, December 1, 2021

भाषा विभाग की ओर से फलक की नई पुस्तक रिलीज़

 जसप्रीत फ़लक का काव्य संग्रह 'अठवें रंग दी तलाश' अब मार्किट में 


लुधियाना
: 1 दिसंबर 2021: (हिंदी स्क्रीन ब्यूरो):: 

उर्दू के साथ साथ हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी में अपना हाथ आज़माने वाली शायरा जसप्रीत कौर फलक का नाम किसी जान पहचान का मोहताज नहीं है। उसने लगातार लिखा है और सक्रिय हो कर उसे छपवाया भी है। लिख लिख कर पांडुलिपियों का ढेर लगाने वाले ज़माने में जसप्रीत कौर फलक ने प्रकाशक ढूंढे या प्रकाशकों ने इस शायरा को ढून्ढ ´निकाला लेकिन कुछ कुछ अंतराल के बाद जसप्रीत कौर फलक की कोई न कोई पुस्तक सामने आती रही। इन पुस्तकों पर चर्चा  भी काफी हुई। इस बार जसप्रीत कर फलक सामने ै है अपनी नई पंजाबी पुस्तक को लेकर। पुस्तक का नाम है आठवें रंग की तलाश। फलक की इस नई पुस्तक को रिलीज़ करने का  यादगारी आयोजन करवाया भाषा विभाग पंजाब ने। आयोजन में बहुत से नामी कलमकार शामिल हुए।  

प्रसिद्ध हिन्दी कवयित्री जसप्रीत कौर फ़लक के नये पंजाबी कविता संग्रह 'अठवें रंग दी तलाश' का लोकार्पण भाषा विभाग पंजाब की ओर से आयोजित 'पंजाबी माह' के भव्य 'विदाई समारोह' में मुख्य अतिथि शिरोमणि पंजाबी आलोचक डॉ. जसविंदर सिंह, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. सुरजीत लीअ, विशेष मेहमान शिरोमणि पंजाबी साहित्यकार निंदर घुंघिआणवी और पंजाबी, हिंदी, उर्दू साहित्य के अनेक प्रमुख हस्ताक्षरों के कर-कमलों के द्वारा सम्पन्न हुआ। 

भाषा विभाग की डायरेक्टर श्रीमती करमजीत कौर ने जसप्रीत कौर फ़लक की इस सृजनात्मक उपलब्धि पर उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की और उन्हें भविष्य में निरंतर सृजनशील रहने के लिए प्रेरित किया। जसप्रीत कौर फ़लक ने इस पल को अपने जीवन का अविस्मरणीय पल बताया। इस समारोह में विख्यात पंजाबी गायिका अमर नूरी विशेष रूप से उपस्थित थीं। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर प्रसिद्ध साहित्यकार ओमप्रकाश गासो, दीपक जालंधरी, सरदार पंछी, सतनाम सिंह, वीरपाल कौर आदि समेत अनेक गणमान्य साहित्यकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

Monday, November 1, 2021

लुधियाना के पंजाबी भवन में हुआ अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन

डॉ. अंजना कुमार की पुस्तक "कुछ मेरे दिल ने कहा" का विमोचन 


लुधियाना
: 31 अक्टूबर 2021: (ज्योति बजाज//हिंदी स्क्रीन)::

ईश्वर के आशीर्वाद से साहित्यक दीप वेलफेयर सोसाइटी (रजि) द्वारा तिथि 31 अक्टूबर, 2021 दिन रविवार को शहर लुधियाना के पंजाबी भवन में अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं डॉ. अंजना कुमार जी की लिखी हुई पुस्तक "कुछ मेरे दिल ने कहा" का विमोचन समारोह भी आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में श्रीमती डॉ. अंजना कुमार जी कानपुर से यहां उपस्थित हुई। सुप्रसिद्ध गज़लकार एवं लेखक श्री सागर सियालकोटी जी और श्री तरसेम नूर जी ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की भूमिका निभाई। मुख्य मेहमान के रूप में अजय सिंह जी(अंबाला),  विवेक जी, गौरव जी तथा धरेंद्र सिंह जी भी शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत ज्योति प्रज्वलन करने के बाद  कुमारी श्वेता जी ने सरस्वती वंदना पढ़ के की। मंच संचालन का कार्य बड़ी ही शालीनता एवं प्रेम से श्रीमती शैली  वाधवा जी एवं श्री अकरम बलरामपुरी जी ने संभाला। इस कवि सम्मेलन में नेपाल से फयाज़ फैज़ी जी, योगेंद्र सुन्द्रियाल जी दिल्ली से, शब्द दीप्ती जी करनाल से, मनोज मनमौजी जी फरीदाबाद से, चंद्रमणि चंदन जी दिल्ली से, क्रांति पांडे दीप क्रांति जी मध्य प्रदेश से, शिवेश ध्यानी जी सहारनपुर से, हरी  बहादुर सिंह प्रतापगढ़ से, प्रांशु जैन देवबन्द से, गिरीश सोनवाल राजस्थान से शामिल हुए। इसके अतिरिक्त लुधियाना से मलकीत सिंह मालधा जी, मोनिका कटारिया जी, पूनम सपरा जी, सिमरन धुग्गा जी, सुखमनदीप कौर मिनी जी, छाया शर्मा जी, रंजीत कौर सवी जी एवं इरादीप त्रेहन जी ने इस कवि सम्मेलन में अपनी अनूठी प्रस्तुतियां पेश कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। 

