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Wednesday, September 23, 2020

टेली-लॉ कार्यक्रम पर सफलता की कहानियों की पहली पुस्तिका

23-सितम्बर-2020 10:15 IST

'रीचिंग द अनरिच्‍ड-वॉइसेज ऑफ द बेनिफिसिएरीज' जारी


 नई दिल्ली: 23 सितंबर 2020: (पीआईबी//हिंदी स्क्रीन)::

न्याय विभाग ने टेली-लॉ कार्यक्रम पर सफलता की कहानियों की पहली पुस्तिका का ई-संस्करण 'रीचिंग द अनरिच्‍ड - वॉइसेज ऑफ द बेनिफिसिएरीज' शीर्षक के तहत जारी किया। 

टेली-लॉ कार्यक्रम ने 29 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के 115 आकांक्षी जिलों सहित 260 जिलों के दूरदराज के क्षेत्रों में 3 लाख से अधिक लाभार्थियों को कानूनी सलाह प्रदान की समय पर एवं बहुमूल्य कानूनी सलाह प्रदान करने के लिए इस पहल के तहत गरीब, दलित, कमजोर और दूरदराज के समूहों एवं समुदायों को पैनल के वकीलों से जोड़ने के लिए स्मार्ट तकनीकों का उपयोग किया गया। 

केंद्रीय न्‍याय विभाग ने अपने टेली-लॉ कार्यक्रम की यात्रा को मनाने के लिए 'टेली-लॉ - रीचिंग द अनरिच्ड, वॉइसेज ऑफ द बेनिफिसिएरीज' शीर्षक के तहत अपनी पहली पुस्तिका जारी की है। यह लाभार्थियों की वास्तविक जीवन की कहानियों और टेली-लॉ कार्यक्रम के तहत उन्‍हें विवादों को सुलझाने के लिए दी गई कानूनी सहायता का एक मनोरम पठनीय संग्रह है। इस प्रकार के विवाद दैनिक जीवन को प्रभावित करते हैं। वर्तमान में इस कार्यक्रम के तहत 29 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के 260 जिलों (115 आकांक्षी जिलों सहित) और 29,860 सीएससी के जरिये भौगोलिक रूप से दुर्गम एवं दूरदराज के क्षेत्रों में 3 लाख से अधिक लाभार्थियों को कानूनी सलाह दी गई है।

यह पठनीय पुस्तिका कानूनी सहायता के एक अनिवार्य घटक के तौर पर कानूनी सलाह लेने के लिए ग्रामीणों को शिक्षित करने और उन्‍हें प्रोत्साहित करने में पैरालीगल स्वयंसेवकों और ग्रामीण स्तर के उद्यमियों की भूमिका को उजागर करती है। यह वैकल्पिक विवाद तंत्र के माध्यम से अपने विवादों को निपटाने में आम आदमी के डर और मिथकों को सफलतापूर्वक तोड़ती है। बहुत ही सरल कहानियों में यह 6 श्रेणियों को उजागर करता है जिनमें अन्याय के खिलाफ लड़ाई, संपत्ति विवादों का निपटान, कोविड पीडि़तों को राहत देना, सूचना के साथ सशक्तिकरण, प्रक्रियागत बाधाओं से निपटना और घरेलू शोषण के खिलाफ कार्रवाई शामिल हैं।

भारत सरकार के 'डिजिटल इंडिया विजन' के अुनरूप न्याय विभाग इस कार्यक्रम को गति देने और न्‍याय तक सभी की पहुंच को वास्‍तविक बनाने के लिए 'उभरते' और 'स्‍वदेशी' डिजिटल प्लेटफॉर्मों का उपयोग कर रहा है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए वर्ष 2017 में टेली-लॉ कार्यक्रम को लॉन्‍च किया गया था ताकि मुकदमेबाजी से पहले के चरण में ही विवादों को निपटाया जा सके। इस कार्यक्रम के तहत पंचायत स्तर पर कॉमन सर्विस सेंटर के व्‍यापक नेटवर्क के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए स्‍मार्ट तकनीक, टेलीफोन/ इंस्टेंट कॉलिंग आदि सुविधाएं उपलब्‍ध हैं। इन सुविधाओं का उपयोग गरीब, दलित, कमजोर, दूरदराज के समूहों एवं समुदायों को पैनल के वकीलों से जोड़ने के लिए जाता है ताकि उन्‍हें समय पर एवं बहुमूल्य कानूनी सलाह दी जा सके।

