28-फरवरी-2013 14:03 IST
हम क्या बनेंगे, यह हम पर निर्भर है–पी. चिदम्बरम
आज लोकसभा में अगले वित्त वर्ष का आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने तमिल संत कवि तिरूवल्लूर और स्वामी विवेकानंद के कथनों को दोहराते हुए कहा कि अगर हम सही फैसले और सही चुनाव करें, तो भारत विश्व की पांच बड़े देशों में स्थान पा सकता है। अपने बजट भाषण का समापन करते हुए श्री चिदम्बरम ने कहा कि भारत विश्व की दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 तक हम आठवें स्थान पर या सातवें स्थान पर आ सकते हैं। वर्ष 2025 तक भारत पांच खरब डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बन सकता है, जो विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी।
स्वामी विवेकानंद के कथन को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा- ‘आपको जितनी शक्ति और हिम्मत चाहिए, वह आपके अंदर है। इसलिए, आप अपने भविष्य का निर्माण करें’। उन्होंने कहा कि 2013-14 का आम बजट उसी भविष्य की दिशा में ठोस कदम है। (PIB)
मीणा/राजगोपाल/प्रदीप/सुधीर/संजीव/इंद्रपाल/बिष्ट/शदीद/सुनील/शौकत/मनोज -785
26-फरवरी-2013 16:28 IST
पर्यटकों के अनुभव अधिक सुखद बनाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान
रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने आज संसद में वर्ष 2013-14 का रेल बजट पेश करते हुए कहा कि रेल घरेलू तथा विदेशी पर्यटकों, दोनों के लिए यात्रा का एक लोकप्रिय साधन है। पर्यटकों के अनुभव अधिक सुखद बनाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं।· जम्मू एवं कश्मीर राज्य सरकार के सहयोग से मल्टी-मॉडल ट्रेवल पैकेज की शुरूआत करना।
· रेलवे टिकट बुकिंग के समय रेल द्वारा यात्रा कर रहे तीर्थयात्रियों को माता वैष्णो देवी श्राइन के लिए ‘यात्रा पर्ची’ जारी करना।
· स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्थानों की यात्रा करने के लिए रियायती किरायों पर ‘आजादी एक्सप्रेस’ नामक एक शैक्षणिक पर्यटक गाड़ी की शुरूआत करना।
· बिलासपुर, विशाखापट्नम, पटना, नागपुर, आगरा, जयपुर और बैंगलूरू आदि सात स्टेशनों पर एक्जीक्यूटिव लाउंज शुरू करना। (PIB)
वि.कासोटिया/अलकेश/अंबुज/प्रदीप/प्रियंका/लक्ष्मी/तारा/सुनील/सोनिका/राजू/18
06-फरवरी-2013 15:36 IST
एक दशक के दौरान पहली बार बाघों की संख्या में वृद्धि
संरक्षण:विशेष लेख - अशोक हांडू *
देर से ही सही पर यह एक शुभ समाचार है। भारत में पिछले एक दशक के दौरान पहली बार बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है। इसके लिए संरक्षण के बेहतर प्रयासों को श्रेय जाता है। इस समय बाघों की संख्या 1706 है, जो वर्ष 2008 की संख्या के मुकाबले 295 अधिक है। उस समय बाघों की संख्या 1411 थी।
लेकिन यह इस मामले में संतुष्टि की छोटी सी बात है। मुख्य बात यह है कि पिछले वर्षों से बाघों की संख्या में लगातार कमी हो रही है, जो चिंता का कारण है।
बड़ी बिल्ली की अन्य प्रजाति- तेंदुए के बारे में भी कहानी कोई अलग नहीं है। वर्ष 2012 के पहले नौ महीनों में भारत में 252 तेंदुए की मौत हुई, जो भारतीय वन्य जीव संरक्षण सोसायटी के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 1994 से यह संख्या सबसे अधिक है। सन 1911 में यह संख्या 187 थी। एक दशक पहले यह संख्या औसतन लगभग 200 प्रति वर्ष थी।