साहित्यक दीप  वेलफेयर सोसाइटी (रजि) कार्यक्रम में पहुंच कर अपना स्नेह एवं आशीर्वाद देने वाले हर साहित्य प्रेमी को  प्रेम पूर्वक धन्यवाद करती है।  कार्यक्रम के अंत में इस संस्था की संस्थापिका कुमारी रमनदीप कौर (हरसर जाई) जी, सह संस्थापिका ज्योति बजाज जी एवं सेक्रेटरी सरदार बूटा सिंह काहने के कार्यक्रम की कामयाबी के लिए सच्चे दिल से ईश्वर को धन्यवाद देते हो यही प्रार्थना की कि हमारी संस्था द्वारा साहित्य की सेवा होती रहे एवं संस्था को साहित्य प्रेमियों से प्रेम मिलता रहे। --ज्योति बजाज 

Thursday, September 23, 2021

सोनिया पाहवा की दूसरी पुस्तक "कीमती जज़्बात" हुई रिलीज़

Thursday 23rd September 2021 at 08:22 PM Whatsapp

GCG लुधियाना में सहायक प्रोफेसर हैं मिस सोनिया पाहवा


लुधियाना: 23 सितंबर 2021: (अमृतपाल सिंह//कार्तिका सिंह//हिंदी स्क्रीन)::

लुधियाना के प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थानों में से एक है लड़कियों का राजकीय कालेज अर्थात जीसीजी। इस शिक्षण संस्थान में जहां सिलेबस की पढ़ाई होती है हुए उच्च शिक्षा प्रदान की जाती है वहीं साहित्य और कला के क्षेत्र में ऊँची उड़ान का मौका सभी को दिया जाता है। इसका अहसास हुआ एक नई पुस्तक के विमोचन को देख कर। 

अपनी पहली पुस्तक "ट्यून इनटू द वर्ल्ड ऑफ रेडियो" की शानदार सफलता के बाद गवर्नमेंट कॉलेज गर्ल्स, लुधियाना में सहायक प्रोफेसर का तौर पर कार्यरत्त सोनिया पाहवा ने आज अपनी दूसरी पुस्तक, कीमती जज़्बात का विमोचन किया।  

पुस्तक का विमोचन करते हुए सहायक प्रोफेसर सोनिया पाहवा ने कहा कि वह लंबे समय से अपनी भावनाओं को पाठकों तक पहुंचाना चाहती थीं।  इस पुस्तक में लिखी गई शायरी के माध्यम से उन्होंने अपनी अनमोल भावनाओं को लोगों के सामने पेश किया है और उम्मीद है कि पहली किताब की तरह इस किताब को भी लोगों का प्यार मिलेगा| यह किताब Amazon, Flipkart आदि पर मिल सकती है।

इस पुस्तके के विमोचन की औपचारिक रस्म अदा करते हुए गवर्नमेंट कॉलेज गर्ल्स, लुधियाना की प्रिंसिपल डॉ सुखविंदर कौर ने कहा कि यह उनके कॉलेज के लिए बहुत ही गर्व की बात है।  मैडम सोनिया पाहवा की इस किताब में शायरी को बेहद खूबसूरत अंदाज में पेश किया गया है और वे ना केवल अध्यापन के क्षेत्र में नाम कमा रही हैं बल्कि लेखन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रही हैं। 

इस तरह यह कॉलेज व समस्त स्टाफ के लिए फखर की बात है।  पुस्तक के विमोचन के अवसर पर श्रीमती कृपाल कौर (उप प्रधानाचार्य), श्रीमती गुरजिन्दर बराड़ (अंग्रेज़ी विभागाध्यक्ष) तथा अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित थे। अन्य साहित्य प्रेमियों ने भी ीा आयोजन में भाग लिया। 