कानूनी विवादों का शुरू में ही पता लगाने, उनमें हस्तक्षेप करने और उनकी रोकथाम की सुविधा उपलब्‍ध के लिए विशेष तौर पर डिजाइन की गई टेली-लॉ सेवा सीएससी- ई जीओवी और एनएएलएसए द्वारा उपलब्‍ध कराए गए अग्रणी स्वयंसेवकों के एक कैडर जरिये समूहों और समुदायों तक पहुंचती है। ये जमीनी स्‍तर के योद्धा अपने क्षेत्र में गतिविधियों के दौरान आवेदकों के पंजीकरण और अपॉइंटमेंट के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन से लैस होते हैं। लाभार्थियों को निरंतर कानूनी सलाह एवं परामर्श प्रदान करने के लिए समर्पित वकीलों के एक समूह को तैनात किया गया है। समृद्ध आईईसी को उसके सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया गया है जिसे https://www.tele-law.in पर एक्सेस किया जा सकता है। वास्तविक समय में डेटा हासिल करने और प्रदान की गई सलाह की प्रकृति को देखने के लिए एक अलग डैशबोर्ड तैयार किया गया है। निकट भविष्य में जिला स्तर पर विस्‍तृत विवरण सुनिश्चित करने के लिए डेटा को पीएमओ प्रेयर्स पोर्टल पर भी डाला जा रहा है। 

देश के सभी जिलों को कवर करने की आकांक्षा और कानूनी सहायता श्रृंखला के तहत टेली-लॉ को एक अद्भुत स्तंभ के रूप में स्थापित करने के लिए न्याय विभाग तिमाही आधार पर इस प्रकार की परिवर्तनकारी एवं सशक्तिकरण वाली कहानियों का प्रकाशन जारी रखेगा।

'टेली-लॉ - रीचिंग द अनरिच्ड, वॉइसेज ऑफ द बेनिफिसिएरीज' पुस्तिका देखने के लिए यहां क्लिक करें

******** नई पुस्तिकाएं//हिंदी स्क्रीन 

Friday, February 22, 2013

मधुमेह के मामले

22-फरवरी-2013 15:24 IST
भारत में 2011 में 61.3 मिलियन व्‍यक्ति मधुमेह से पीडित थे
अंतर्राष्‍ट्रीय मधुमेह फेडरेशन के आंकड़ों के अनुसार भारत में वर्ष 2011 में 20 वर्ष और उससे अधिक आयु के 61.3 मिलियन व्‍यक्ति मधुमेह से पीडित थे। राज्‍य/संघशासित क्षेत्र के हिसाब से मधुमेह से पीडित व्‍यक्तियों के आंकड़े उपलब्‍ध नहीं हैं। 

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) के अनुसार अस्‍वस्‍थ आहार, शारीरिक श्रम का अभाव, एल्‍कोहल का हानिकारक उपयोग, अधिक वजन, मोटापा, तम्‍बाकू सेवन आदि इस असंचारी रोग के बढ़ने के कारण हैं। 

भारत सरकार ने 21 राज्‍यों के 100 जिलों में 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कैंसर, मधुमेह तथा हृदयघात (एनपीसीडीसीएस) की रोकथाम तथा नियंत्रण के लिए राष्‍ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया। इस का उद्देश्‍य जागरूकता फैलाकर, व्‍यवहार तथा जीवन शैली में बदलाव लाना, उच्‍च रक्‍तचाप के लक्षण वाले व्‍यक्तियों का जल्‍द निदान करके असंचारी तथा मधुमेह की रोकथाम और इसे नियंत्रित करना है। यह कार्यक्रम 30 वर्ष से अधिक आयु के व्‍यक्तियों को विभिन्‍न स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों जैसे जिला अस्‍पताल, सामुदायिक केन्‍द्र तथा उप-केन्‍द्रों में इन रोगों के उचित उपचार के लिए विभिन्‍न अवसर पर जांच प्रदान करता है। 

ये जानकारी स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री श्री गुलाम नबी आजाद ने आज लोकसभा में एक लिखित प्रश्‍न के उत्‍तर में दी। (PIB)
मीणा/शोभा/यशोदा - 687

Monday, February 11, 2013

गृह मंत्रालय की मासिक रिपोर्ट-जनवरी, 2013

11-फरवरी-2013 18:53 IST
केंद्रीय गृहमंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे का आज नई दि‍ल्‍ली में एक मासि‍क पत्रकार सम्‍मेलन में दि‍या गया वक्‍तव्‍य इस प्रकार है:- मणिपुर के घाटी स्थित एक विद्रोही समूह यू पी पी के, जिसे पहले प्रीपाक-शांति गुट के नाम से जाना जाता था, के 4 महिला काडरों सहित 47 काडरों ने मणिपुर के सीमावर्ती कस्‍बे मोरेह में मणिपुर पुलिस तथा असम रायफल्‍स के सामने आत्‍मसमर्पण किया। उन्‍होंने कुछ मात्रा में आर डी एक्‍स सहित 37 हथियार जमा करवाए। गृह मंत्रालय ने म्‍यांमार से उनके प्रत्‍यर्पण को सुगम बनाया। यह आत्‍मसर्मपण करने वाला पहला प्रमुख वी बी आई जी है तथा यह सराहनीय बात है। 