जैसा हमने लिखा है, भारत में जनवरी महीने में कम से कम तीन और बाघों की मृत्यु हो गई है। 1994 से 2010 तक हमने 923 बाघ खो दिए हैं। देश में लगभग 100 वर्ष पहले बाघों की संख्या करीब 40 हजार थी, जो अब मुट्ठी भर रह गई है। बाघों की संख्या में कमी की कहानी वास्तव में समूचे विश्व में एक समान ही है। अनुमान है कि विश्व में बाघों की संख्या कोई 3500 से 4000 के आसपास है। इनमें से आधे भारत में हैं।
लगभग आधे से ज्यादा तेंदुए अवैध व्यापार के लिए मार दिए जाते हैं। बावजूद इसके कि बाघ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत सुरक्षित हैं, उसका शिकार किया जाता है। उसके शरीर के अंगों, खासकर खाल का गैर-कानूनी तरीके से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार किया जाता है। चीतों के बारे में भी यही स्थिति है। उनका रहने का क्षेत्र मात्र दस प्रतिशत क्षेत्र में रह गया है और सिमटकर लगभग 75 लाख एकड़ हो गया है। आवास के अलावा बाघ अपने शिकार की प्रजातियां भी खोता जा रहा है। इससे इसका मनुष्यों के साथ टकराव हो गया है जिसके परिणामस्वरूप बाघों का ज्यादा शिकार होने लगा है। हालांकि सरकार ने सन 1972 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम पारित करके बाघों के शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन समस्या अभी भी वैसी ही बनी हुई है। अन्य महत्वपूर्ण बात यह है कि पहाड़ी और वन्य क्षेत्रों में सड़कों के जाल और पन-बिजली परियोजनाओं जैसे विकास कार्यों के कारण बाघों के प्राकृतिक आवास में काफी कमी हो गई है। इससे लिए वनों के निकट लोगों की तेजी से बढ़ती हुई आबादी एक अन्य कारण है।
यदि कुछ बुनियादी बातों पर ध्यान दिया जाए तो इस स्थिति में बदलाव की अभी भी आशा है, ये बाते हैं – बाघों के अवैध शिकार पर कड़ी नजर, लोगों में इस बात की जागरुकता पैदा करना कि बाघों का संरक्षण स्वयं मानवता के हित में है, क्योंकि पर्यावरण व्यवस्था में संतुलन और वन्य क्षेत्रों के निकट रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बाघों का होना जरूरी है। इस क्षेत्र में समर्पित गैर सरकारी संगठनों का संज्ञान लेकर उनकी भागीदारी बढ़ाने और उन्हें पूर्ण समर्थन देने से भी लाभ होगा।
कुछ निराशाओं के बावजूद, परियोजना बाघ के अच्छे परिणाम निकले हैं। सत्तर के दशक में जब बाघों की जनसंख्या सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी, उस समय 1973 में यह परियोजना शुरू की गई थी। सत्तर के दशक में जहां यह संख्या 1200 पहुंच गई थी वहां नब्बे के दशक में यह 3500 हो गई, हालांकि बाद में इसमें फिर कमी होने लगी थी।
हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकारों और संघ शासित प्रदेशों को बाघ संरक्षण योजनाएं तैयार करने को कहा है। उसने उन्हें ऐसा करने के लिए छह महीने का समय दिया है। यह योजनाएं कार्यान्वित किए जाने से पहले राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की स्वीकृति के लिए भेजी जानी हैं। गत वर्ष जुलाई में उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय पार्कों और वन्य जीव अभ्यारण्य में पर्यटन पर अंतरिम प्रतिबंध लगाया था। अभ्यारण्यों को बाघों के आवास की आवश्यकता के अनुसार तैयार किया गया है, पर इस ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। न्यायालय ने इन क्षेत्रों में पर्यटन पर लगा अंतरिम प्रतिबंध बाद में हटा लिया। लेकिन सभी हितधारकों से इस बारे में उपयुक्त कार्रवाई करने को कहा गया है।
दुर्लभ जीवों के संरक्षण को महत्व देने के लिए देश में पांच और वन्य जीवों के पांच और पार्क बनाने को स्वीकृति दी गई है। बाघों से छह और संरक्षणस्थल बनाने का भी प्रस्ताव है। इनकों मिलाकर ऐसी अभ्यारण्यों की संख्या 41 से बढ़कर 52 हो जाएगी। राष्ट्रीय पार्कों और वन्यजीव अभ्यारण्यों की संख्या भी उत्तरोत्तर बढ़ रही है।