Tuesday, July 14, 2020

कलापीठ की ओर से फ़िरोज़पुर में दो हिंदी बाल पुस्तकों का विमोचन

Tuesday: 14th July 2020 at 17:58 Messenger  
शायर अनिल आदम ने सम्पादित की हैं दोनों हिंदी बाल पुस्तकें 
फ़िरोज़पुर14 जुलाई 2020: (हिंदी स्क्रीन ब्यूरो)::
जब पंजाब में गोली की भाषा बोली जा रही थी। हर तरफ सहम था। दहशत सी छै हुई थी। कलमकार भी बंट गए थे। कोई हिन्दू बन गया था तो कोई सिख। कोई सरकारी बन गया था तो कोई बागी। उस समय भी कलापीठ नामक संस्था इस बात पर ज़ोर देती रही कि कलमकार केवल कलमकार ही रहे। वह सच बोलने वाला ही रहे। वह सियासत, जाती-पाति, धर्मों और मज़हबों से ऊपर उठ कर केवल इंसान ही रहे। कलापीठ ने इसी तरह का संदेश देते आयोजन उन दिनों भी करवाए जब बोलना बेहद मुश्किल हो गए था। नफरत और अंधी हिंसा के उस दौर में भी कलापीठ ने शब्दों के ज़रिए लोगों के दिलों में प्रेम के दीप जलाये। अंधेरों के खिलाफ अपने शब्दों को रौशनी फैलाकर सत्य को बुलंद किया। एक नया इतिहास रचा उन दिनों कलापीठ ने। 
अब जबकि कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है तो इस नाज़ुक समय में भी कलापीठ सक्रिय है हमेशां की तरह। शब्द संस्कृति को फ़ैलाने और उत्साहित करने के लिए भी कलापीठ निरंतर काम कर  रही है। कोरोना के चलते सरकार की तरफ से जारी स्वास्थ्य सावधानी के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए कलापीठ के साहित्यिक आयोजन जारी हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का भी बाकायदा ध्यान रखा जाता है और अन्य ज़रूरी बातों का भी।  
बहुत ही सादगी से हुए ऐसे ही एक आयोजन में दो हिंदी पुस्तकों का विमोचन हुआ। "संगीतकार गधा" और "घमंड का सिर नीचा" नामक इन पुस्तकों को सम्पादित किया है जानेमाने शायर अनिल आदम ने। 
इस मौके पर कार्यक्रम के प्रधानगी मंडल में शामिल रहे प्रिंसिपल दिनेश, प्रोफेसर गुरतेज कोहारवाला, प्रोफेसर जसपाल घई, प्रोफेसर कुलदीप और अनिल आदम। 
प्रोफेसर जसपाल घई ने शायर अनिल आदम की शख्सियत और उसकी रचना पर जानकारी दी। उसके रचनात्मक अंदाज़ और साधना की भी चर्चा की। सुखजिंदर फ़िरोज़पुर ने बाल साहित्य के इतिहास प्रसंग को आज के संदर्भ में जोड़कर प्रस्तुत किया और इसे मौजूदा समय की एक प्रमुख आवश्यकता भी कहा। प्रोफेसर गुरतेज कोहारवाला ने बाल साहित्य के क्षेत्र में अनिल आदम के आने को बहुत ही शुभ बताया। प्रिंसिपल दिनेश ने ही अनिल आदम और कलापीठ के परसों की प्रशंसा की। 
मंच संचालक की ज़िम्मेदारी निभाते हुए हरमीत विद्धार्थी ने कालेज प्रबंधन, प्रिन्सिपलौर स्टाफ को धन्यवाद कहा। साथ ही अनिल आदम को अपनी इस नई उपलब्धि पर बधाई भी दी। इस अवसर पर प्रोफेसर कुलदीप, राजीव ख्याल, कपिल देव, डाक्टर अमनदीप सिंह, डाक्टर जीत पाल, यादविंदर सिंह, इक़बाल सिंह और अन्य लोग भी शामिल हुए। (डेस्क इनपुट:कार्तिका सिंह)