2. राज्‍य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की योजना (एम पी एफ स्‍कीम) को 12,378 करोड़ रूपये के प्रावधान से वर्ष 2012-13 से वर्ष 2016-17 तक पांच वर्षों के लिए जारी रखने के प्रस्‍ताव को मंत्रिमंडल द्वारा 7 फरवरी, 2013 को अनुमोदित किया गया है। इसमें योजनेत्तर के अंतर्गत 8628 करोड़ रुपये (महानगर पुलिस व्‍यवस्‍था के लिए 432 करोड़ रुपये सहित) तथा योजनागत के अन्‍तर्गत 3750 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है। 

3. यौन उत्‍पीड़न के दोषसिद्ध व्‍यक्तियों को मृत्‍यु दंड सहित कड़ी सजा दिलवाने के लिए सरकार ने दिनांक 3 फरवरी, 2013 को दंड विधि (संशोधन) अध्‍यादेश 2013 प्रख्‍यापित किया है। 

4 28-29 जनवरी को, मैं ढाका में बंगलादेश के गृह मंत्री, डॉ. मुहिउद्दीन खान आलमगीर से मिला। हमने भारत सरकार और बंगलादेश के बीच प्रत्‍यर्पण संधि तथा संशोधित यात्रा व्‍यवस्‍था पर हस्‍ताक्षर किए जिससे दोनों देशों की विधि प्रवर्तन एजेन्सियों के बीच सहयोग करने, आपराधिक गतिविधियों को रोकने, वीज़ा प्रक्रिया को आसान बनाने तथा लोगों के बीच परस्‍पर सम्‍पर्क को बढ़ाना सुनिश्चित होगा। 

5. हमने जीरो रेखा से 150 गज के भीतर विकास कार्य आरंभ करने तथा सीमाओं के दोनों ओर से नियमित परस्‍पर- सम्‍पर्क बनाने के लिए सहमति दी। स्‍थानीय मुद्दों को हल करने के लिए सीमावर्ती जिलों के जिला आयुक्‍तों और जिला मजिस्‍ट्रेटों के बीच परामर्श शुरू हो गया है। मेरा यह विश्‍वास है कि विभिन्‍न स्‍तरों पर नियमित आदान-प्रदान से परस्‍पर सहमति बढ़ेगी तथा मुद्दों का हल निकलेगा। 

6. 10 जनवरी, 2013 को, कनाडा के माननीय आप्रवासन मंत्री, श्री जसॉन किन्‍नी ने भी नई दिल्‍ली में मुझ से मुलाकात की और परस्‍पर हित के द्विपक्षीय सुरक्षा मामलों पर विचार-विमर्श किया। 

7. झारखण्‍ड के राज्‍यपाल की सिफारिशों पर, केन्‍द्रीय मंत्रिमण्‍डल ने 17.01.2013 को आयोजित अपनी बैठक में, राज्‍य विधान सभा को निलम्‍बन की स्थिति में रखते हुए, भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 356 (1) के अन्‍तर्गत झारखण्‍ड राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन लगाने संबंधी उदघोषणा जारी करने के प्रस्‍ताव का अनुमोदन किया। राष्‍ट्रपति ने 18 जनवरी, 2013 को उदघोषणा को स्‍वीकृति प्रदान कर दी है। 

8. 3 जनवरी 2013 को भारत के राष्‍ट्रपति ने विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) संशोधन अधिनियम 2012 को मंजूरी दी। इस अधिनियम में किसी संगम को विधिविरुद्ध घोषित किए जाने की अ‍वधि को बढ़ाकर 2 से 5 वर्ष किया गया है। उच्‍च गुणवत्ता वाली भारतीय पेपर करेंसी, सिक्‍के अथवा अन्‍य किसी सामग्री का उत्‍पादन अथवा तस्‍करी अथवा परिचालन करके भारत की आर्थिक स्थिरता को क्षति पहुंचाना आतंकवादी गतिविधि के रूप में घोषित किया गया है। 

