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Wednesday, March 18, 2026

बलिदान मेरा पल पल जीवन.........प्राणेन्द्र नाथ मिश्र

Pranendra Nath Misra on Friday 13th March 2026 at 22:35 Regarding Men Community

एक पुरुष हूं मैं........!


ना छंद किसी की कविता का

आनंद नहीं किसी गीत का मैं,

नहीं लचक किसी भी ग़ज़ल का हूं

नहीं सरगम हूं, संगीत का मैं।


पाषाण सदृश, मैं रूपहीन

मरुभूमि कणों सा शुष्क हूं मैं

पुरुषार्थ हूं मैं इस धरती का

वर्णना हीन, एक पुरुष हूं मैं।


स्वर और व्यंजन से सजे हुए

शब्दों में मेरा लालित्य नहीं

मैं प्रभा, रश्मि रचनाओं का

हूं जनक, मगर आदित्य नहीं।


जाने क्यों कवि, कवियत्री की

लेखनी नहीं चलती मुझ पर,

कल्पनातीत चिंता धारा

पुरुषों से विमुख, बहती निर्झर।


मैं पिता,  सृष्टि आधार हूं मैं

बलिदान मेरा पल पल जीवन

हर व्यथा, मृदुल मुख सह जाता

कितना भी करुण हो अंतर्मन!