Wednesday, January 8, 2020

विश्व पुस्तक मेले से लौटकर कविता वर्मा की विशेष रिपोर्ट

Tuesday: 8th January 2020 at 3:44 PM
यह पुस्तक मेला गांधी जी को समर्पित है
नई दिल्ली: 7 जनवरी 2020: (कविता वर्मा//हिंदी स्क्रीन)::
दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले का इंतजार पुस्तक प्रेमियों लेखकों और प्रकाशकों को साल भर रहता है। अभी कुछ वर्षों से यह जनवरी के प्रथम शनिवार से दूसरे रविवार तक लगने लगा है। हालांकि इस समय दिल्ली कड़ाके की ठंड और कोहरे की गिरफ्त में होती है और दूरदराज के प्रदेशों से आने वाले पुस्तक प्रेमियों लेखकों को ट्रेन बस या फ्लाइट की लेटलतीफी या निरस्त होने की आशंका से जूझना पड़ता है। लेकिन फिर भी उनका उत्साह कम नहीं होता।  
 यह पुस्तक मेला एक ही छत के नीचे लेखकों के आपसी मेलजोल पुस्तक विमोचन अपने प्रिय लेखक से मिलने और कुछ चर्चा परिचर्चा का अवसर देता है। लगभग हर दिन विभिन्न प्रकाशकों के स्टॉल पर बड़ी संख्या में पुस्तक विमोचन होता है। इस स्टॉल से उस स्टाॅल तक रेलम पेल लगी रहती है। लेखक खुद अपने दोस्तों परिचितों को याद दिला दिला कर स्टॉल तक खींच लाते हैं वहां जो भी वरिष्ठ साहित्यकार उपस्थित होते हैं उन्हीं के हाथों विमोचन करवाया जाता है। 
कुछ  बड़े या कहें लोकप्रिय प्रकाशक जिनके यहां से बहुत पुस्तकों का प्रकाशन होता है वह कुछ मीडिया फोटोग्राफर या वीडियो ग्राफर को भी बुलाते हैं और फिर बकायदा कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग होती है। लेखक और वरिष्ठों की बाइट ली जाती है जिसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करके पुस्तक की पब्लिसिटी की जाती है। 
दरअसल पुस्तक मेले में पुस्तक विमोचन लोगों का जमावड़ा फोटो वीडियो आदि का  समस्त तामझाम सोशल मीडिया या अपने अपने यूट्यूब चैनल पर पुस्तक के प्रचार-प्रसार के लिए ही होता है। इसमें न लेखक को अलग से खूब इंतजाम करना होते हैं और न प्रकाशक को कोई खर्च। अब इस सब में कुछ मित्र गण मन से कुछ रिश्तो की खातिर तो कुछ शर्मा शर्मी में कुछ किताबें खरीद लेते हैं। कुछ वहीं के वहीं गिफ्ट भी कर दी जाती हैं समीक्षा की उम्मीद में। वरिष्ठ भी इस बात से खुश होते हैं कि पुस्तक मेले में झोले भरकर किताबें मिलीं। बहरहाल किताबें लिखी जा रही हैं प्रकाशित हो रही हैं और उसकी सूचना प्रसारित हो रही है यह जरूरी है और पुस्तक मेला यह कार्य बखूबी कर रहा है। लगभग सभी हिंदी भाषी प्रदेशों के लेखक और प्रकाशक सूचनाओं के आदान-प्रदान में लगे हैं। 
इस वर्ष देश गांधी जी का डेढ़ सौ वाँ जन्म वर्ष मना रहा है और यह पुस्तक मेला गांधी जी को समर्पित है। पुस्तक मेले के बैनर पोस्टर पर गांधी जी की तस्वीर और डेढ़ सौ का शून्य उनका चरखा इस शून्य होती संवेदना के युग में नया वितान रचता है। इस चरखे से बना सूत गांधी जी के हाथों में बड़ा संदेश देते हैं । 