9. दिनांक 22 जनवरी, 2013 को, प्रथम अपर मेट्रो‍पोलिटन सत्र न्‍यायाधीश का न्‍यायालय, हैदराबाद को राष्‍ट्रीय अन्‍वेषण अभिकरण के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिसके अध्‍यक्ष माननीय न्‍यायमूर्ति जी. लक्ष्‍मीपति होंगे। 

10.  दिनांक 24 जनवरी, 2013 को मंत्रिमंडल ने विशेष उद्योग पहल योजना, ‘उड़ान’ को और अधिक लचीली एवं संगत बनाने के लिए इसके मानदंडों के संशोधन संबंधी प्रस्‍ताव को अनुमोदित कर दिया है। 

11. जम्‍मू एवं दिल्‍ली में रह रहे पात्र कश्‍मीरी प्रवासियों के लिए नकद राहत को प्रति व्‍यक्ति प्रति माह 1250 रु. (प्रत्‍येक परिवार के लिए अधिकतम 5000 रु.) को दिनांक 1 जुलाई 2012 से भूतलक्षी प्रभाव से बढ़ाकर प्रति व्‍यक्ति प्रति माह 1650 रु. (प्रत्‍येक परिवार के लिए अधिकतम 6600 रु.) किया गया। 

12. केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बलों को भूमि के अधिग्रहण के लिए 103 करोड़ रु. तथा कार्यालय/आवासीय भवनों के निर्माण के लिए 57.5 करोड़ रु. की राशि स्‍वीकृत की गई है। 

13. वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्‍यों में सुरक्षा और विकास संबंधी मुद्दों के बारे में मंत्रिमंडल सचिव की अध्‍यक्षता में को वामपंथी उग्रवाद संबंधी समीक्षा समूह की दो बैठकें दिनांक 28 जनवरी, 2013आयोजित की गईं। 

14. जनवरी, 2013 के दौरान, आई वी एफ आर टी के अंतर्गत एकीकृत ऑनलाइन वीजा आवेदन प्रणाली को डबलीन (आयरलैंड) तथा रेकजाविक (आईसलैंड) में स्थित भारतीय मिशनों में प्रचालनात्‍मक बनाया गया है। यह सुविधा अब विदेशों में स्थित 103 भारतीय मिशनों में प्रचालन में है। 

15. भारत के राष्‍ट्रपति ने 108 पदम पुरस्‍कार अनुमोदित किए हैं, जिनमें 4 पदम विभूषण, 24 पदम भूषण तथा 80 पदम श्री पुरस्‍कार शामिल हैं। 

16. गणतन्‍त्र दिवस, 2013 के अवसर पर 875 पुलिस पदक घोषित किए गए जिनमें शौर्य के लिए राष्‍ट्रपति का एक पुलिस पदक, शौर्य के लिए 115 पुलिस पदक, विशिष्‍ट सेवा के लिए राष्‍ट्रपति के 88 पुलिस पदक तथा सराहनीय सेवा के लिए 671 पुलिस पदक शामिल हैं।

17. 26 जनवरी, 2013 को 3 सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक, 10 उत्तम जीवन रक्षा पदक तथा 37 जीवन रक्षा पदकों सहित पुरस्‍कारों की 50 जीवन रक्षा पदक श्रृंखला के लिए सिफारिशें अधि‍सूचित की गईं। 

18. गणतन्त्र दिवस, 2013 को 37 सुधारात्‍मक सेवा पदक प्रदान किए गए, जिनमें विशिष्ट सेवा के लिए राष्‍ट्रपति के 5 सुधारात्‍मक सेवा पदक, सराहनीय सेवा के लिए 29 सुधारात्‍मक सेवा पदक तथा शौर्य के लिए राष्‍ट्रपति के 3 सुधारात्‍मक सेवा पदक शामिल हैं। 

19. क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्‍टम (सी सी टी एन एस) की एक प्रायोगिक परियोजना 4 जनवरी, 2013 को शुरू की गई। इस प्रायोगिक परियोजना में 25 राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों में लगभग 2000 पायलट स्‍थानों की कनेक्टिविटी की अलग से व्‍यवस्‍था है। केन्‍द्रीय प्रायोगिक परियोजना की शुरूआत के बाद, आंध्र प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान, झारखण्‍ड, केरल, सिक्किम, ओडिशा, हरियाणा, त्रिपुरा, मिजोरम, अण्‍डमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, दादरा एवं नगर हवेली, दमण एवं दीव तथा राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली ने भी इस माह के दौरान यह परियोजना आरंभ कर दी है। 

20. भारत-बंगलादेश सीमा पर, 3 सीमा चौकियों का निर्माण जनवरी, 2013 के दौरान पूरा किया गया। 

