Sunday, February 10, 2013

धरती पर आ रहा है शीत-युग

9.02.2013, 18:45
निकट भविष्य में ही पृथ्वी पर शीत-युग
© Flickr.com/woodleywonderworks/cc-by
दो रूसी वैज्ञानिकों ने वैश्विक उष्मीकरण के विचार का खंडन किया है और कहा है कि इसके विपरीत निकट भविष्य में ही पृथ्वी पर शीत-युग आरंभ होने जा रहा है| गैस उद्योग अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक व्लादीमिर बश्किन और राऊफ गलिऊलिन ने अपने लेख में कहा है कि पश्चिमी देशों में ही वैश्विक उष्मीकरण का शोर मचाया जा रहा है, जिसका असली कारण लोगों के मन में यह बात बिठाना है कि परम्परागत ईंधन स्रोतों – तेल, कोयले और गैस – की मांग कम होनी चाहिए, मांग कम तो दाम भी कम| इन विद्वानों के मत में इसके उलट अब सूर्य की सक्रियता में भरी गिरावट आ रही है, जिसकी वजह से वैश्विक शीत-युग आरंभ हो रहा है| उनका कहना है कि 2014 में ही औसत तापमान गिराने लगेगा और इस सदी के मध्य तक वह न्यूनतम तक पहुँच जाएगा|(रेडियो रूस से साभार)

Thursday, February 7, 2013

संसद:बजट सत्र -2013 की शुरुआत 21 फरवरी से

07-फरवरी-2013 12:37 IST
पंद्रहवीं लोकसभा के तेरहवें सत्र और राज्य सभा के 228वें सत्र की शुरुआत और अवधि 
                                                                                                                         Courtesy Photo
संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत 21 फरवरी 2013, गुरुवार से होगी और 10 मई 2013, शुक्रवार को इस सत्र के समापन की संभावना है। 

पंद्रहवीं लोक सभा के 13वें सत्र और राज्य सभा के 228वें सत्र की शुरुआत 21 फरवरी 2013, गुरुवार से होगी और सरकारी कामकाज की अनिवार्यताओं के अध्याधीन 10 मई 2013, शुक्रवार को इस सत्र के समापन की संभावना है। 

राष्ट्रपति 21 फरवरी 2013, गुरुवार को संसद के दोनों सदनों को संयुक्त रुप से नई दिल्ली स्थित संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में सुबह 11 बजे संबोधित करेंगे। 

मंत्रालयों/विभागों के अनुदान की मांगों पर स्थायी समिति द्वारा विचार और रिपोर्ट तैयार करने के लिए 22 मार्च 2013 को दोनों सदनों को अवकाश के लिए स्थगित किया जाएगा और 22 अप्रैल 2013 को सदन का सत्र पुनः आरंभ होगा। (PIB)

वि.कासोटिया/सुधीर पी. /विजयलक्ष्मी – 469

संसद के बजट सत्र 

संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत

संसद:बजट सत्र -2013 की शुरुआत 21 फरवरी से 

Wednesday, February 6, 2013

दो चरणों में बिछेगा नक्सल क्षेत्रों में सडकों का जाल


05-फरवरी-2013 20:24 IST
केंद्र सरकार ने दी चौमुखी सडक सम्पर्क को मंजूरी
सरकार ने नक्‍सल प्रभावित जिलों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधीन चौमुखी संपर्क कायम करने को अपनी मंजूरी दे दी है। केन्‍द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराम नरेश ने आज यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि राज्‍यों की सरकारें दो चरणों में विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर सकती हैं। राज्‍य सरकारें ढांचे का निर्माण, ग्रेवल बेस आदि का निर्माण पहले चरण के अधीन कर सकती हैं, जबकि दूसरे चरण में बिटुमिनस अथवा कंक्रीट की सतह तैयार करना शामिल है। उन्‍होंने कहा कि राज्‍यों को पहले चरण का कार्य पूरा करने की अनुमति दी जाएगी और कानून व्‍यवस्‍था को ध्‍यान में रखते हुए मार्च 2015 से पहले दूसरे चरण के लिए विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट भेजने के लिए कहा जाएगा। 

