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Wednesday, February 1, 2023

इन्द्रप्रस्थ साहित्य भारती ने किया विशेष आयोजन

01st February 2023 at 2:45 PM WhatsApp  

डाक्टर पूनम माटिया भी विशेष तौर पर शामिल हुईं 


गाज़ियाबाद: 1 फरवरी 2023: (कार्तिका सिंह//हिंदी स्क्रीन डेस्क)::

डाक्टर पूनम माटिया जी जैसी साहित्यिक शख्सियत जहां भी हों वहां साहित्य के फूल निरंतर खिलते रहते हैं। केवल किसी एक इलाके में ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी साहित्य की सुगंध निरंतर महसूस होने लगती है। हिंदी स्क्रीन के लिए प्राप्त हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक जिस कार्यक्रम की हम चर्चा कर रहे हैं यह आयोजन गत  दिनों 28 जनवरी 2023 दिन शनिवार को चन्द्रनगर क्लब में हुआ। प्रबंधकों के सफल प्रबंध के कारण यह एक यादगारी आयोजन बन पाया। 

इसी कार्यक्रम में लेखक बीरसैन जैन सरल की पुस्तक "सरल काव्य मंजूषा" का लोकार्पण भी हुआ। पुस्तक विमोचन के सुअवसर पर कवि सम्मेलन भी किया गया। इस मुशायरे में जिसमें वरिष्ठ गीतकार रामचरण साथी के संचालन में हास्य कवि सुनहरी लाल तुरन्त, गीतकार कवि इन्द्रजीत सुकुमार, पूनम माटिया, राजेन्द्र प्रसाद राजन ने श्रैत्र के श्रौताओ का अपनी कविताओं से खूब मनोरंजन किया। बीरसैन सरल ने भी अपनी "आज बचपन की याद बहुत आती है" कविता सुनाकर श्रोताओं को बचपन की यादों में खो जाने को मजबूर कर दिया संस्था के महामंत्री अखिलेश कुलश्रेष्ठ ने समापन पर विशेष अतिथि श्री श्री भगवान अग्रवाल निगम पार्षद, सभा के अध्यक्ष मनोज कुमार शर्मा, प्रवीण आर्या, मंच संचालन गीतकार रामचरण साथी, अन्य सभी कवियों का आभार प्रकट किया।

इस सुअवसर पर विशेष तौर पर शामिल हुईं जानीमानी शायरा डाक्टर पूनम माटिया की मौजूदगी अपने आप में बहुत यादगारी रहीं। डा पूनम माटिया वही शायरा हैं जिन्होंने दशकों पहले काव्य साधना शुरू की थी। उनकी पुस्तकों  की चर्चा साहित्यिक क्षेत्रों में अक्सर होती रहती है। हिंदी के साथ साथ अंग्रेज़ी और पंजाबी में भी उनके बारे में लिखा जाता। 

आजकल अपने अनुभव का खज़ाना वह फिर से साहित्य प्रेमियों में बाँट रही हैं। 

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Wednesday, January 25, 2023

अंतस् की 42 वीं गोष्ठी//दो काव्य-पुस्तकों का विमोचन

Wednesday 25th January 2023 at 01:02 PM

'अभी तो सागर शेष है..' और मन की गली (पार्ट 2) लोकार्पित हुए 


नई दिल्ली
: 21 जनवरी 2023: (
हिंदी स्क्रीन ब्यूरो):: 

स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव काल में तथा गणतंत्र दिवस और वसंत उत्सव के माहौल में आयोजित अंतस् की 42 वीं गोष्ठी काव्य के विभिन्न रसों और विधाओं में उत्कृष्ट, मनहर अभिव्यक्तियों से आच्छादित रही।

इस गोष्ठी की अध्यक्षता की डॉ आदेश त्यागी ने। आर डब्ल्यू ए, विवेक विहार, दिल्ली के प्रधान श्री आनंद गोयल  के सान्निध्य में उन्ही के निवास स्थान पर आयोजित इस गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में श्री देवेंद्र गिरी (प्रधान ए ब्लॉक) अति विशिष्ट अतिथि श्री शिव कुमार गुप्ता (प्रधान, बाला जी मंदिर) ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से ऊर्जा प्रदान की।

बतौर विशिष्ट अतिथि डॉ तारा गुप्ता ने शिरकत की।

अनुशासित एवं रोचक संचालन  पूनम माटिया का रहा।

श्रीमती अंशु जैन और श्रीमती सुनीता अग्रवाल के श्रेष्ठ संयोजन में आयोजित इस नवरस गोष्ठी में वागीश्वरी के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत वाणी-वंदना अपने सुमधुर स्वर में प्रस्तुत की डॉ ममता वार्ष्णेय ने।

स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया श्री देवेंद्र प्रसाद सिंह ने।

श्रेष्ठ काव्य प्रस्तुत किया डॉ आदेश त्यागी, डॉ तारा गुप्ता, डॉ ममता वार्ष्णेय, डॉ पूनम माटिया, श्री सत्येंद्र जैन सरस, श्री रजनीश त्यागी राज, डॉ नीलम वर्मा, श्री देवेंद्र प्रसाद सिंह, श्री विनयशील चतुर्वेदी, श्री सुरेशपाल वर्मा जसाला और श्रीमती अनुपमा पांडेय भारतीय ने।

काव्य पाठ की सरस धारा के अतिरिक्त इस गोष्ठी की विशेषता रहा दो काव्य-पुस्तकों का मंचासीन द्वारा विमोचन।

पूनम माटिया कृत 'अभी तो सागर शेष है..' द्वितीय परिष्कृत संस्करण

 तथा 

श्रीमती सुनीता अग्रवाल द्वारा लिखित -मन की गली(पार्ट 2) लोकार्पित हुए।

विशेष उद्बोधनों के क्रम में    मंचासीन अतिथियों द्वारा सभा को संबोधित किया गया तथा श्रीमती पूजा गोयल ने रोचक कविता का  पाठ किया।

सुधि और सहृदय श्रोताओं के रूप में उपस्थित अनेक गणमान्य व्यक्तियों में  श्री नरेश माटिया, श्री निर्मल जैन, श्रीमती पूजा गोयल, श्रीमती राजरानी गुप्ता, श्रीमती ऋतु भाटिया, श्री मनोज शर्मा, श्रीमती सुमन राजदान और श्रीमती बिमला शर्मा शामिल रहे।

अंत में औपचारिक रूप से सभी को श्रीमती अंशु जैन ने सभी की उपस्थिति और काव्यात्मक समिधा हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया।

जन-गण-मन के सामूहिक गान के बाद स्वादिष्ट जलपान का सभी ने आनंद लिया। श्री आनंद गोयल जी के नवजात पौत्र की ख़ुशी में ग़ज़ब रसगुल्लों के साथ समाप्त हुई यह अविस्मरणीय गोष्ठी।

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