21.  सरकार ने भारत-चीन सीमा पर भारत-तिब्‍बत सीमा पुलिस की प्राथमिकता वाली 27 सड़कों को स्‍वीकृति प्रदान की है जो कुल 805 कि.मी. होती हैं। पूरा किया गया संचयी कार्य 562.66 कि.मी. फॉरमेशन तथा 248.93 कि.मी. सर्फेसिंग है। 

22. जनवरी, 2013 तक तटीय सुरक्षा के अंतर्गत 131 तटीय पुलिस स्‍टेशनों में से 118 के लिए भूमि निर्धारण के कार्य को अंतिम रूप से दिया गया है तथा 74 मामलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है। तटीय राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा 36 घाटों के लिए भूमि निर्धारण का कार्य पूरा कर लिया गया है। 

23. बी ए डी पी के अन्‍तर्गत वर्ष 2012-13 के बजट में निर्धारित कुल 990 करोड़ रु. के परिव्‍यय में से, 844 करोड़ रू. (85.26%) की राशि आज की स्थिति के अनुसार सभी 17 बी ए डी पी वाले राज्‍यों को जारी की जा चुकी है। 
24. यू आई डी ए आई नामांकन सॉफ्टवेयर का उपयोग करके, राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर (एन पी आर) तैयार करने के लिए बायोमेट्रिक्‍स प्राप्‍त करने की प्रक्रिया मणिपुर, नागालैंड, राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली, महाराष्‍ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाड़ु, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा एवं पश्चिम बंगाल राज्‍यों में चल रही है। आज की स्थिति के अनुसार, 10.19 करोड़ से अधिक व्‍यक्तियों का बायोमेट्रिक्‍स प्राप्‍त कर लिया गया है जिनमें से 1.16 करोड़ व्‍यक्तियों का बायोमेट्रिक्‍स इस महीने के दौरान लिया गया है। 111 करोड़ से अधिक व्‍यक्तियों के लिए डाटा एन्‍ट्री का कार्य पूरा कर लिया गया है जिनमें से 6 करोड़ व्‍यक्तियों की डाटा एन्‍ट्री इस महीने की गई है। तटीय एन पी आर के अंतर्गत, अब तक 61.15 लाख से अधिक कार्ड बना लिए गए हैं। 
(PIB)
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वि.कासोटिया/सुनील-530

Wednesday, February 6, 2013

दो चरणों में बिछेगा नक्सल क्षेत्रों में सडकों का जाल


05-फरवरी-2013 20:24 IST
केंद्र सरकार ने दी चौमुखी सडक सम्पर्क को मंजूरी
सरकार ने नक्‍सल प्रभावित जिलों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधीन चौमुखी संपर्क कायम करने को अपनी मंजूरी दे दी है। केन्‍द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराम नरेश ने आज यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि राज्‍यों की सरकारें दो चरणों में विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर सकती हैं। राज्‍य सरकारें ढांचे का निर्माण, ग्रेवल बेस आदि का निर्माण पहले चरण के अधीन कर सकती हैं, जबकि दूसरे चरण में बिटुमिनस अथवा कंक्रीट की सतह तैयार करना शामिल है। उन्‍होंने कहा कि राज्‍यों को पहले चरण का कार्य पूरा करने की अनुमति दी जाएगी और कानून व्‍यवस्‍था को ध्‍यान में रखते हुए मार्च 2015 से पहले दूसरे चरण के लिए विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट भेजने के लिए कहा जाएगा। 

नक्‍सल प्रभावित 82 जिले के 52,000 आवास स्‍थलों में से 30,000 आवास स्‍थलों को इसमें शामिल किया गया है, किंतु अब तक केवल 19,000 आवास स्‍थलों को ही सड़कों से जोड़ा गया है।(PIB)

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वि.कासोटिया/सुधीर/मनोज-450

नक्सलबाड़ी स्क्रीन में भी देखिये 
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधीन

कामरेड स्क्रीन में देखिये:नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सडकों का जाल 