है नहीं, मायका कोई मेरा 

न ही ऐसा कोई आँगन है 

जिस जगह मैं लौटूँ निःसंकोच 

न ही पीहर का कोई प्रांगण है। 


मन भारी हो तो, कहाँ जाऊँ 

नहीं गोद जहां मैं सिसक सकूँ 

दीवार नहीं ऐसी है कोई 

आँसू को बहाकर लिपट सकूँ 


माना कोई कोख नहीं मेरी 

संवेदना मेरी पर, कम तो नहीं 

पुरुषार्थ कवच से ढकी हुई 

मेरे मन की वेदना शम तो नहीं


मैं पुरुष हूँ रोना है निषिद्ध 

मैं अंतर्मन में रोता हूँ 

मेरे भी आँसू उष्ण, द्रवित 

मैं अंतर्मन को भिगोता हूँ   


संवेदना भरी आकंठ करुण

आंसू रुकते बन वाष्परुद्ध

पथरायी आंख देखती है

भीतर आवेशित हृदय क्षुब्ध।


अंतरज्वाला में धधक धधक

आंसू, वाष्पित कर देता हूँ ,

आवेग की सीमा बंधी हुई

"निष्ठुर" संज्ञा, सह लेता हूँ 


मन की अनुभूति न कह पाया

अपना ही कष्ट न रोया कभी

जब हृदय विदीर्ण हुआ खंडित

तब कई रात, नहीं सोया कभी।


मन का आवेग मचलता है

वेदना मेरी पर, निर्जन है

करता हूं समय का आलिंगन

मेरे मन में तन, तन में मन है।


कभी हृदयग्रंथ जब पढ़ता हूं

अध्याय विषम मिलते है कई

मैं पुरुष, सांत्वना मिलती फिर

आरंभ नया दिन, रात नई।

             ,,,,प्राणेन्द्र नाथ मिश्र

Friday, January 4, 2013

कोलकाता में भारतीय विज्ञान कांग्रेस

04-जनवरी-2013 16:33 IST
डॉ.ए.पी.जे. अब्‍दुल कलाम द्वारा बाल विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन
भारत के पूर्व राष्‍ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्‍दुल कलाम ने आज कोलकाता में बाल विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन किया। इस अवसर पर डॉ. कलाम ने कहा कि भारतीय विज्ञान कांग्रेस महान वैज्ञानिकों एस.एन. बोस, जे.सी. बोस, मेघनाथ साहा, सॅर सी.वी. रमण, श्रीनिवास रामानुजम, होमी भाभा और विक्रम साराभाई तथा अनेक भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धियों पर आधारित है। उन्‍होंने विचार और कार्यों में श्रेष्‍ठता विषय पर विचार व्‍यक्‍त किए। डॉ. कलाम ने इस अवसर पर उपस्थित उभरते हुए युवा वैज्ञानिकों से कहा कि वे विज्ञान को जीवन में विचारों और कार्य की श्रेष्‍ठता के रूप में अपनाएं और उसके लिए अपनी सर्वाधिक क्षमता के साथ काम करें। उन्‍होंने कहा कि मैं दो महान आवश्‍यकताओं के महत्‍व पर ध्‍यान केन्द्रित करना चाहूंगा- विज्ञान का महत्‍व और वैज्ञानिक उदारता। उन्‍होंने ऊर्जा संरक्षण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के‍निर्माण के बारे में भी विचार व्‍यक्‍त किए। 

डॉ. कलाम ने कहा कि इतिहास ने सिद्ध कर दिया है कि जिन्‍होंने असंभव की परिकल्‍पना करने का साहस किया, वे ही सभी मानवीय सीमाओं को भंग कर पाए। मानव प्रयास के प्रत्‍येक क्षेत्र में, चाहे वह विज्ञान हो, औषधि हो, खेल हो, कला हो अथवा प्रौद्योगिकी, जिन्‍होंने असंभव की परिकल्‍पना की और उपलब्धियां प्राप्‍त की, वे ही लोग हमारे इतिहास का अंग बन गए हैं। अपनी परिकल्‍पना की सीमाओं को भंग कर ही वे विश्‍व में परिवर्तन ला पाये हैं।

पूर्व राष्‍ट्रपति ने सन् 2012 में आयोजित राज्‍य बाल विज्ञान कांग्रेस, बाराबंकी में आयोजित उत्‍तर प्रदेश राज्‍य विज्ञान कांग्रेस, कोयम्‍बत्‍तूर, तमिलनाडू में हुए दक्षिणी क्षेत्रीय विज्ञान कांग्रेस, दरभंगा (बिहार) में हुए मेगा विज्ञान मेले और वाराणसी में हुए राष्‍ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में छात्रों के साथ भी विचारों का आदान-प्रदान किया। डॉक्‍टर कलाम ने गॉड पार्टिकल के अविष्‍कार के बारे में सरन प्रयोगशाला में दो दलों की हाल की घटना की भी चर्चा की। गॉड पार्टिकल महान वैज्ञानिक पीटर हिग्‍स के नाम पर हिग्‍स बोसन नामक प्राथमिक अणु के लिए प्रसिद्ध नाम है। उन्‍होंने कहा कि सन् 2011 में इस दिशा में कुछ प्रगति हुई है और संभव है कि अगले कुछ वर्षों में हम गॉड पार्टिकल के बारे में बेहतर तरीके से समझ पाएं। साथ ही, इस रहस्‍य का भी उद्घाटन कर पाएंगे कि कैसे पदार्थ विद्यमान है और कैसे यह ब्रह्मांड अस्तित्‍व में आया। डॉ0 कलाम ने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि आप में से कुछ युवा, भावी वैज्ञानिकों के रूप में अपनी वैज्ञानिक खोज के लिए सैद्धान्तिक भौतिकी जैसे विषयों को अपनाएं और अणु भौतिकी के इस अद्वितीय क्षेत्र में अधिक खोज करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाएं।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा भूमि विज्ञान मंत्री डॉ0 एस. जयपाल रेड्डी ने समारोह की अध्‍यक्षता की। 

इस अवसर पर डॉ0 कलाम से इन्‍फोसिस ट्रेवल पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ता कुछ युवा छात्र भी उपस्थित थे। इनमें मुख्‍य रूप से तुनीर डे, कपिल, फयाम शेख, रीमा कुमार, बबीता, कुसुमित गॉडकर, अनुराधा दासगुप्‍ता, एन्‍जेल दिवेश मिश्रा, बी. मधु और पुलकित गॉडरॉव शामिल हैं।(PIB)

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मीणा/क्‍वात्रा/यशोदा/तारा – 44