पुस्तक मेला हर वर्ष हॉल 12 ए में  लगता है इस बार इसका आकार काफी बड़ा है। जहाँ हिंदी इंग्लिश के साथ अन्य भाषाओं की पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। हॉल 12 ए में प्रवेश के साथ ही योग खानपान आचार व्यवहार  प्रेरणादायक कहानियों की पुस्तकों के स्टॉल हैं जहाँ सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। वहीं बच्चों के लिए बाल कहानी कविता खिलौने वर्क बुक भी बहुतायत में उपलब्ध हैं। बच्चों के लिए आजकल खूब साहित्य लिखा जा रहा है और कई बड़े साहित्यकार बच्चों के लिए लिख रहे हैं। बाल साहित्य की रंग बिरंगी मोटे चिकने पृष्ठों की मोटी मोटी किताबें भी साहित्य के प्रकाशन से छप रही हैं। हालांकि अभी इस बाल साहित्य का आकलन होना बाकी है। नेशनल बुक ट्रस्ट बाल साहित्य पर अच्छा काम कर रहा है लेकिन साहित्य की अन्य विधाओं की तरह ही इस पर किसी तरह का पैमाना नहीं है। मोटे चिकने रंग-बिरंगे पृष्ठों में किताबों की कीमत भी बढ़ा दी है जिससे वह एक वर्ग विशेष की पहुंच तक रह गई हैं और वह वर्ग विशेष शायद पुस्तकों में रुचि ही नहीं रखता। प्रकाशक लेखक अगर दिखने की सुंदरता के मोह से बाहर आएं और पेपर बैक में सामान्य रेखा चित्रों के साथ बाल साहित्य की पुस्तकों को प्रकाशित करें तो इनकी पहुंच सही हाथों तक हो सकती है। 
पुस्तक मेले में बड़े नामी और पुराने प्रकाशकों के यहाँ भारी भीड़ देखी जाती है और यह भी रिसर्च पुस्तकों के लिए ज्यादा उमड़ती है। हिंदी साहित्य में रिसर्च संबंधित वरिष्ठ साहित्यकारों नामवर सिंह धर्मवीर भारती कमलेश्वर की पुस्तकें यहां पेपर बैक में उचित मूल्य पर उपलब्ध हैं। यहाँ प्रकाशक किसी सेलिब्रिटी की बायोग्राफी या अन्य पुस्तकों पर उनके हस्ताक्षर सहित पुस्तक का प्रलोभन देकर अच्छी कमाई करते हैं। 
मेले के बीचो बीच एक मंच पर चर्चा परिचर्चा विमोचन साक्षात्कार के कार्यक्रम लगातार चलते हैं। लगभग पचास लोगों की बैठक व्यवस्था के साथ आधे से एक घंटे के टाइम स्लॉट में अलग-अलग कार्यक्रम होते रहते हैं जिन्हें कोई भी अपनी रूचि के अनुसार देख सुन सकता है। इसी मंच पर  मशहूर एक्टर  प्रेम चोपड़ा की बायोग्राफी के हिंदी अनुवाद का विमोचन का कार्यक्रम भी हुआ यश पब्लिकेशन से आए इस अनुवाद को किया श्रुति अग्रवाल ने और इंग्लिश में बायोग्राफी लिखी है स्वयं प्रेम प्रेम चोपड़ा की बेटी ने।
 हर वर्ष कार्यक्रमों की संख्या बढ़ती जा रही है इसलिए एक अन्य हॉल में भी सेमिनार हॉल उपलब्ध है इस हाल में इंग्लिश और अन्य भाषाओं की पुस्तकों के स्टॉल भी हैं। 
हार्ड कॉपी में प्रकाशित पुस्तकों का अपना महत्व है लेकिन आज का युवा डिजिटल हो गया है और सोशल मीडिया के प्रचार-प्रसार के बाद अगला दौर डिजिटल साहित्य का है। आज कई वेब पोर्टल ईमैग्जीन चलताऊ से लेकर अच्छा सार्थक साहित्य उपलब्ध करवा रहे हैं। इन्हीं में एक मातृ भारती पोर्टल ने तो बकायदा लेखकों को प्रकाशन पूर्व मानदेय देना भी प्रारंभ किया है। आज इस वेब पोर्टल पर हजारों कहानियाँ कविताएँ लघुकथाएँ और उपन्यास उपलब्ध हैं। जो संपादन टीम की नजरों से गुजर कर इस वेब पोर्टल पर पहुंचते हैं और डाउनलोड के आधार पर अपने पाठकों की संख्या की जानकारी भी लोगों तक पहुंचा रहे हैं। 
 युवा वर्ग इस डिजिटल माध्यम से ही भारतीय साहित्य तक पहुंच रहा है अन्यथा वह देशी विदेशी इंग्लिश या अनुवादित पुस्तकों तक सीमित है। अगर कहा जाए कि ये वेबपोर्टल  युवाओं को भारत से जोड़ रहे हैं तो गलत नहीं होगा। 
कुल मिलाकर विश्व पुस्तक मेला साहित्य का बड़ा समागम है इसका आकर्षण ही इसकी सार्थकता है। यहाँ आया हर लेखक प्रकाशक पाठक समीक्षक आलोचक और युवा यहाँ से कुछ लेकर ही जाता है चाहे वे किताबें हो मिलने जुलने की संतुष्टि हो या अच्छी यादें।          --कविता वर्मा