Friday, February 1, 2013

लोकपाल विधेयक 2011 में सरकारी संशोधन

01-फरवरी-2013 20:10 IST
प्राथमिक जांच का आदेश दिए बिना सीधे जांच करने का अधिकार
लोकपाल के चयन का कॉलि‍जियम: विधेयक में लोकपाल के सदस्‍यों का चयन प्रधानमंत्री, अध्‍यक्ष (लोकसभा), नेता विपक्ष (राज्‍यसभा), भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीशों या मुख्‍य न्‍यायाधीश द्वारा मनोनीत सुप्रीम कोर्ट के न्‍यायाधीश और राष्‍ट्रपति द्वारा नामित जाने-माने न्‍यायविद की चयन समिति द्वारा किए जाने का प्रावधान है। प्रवर समिति ने सिफारिश की है कि चयन समिति का पांचवां सदस्‍य (जाने-माने न्‍यायविद) चयन समिति के चार सदस्‍यों की सिफारिश पर राष्‍ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाए। सरकार के इस सिफारिश को स्‍वीकार कर लिया है। सार्वजनिक एवं दान प्राप्‍त करनेवाली संस्‍थाओं पर अधिकार क्षेत्र प्रवर समिति ने जनता द्वारा दान प्राप्‍त करने वाली संस्‍थाओं और संस्‍थानों को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है। सरकार ने सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत ऐसी संस्‍थानों या प्राधिकारियों को छूट देने का निश्‍चय किया है जिनका गठन या नियुक्ति किसी केन्‍द्रीय पर राज्‍य या प्रांतीय अधिनियम के तहत सार्वजनिक धार्मिक या धर्मादि ट्रस्‍टों या इंडोमेंट्स या धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों में किया गया हो। सार्वजनिक रूप से दान प्राप्‍त करनेवाली अन्‍य गैरसरकारी संस्‍थाएं लोकपाल के दायरे में रहेंगी।सीधे तौर पर जांच करने का अधिकार: प्रवर समिति ने सिफारिश की है कि लोकपाल को प्राथमिक जांच का आदेश दिए बिना सीधे जांच करने का अधिकार दिया जाए बशर्ते कि लोकपाल को लगे कि प्रथम दृष्‍टया मामला बनता है। सरकार ने इस संशोधन के साथ यह भी सिफारिश स्‍वीकार कर ली है कि प्रथम दृष्‍टया मामला बनता है या नहीं इस निर्णय पर पहुंचने से पहले लोकपाल जनसेवक से स्‍पष्‍टीकरण मांगे और तब तय करे कि सीधी जांच प्रथम दृष्‍टया मामला बनता है या नहीं''।लोकसेवक की बात सुनने का अवसरः  चयन समिति ने सिफारिश की है कि जांच एजेंसी द्वारा प्रारंभिक जांच के दौरान लोकसेवक की टिप्पणी अनिवार्य  नहीं हो (धारा 20(2)। समिति ने यह भी सिफारिश की है कि जांच का आदेश देने से पहले लोकपाल द्वारा सुनवाई का अवसर समाप्त किया जा सकता है (धारा 20(3)) लोकसेवक और सरकार सक्षम अधिकारी को प्रारंभिक जांच स्तर और जांच का औपचारिक आदेश देने से बहुत से मामलों में संदेह समाप्त हो जाएगा और नियमित जांच के लिए मामलों की संख्या बहुत कम हो जाएगी। सरकार ने चयन समिति की इस सिफारिश को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है और वह इसके लिए संशोधन पेश करेगी।
Ø लोकसेवकों पर मुकदमा चलाने के लिए आदेश देने की शक्तिः
Ø समिति ने यह सुझाव दिया है कि लोकसेवकों पर मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी देने की शक्ति सरकार से हटाकर लोकपाल को दी जा सकती है। समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि इस प्रकार का निर्णय लेते समय लोकपाल के लिए सक्षम अधिकारी और लोकसेवक की टिप्पणियां प्राप्त करना जरूरी हो सकता है। सरकार ने समिति के इस सुझाव को स्वीकार करने का निर्णय लिया है।
Ø सीबीआई को सशक्त बनानाःसमिति ने सीबीआई को सशक्त बनाने के लिए विधेयक में कई संशोधन करने के लिए सुझाव दिये हैः-
Ø1.     सीबीआई निदेशक के नियंत्रणाधीन एक अभियोजन निदेशक की अध्यक्षता में एक अभियोजन निदेशालय की स्थापना करना।
2.         केन्द्रीय सतर्कता आयोग के सुझाव पर अभियोजन निदेशक की नियुक्ति करना।
3.         लोकपाल द्वारा भेजे गये मामले की देख-रेख के लिए लोकपाल की सहमति के साथ सरकारी अधिवक्ताओं को छोड़कर सीबीआई द्वारा अधिवक्ताओं का एक पैनल बनाना।
4.     लोकपाल द्वारा बताये गये मामले की जांच के लिए सीबीआई के पास पर्याप्त धन होने का प्रावधान।
5.     लोकपाल की स्वीकृति के साथ लोकपाल द्वारा भेजे गये मामले की जांच करने वाले सीबीआई अधिकारियों का स्थानांतरण करना।