योजना आयोग ने भी 12वीं योजना में बाघ संरक्षण के लिए आवंटन में उदारता बरती है। कहने का तात्पर्य है कि बाघ संरक्षण को बड़ा महत्व दिया गया है। आयोग ने 12वीं योजना में बाघ संरक्षण के लिए 5889 करोड़ रुपए का आवंटन किया है जबकि 11वीं योजना में यह राशि मात्र 651 करोड़ रुपए थी। इससे आवंटित राशि में नौ गुना वृद्धि होने का पता चलता है। अन्य सभी दुर्लभ प्रजातियों के लिए आवंटित राशि 3600 करोड़ रुपए है। इनमें हाथी, शेर, हिरन, गैंडा और तेंदुआ शामिल हैं, जिनकी संख्या 45,000 से अधिक है। यह दलील दी जाती है कि बाघ को महत्व देने से अन्य कुछ प्रजातियां जैसे हिरन व गैंडा स्वतः लाभान्वित होंगी। यह किसी हद तक सत्य हो सकता है लेकिन अन्य प्रजातियों के बारे में संभवतः अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
हजारों वर्ष से बाघों के शिकार को हैसियत का प्रतीक मान लिया गया है। उसे यादगार के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसके अंग एशिया की परंपरागत दवाइयों में प्रयोग किए जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप 1930 तक बाघों की संख्या में कमी आती रही। बाघों की नौ प्रजातियों में से तीन प्रजातियां पहले ही विलुप्त हो गई हैं। इसलिए खासकर बाघों की आबादी और सामान्य रूप में वन्य जीवों की अन्य प्रजातियों की घटती संख्या पर रोक लगाने के लिए अधिक कारगर उपाय करने की आवश्यकता है। यह हमारे हित में है और इस बारे में त्रुटि महंगी सिद्ध हो सकती है। चुनौती बड़ी जरूर है लेकिन इसे पूरा करना ही होगा। (पसूका) (PIB)
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*लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं
नोटः लेखक द्वारा इस विशेष लेख में व्यक्त विचार उसके अपने हैं।
वि. कासोटिया/क्वात्रा/इंद्रपाल/अर्जुन.. 37
22-फरवरी-2013 19:49 ISTन्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) (सुश्री) ऊषा मेहरा आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) (सुश्री) ऊषा मेहरा आयोग ने आज अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी, जिसे केन्द्रीय विधि और न्याय मंत्री श्री अश्वनी कुमार और केन्द्रीय गृह सचिव श्री आर.के. सिंह ने प्राप्त किया।
इस आयोग का गठन 26 दिसम्बर 2012 को दिल्ली में 16 दिसम्बर को एक युवती के साथ दुराचार और बर्बर हमले की स्तब्ध कर देने वाली घटना के विभिन्न आयामों की जांच के लिए किया गया था। आयोग को तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी, जिसे उसने समय से पहले ही पूरा कर लिया। (PIB)***वि.कासोटिया/अजित/राजेश-703
22-फरवरी-2013 18:34 IST
राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली में जनता के रहेगी लिए 24 मार्च तक
केन्द्रीय संस्कृति मंत्री श्रीमती चंद्रेश कुमारी कटोच ने आज 'खुसरो का संसार' नामक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली के संग्रह से प्राप्त 22 कला वस्तुएं (7 पांडुलिपियां- किरण अस सैदान, इजाज ए खुसरवि, हश्त बिहिस्त, शिरीन खुसरो), 2 लघुचित्र पेन्टिंग (निजामुद्दीन औलिया और राग बसंत), 6 वाद्य यंत्र 7 सजावटी कला कृतियों को प्रदर्शित किया गया है।