     सरकार ने अंतिम एक सुझाव को छोड़कर इन सभी सुझावों को मानने का निर्णय लिया है, जोकि लोकपाल द्वारा भेजे गये मामले की जांच करने वाले सीबीआई अधिकारियों के स्थानांतरण के लिए लोकपाल की मंजूरी से संबंधित हैं। इस प्रस्ताव को इसलिए नहीं माना जा सकता कि इससे सीबीआई के क्रियाकलाप पर प्रभाव पड़ेगा।

विधेयक की अन्य प्रमुख विशेषताएं
Ø      सीबीआई पर पर्यवेक्षण की शक्तियां- यह विधेयक लोकपाल को दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (सीबीआई) पर जांच के लिए लोकपाल द्वारा सौंपे गये मामले के संदर्भ में अधीक्षण की शक्तियां प्रदान करता है।
Ø      सीबीआई निदेशक की नियुक्तिः  प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति सीबीआई निदेशक के चयन के बारे में                                                                                                                                                                                                         संस्तुति करेगी।
Ø      अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति को जब्त करनाः अभियोजन लंबित रहने की स्थिति मे भी भ्रष्टाचार द्वारा अर्जित संपत्ति को जब्त करने के प्रावधान विधेयक में शामिल हैं।
Ø      भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के अधीन दंड़ को बढ़ानाः इस विधेयक में भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के अधीन दंड़ को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया हैः-
Øए)    सात वर्ष से लेकर दस वर्ष तक अधिकतम दंड
Øबी)   छः माह से लेकर दो वर्षों तक न्यूनतम दंड                    (PIB)

वि.कासोटिया/सुधीर/राजेन्द्र/मीना/सुनील/निर्मल-420

Thursday, January 24, 2013

मौसम की भविष्‍यवाणी

23-जनवरी-2013 17:21 IST
पृथ्‍वी विज्ञान प्रणाली संगठन के जरिये विशेष मौसम सेवाएं शुरु 
पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय मौसम विभाग ने देशभर में पृथ्‍वी विज्ञान प्रणाली संगठन के जरिये विशेष मौसम सेवाएं शुरु की हैं। इसमें वेब आधारित जानकारी को शामिल किया जाएगा। इस सेवा के अंतर्गत प्रायोगिक तौर पर 117 शहरी केन्‍द्रों को शामिल किया जाएगा जो 3-6 घंटे के रेंज में खराब मौसम (गरज के साथ छींटे, निम्‍न/ दबावों से भारी वर्षा) की जानकारी देंगे। खराब मौसम की शुरुआत के स्‍थान, उसके आगे बढ़ने/खराब मौसम की भविष्‍यवाणी करने के लिए (ऑटोमेटिक वैदर सेक्‍शन- एडब्‍ल्‍यूएस, ऑटोमेटिक रेन गॉजेस-एआरजी, डोपलर वैदर रेडारों-डीडब्‍ल्‍यूआर, ऑटोमेटिक वैदर ऑब्‍ज‍रविंग सिस्‍टम-एडब्‍लयूओ, सेटलाइट व्‍युत्‍पन्‍न वायु वैक्‍टर, तापमान, आर्द्रता फील्‍ड आदि) उपलब्‍ध प्रणालियों का समावेश किया गया है जो 3 घंटे के रेंज में (विषय वस्‍तु और चित्रात्‍मक रुप में) भविष्‍यवाणी कर सकेंगे। 

खराब मौसम का पता लगाने के लिए 14 डीडब्‍ल्‍यूआर वाली 24 घंटे की निगरानी प्रणाली अगरतला, चैन्‍नई, दिल्‍ली-हवाई अड्डा, दिल्‍ली–लोधी रोड, हैदराबाद, जयपुर, कोलकाता, मछलीपत्‍नम, नागपुर, पटना, विशाखापतनम, लखनऊ, परिटयाला और मोहनबाड़ी में काम करने लगी है। मुंबई और भुज में डीडब्‍ल्‍यूआर का स्‍थान ग्रहण परीक्षण चल रहा है जबकि भोपाल में इसे लगाने का कार्य चल रहा है। डीडब्‍ल्‍यूआर लगाने का काम गोआ, पारादीप और करईकल में फिलहाल रोककर रखा गया है। इसे रक्षा मंत्रालय की मंजूरी मिलनी बाकी है। (PIB)

वि कासोटिया/कविता-293

Friday, January 4, 2013

कोलकाता में भारतीय विज्ञान कांग्रेस

04-जनवरी-2013 16:33 IST
डॉ.ए.पी.जे. अब्‍दुल कलाम द्वारा बाल विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन
भारत के पूर्व राष्‍ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्‍दुल कलाम ने आज कोलकाता में बाल विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन किया। इस अवसर पर डॉ. कलाम ने कहा कि भारतीय विज्ञान कांग्रेस महान वैज्ञानिकों एस.एन. बोस, जे.सी. बोस, मेघनाथ साहा, सॅर सी.वी. रमण, श्रीनिवास रामानुजम, होमी भाभा और विक्रम साराभाई तथा अनेक भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धियों पर आधारित है। उन्‍होंने विचार और कार्यों में श्रेष्‍ठता विषय पर विचार व्‍यक्‍त किए। डॉ. कलाम ने इस अवसर पर उपस्थित उभरते हुए युवा वैज्ञानिकों से कहा कि वे विज्ञान को जीवन में विचारों और कार्य की श्रेष्‍ठता के रूप में अपनाएं और उसके लिए अपनी सर्वाधिक क्षमता के साथ काम करें। उन्‍होंने कहा कि मैं दो महान आवश्‍यकताओं के महत्‍व पर ध्‍यान केन्द्रित करना चाहूंगा- विज्ञान का महत्‍व और वैज्ञानिक उदारता। उन्‍होंने ऊर्जा संरक्षण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के‍निर्माण के बारे में भी विचार व्‍यक्‍त किए। 

डॉ. कलाम ने कहा कि इतिहास ने सिद्ध कर दिया है कि जिन्‍होंने असंभव की परिकल्‍पना करने का साहस किया, वे ही सभी मानवीय सीमाओं को भंग कर पाए। मानव प्रयास के प्रत्‍येक क्षेत्र में, चाहे वह विज्ञान हो, औषधि हो, खेल हो, कला हो अथवा प्रौद्योगिकी, जिन्‍होंने असंभव की परिकल्‍पना की और उपलब्धियां प्राप्‍त की, वे ही लोग हमारे इतिहास का अंग बन गए हैं। अपनी परिकल्‍पना की सीमाओं को भंग कर ही वे विश्‍व में परिवर्तन ला पाये हैं।

पूर्व राष्‍ट्रपति ने सन् 2012 में आयोजित राज्‍य बाल विज्ञान कांग्रेस, बाराबंकी में आयोजित उत्‍तर प्रदेश राज्‍य विज्ञान कांग्रेस, कोयम्‍बत्‍तूर, तमिलनाडू में हुए दक्षिणी क्षेत्रीय विज्ञान कांग्रेस, दरभंगा (बिहार) में हुए मेगा विज्ञान मेले और वाराणसी में हुए राष्‍ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में छात्रों के साथ भी विचारों का आदान-प्रदान किया। डॉक्‍टर कलाम ने गॉड पार्टिकल के अविष्‍कार के बारे में सरन प्रयोगशाला में दो दलों की हाल की घटना की भी चर्चा की। गॉड पार्टिकल महान वैज्ञानिक पीटर हिग्‍स के नाम पर हिग्‍स बोसन नामक प्राथमिक अणु के लिए प्रसिद्ध नाम है। उन्‍होंने कहा कि सन् 2011 में इस दिशा में कुछ प्रगति हुई है और संभव है कि अगले कुछ वर्षों में हम गॉड पार्टिकल के बारे में बेहतर तरीके से समझ पाएं। साथ ही, इस रहस्‍य का भी उद्घाटन कर पाएंगे कि कैसे पदार्थ विद्यमान है और कैसे यह ब्रह्मांड अस्तित्‍व में आया। डॉ0 कलाम ने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि आप में से कुछ युवा, भावी वैज्ञानिकों के रूप में अपनी वैज्ञानिक खोज के लिए सैद्धान्तिक भौतिकी जैसे विषयों को अपनाएं और अणु भौतिकी के इस अद्वितीय क्षेत्र में अधिक खोज करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाएं।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा भूमि विज्ञान मंत्री डॉ0 एस. जयपाल रेड्डी ने समारोह की अध्‍यक्षता की। 

इस अवसर पर डॉ0 कलाम से इन्‍फोसिस ट्रेवल पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ता कुछ युवा छात्र भी उपस्थित थे। इनमें मुख्‍य रूप से तुनीर डे, कपिल, फयाम शेख, रीमा कुमार, बबीता, कुसुमित गॉडकर, अनुराधा दासगुप्‍ता, एन्‍जेल दिवेश मिश्रा, बी. मधु और पुलकित गॉडरॉव शामिल हैं।(PIB)

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मीणा/क्‍वात्रा/यशोदा/तारा – 44