संस्कृति, विज्ञान और कला के क्षेत्र में अमीर खुसरो का योगदान अमीर खुसरो देलवी के 13वीं-14वीं शताब्दी काल की कला और संस्कृति की सूझबूझ और आज देश में उसकी निरंतरता को दर्शाता है। इस प्रदर्शनी में भारतीय विरासत, इतिहास और संस्कृति में अमीर खुसरो के बहुआयामी योगदान का भी अच्छा प्रदर्शन किया गया है। उन्होंने 2 महान सभ्यताओं का मिलन देखा था और उन्होंने इसका अपनी साहित्यिक कृतियों में इतनी खूबसूरती से उपयोग किया है कि इरान और मध्य एशिया के धुरन्धरों को भी उन्होंने पीछे छोड़ दिया है। इस प्रदर्शनी के दौरान 8 मार्च 2013 को राष्ट्रीय संग्रहालय के सभागार में उस्ताद जमील अहमद के मसनवी गायन का आयोजन किया जाएगा। यह प्रदर्शनी जनता के लिए 24 मार्च 2013 (सोमवार को छोड़कर) तक खुली रहेगी। (PIB)***
वि.कासोटिया/इंद्रपाल/रामकिशन -695
22-फरवरी-2013 12:17 ISTउपराष्ट्रपति ने हैदराबाद में हुए बम धमाकों की निंदा कीभारत के उपराष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी ने हैदराबाद में हुए दोहरे बम धमाके की निंदा की है। धमाकों में मारे गए निर्दोष लोगों के परिवार के प्रति उन्होंने गहरी संवेदना व्यक्त की है और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की है। मुश्किल की इस घड़ी में उन्होंने सभी नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। (PIB) मीणा/विजयलक्ष्मी/संजना-676 22-फरवरी-2013 12:13 ISTप्रधानमंत्री ने बम धमाकों की निंदा की,शांति की अपीलप्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने हैदराबाद में हुए बम धमाकों की कड़ी निंदा की है। धमाकों में लोगों के मरने के प्रति दुःख जाहिर करते हुए उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने केन्द्रीय एजेंसियों से आंध्र प्रदेश राज्य प्राधिकारियों को राहत ऑपरेशन में हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि -“यह एक कायरतापूर्ण हमला है, और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
उन्होंने धमाके में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिवारजनों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो लाख रुपए तथा गंभीर रुप से घायलों के लिए पचास हजार रुपए प्रत्येक की घोषणा की। (PIB)मीणा/विजयलक्ष्मी/संजना-675
22-फरवरी-2013 15:24 IST
भारत में 2011 में 61.3 मिलियन व्यक्ति मधुमेह से पीडित थे
अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह फेडरेशन के आंकड़ों के अनुसार भारत में वर्ष 2011 में 20 वर्ष और उससे अधिक आयु के 61.3 मिलियन व्यक्ति मधुमेह से पीडित थे। राज्य/संघशासित क्षेत्र के हिसाब से मधुमेह से पीडित व्यक्तियों के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार अस्वस्थ आहार, शारीरिक श्रम का अभाव, एल्कोहल का हानिकारक उपयोग, अधिक वजन, मोटापा, तम्बाकू सेवन आदि इस असंचारी रोग के बढ़ने के कारण हैं।
भारत सरकार ने 21 राज्यों के 100 जिलों में 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कैंसर, मधुमेह तथा हृदयघात (एनपीसीडीसीएस) की रोकथाम तथा नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया। इस का उद्देश्य जागरूकता फैलाकर, व्यवहार तथा जीवन शैली में बदलाव लाना, उच्च रक्तचाप के लक्षण वाले व्यक्तियों का जल्द निदान करके असंचारी तथा मधुमेह की रोकथाम और इसे नियंत्रित करना है। यह कार्यक्रम 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को विभिन्न स्वास्थ्य केन्द्रों जैसे जिला अस्पताल, सामुदायिक केन्द्र तथा उप-केन्द्रों में इन रोगों के उचित उपचार के लिए विभिन्न अवसर पर जांच प्रदान करता है।
ये जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री गुलाम नबी आजाद ने आज लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। (PIB)मीणा/शोभा/यशोदा - 687