नक्‍सल प्रभावित 82 जिले के 52,000 आवास स्‍थलों में से 30,000 आवास स्‍थलों को इसमें शामिल किया गया है, किंतु अब तक केवल 19,000 आवास स्‍थलों को ही सड़कों से जोड़ा गया है।(PIB)

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वि.कासोटिया/सुधीर/मनोज-450

नक्सलबाड़ी स्क्रीन में भी देखिये 
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधीन

कामरेड स्क्रीन में देखिये:नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सडकों का जाल 

उर्दू रोजगार समाचार का इलेक्‍ट्रॉनि‍क संस्‍करण भी शुरू

05-फरवरी-2013 20:12 IST
मंत्री मनीष ति‍वारी ने कि‍या रोजगार समाचार के नए लोगो का अनावरण 
लोगो की तुरंत पहचान
जनहित के सरकारी मीडिया को और सशक्त व प्रभावी बनाने का प्रयास ही लगता है रोज़गार समाचार का नया लोगो। इस नए लोगो का अनावरण बहुत ही  गर्मजोशी से हुआ। इस  अवसर की तस्वीर में आप आप देख सकते हैं इस नए लोगो को रलीज करते हुए केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी और साथ में हैं पब्लिकेशन डिवीयन की एडीजी  कुमारी इरा जोशी और कुछ अन्य वशिष्ठ लोग।
सूचना और प्रसारण मंत्री श्री मनीष ति‍वारी ने कहा है कि‍‘सभी को समान अवसर’ के उद्देश्‍य के साथ रोजगार समाचार के नए लोगो का अनावरण नौकरी की तलाश में लगे युवाओं की महत्‍वकांक्षाओं को पूरी करने में मदद के प्रति‍संकल्‍प का भाव दर्शाता है। उन्‍होंने कहा कि‍इस नई पहल से प्रकाशन को न केवल नई ब्रांड पहचान मि‍लेगी बल्‍कि‍आकांक्षी युवाओं के लि‍ए आकर्षक भी होगा। प्रकाशन वि‍भाग की इस कोशि‍श की सराहना करते हुए श्री मनीष ति‍वारी ने बताया कि‍ लेंस के जरि‍ए नौकरी की तलाश करते इस लोगो की तुरंत पहचान हो जाएगी। श्री ति‍वारी ने यह बातें आज दि‍ल्‍ली के प्रगति‍मैदान में प्रकाशन वि‍भाग द्वारा आयोजि‍त लोगो के शुभारंभ के मौके पर कही। 

इस मौके पर सूचना और प्रसारण मंत्री ने कहा कि‍ उर्दू भाषा में रोजगार समाचार का इलेक्‍ट्रॉनि‍क संस्‍करण शुरू करना भी एक महत्‍वपूर्ण कदम है जि‍ससे इसकी पहुंच अधि‍क लोगों तक हो सकेगी। उन्‍होंने कहा कि‍ प्रकाशन वि‍भाग की यह पहल भी सराहनीय है जि‍समें तकनीक की मदद से रोजगार समाचार लोगों तक पहुंचाया जाना संभव हुआ। श्री ति‍वारी ने कहा कि‍इस प्रकाशन में वि‍कास, राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय मामलों इत्‍यादि‍जैसे जनहि‍त से जुड़े कुछ मुद्दों आलेख होना चाहि‍ए। उन्‍होंने प्रकाशन वि‍भाग को कहा कि‍भवि‍ष्‍य के इसके संस्‍करण में दो से चार पन्‍नों पर ऐसे आलेख होने चाहि‍ए। 

श्री ति‍वारी से इंडि‍या 2013 और भारत 2013 का एक संदर्भ वार्षिक पुस्‍ति‍का भी जारी की जि‍समें 1997 से अब तक भारत सरकार के वि‍भि‍न्‍न मंत्रालयों और वि‍भागों की गति‍वि‍धि‍यों, वि‍कास और उपलब्‍धि‍यों पर सूचनाओं का सटीक और वि‍स्‍तृत संग्रह है। 

रोजगार समाचार का यह लोगो नई दि‍ल्‍ली में कॉलेज ऑफ आर्टस की घरेलू प्रति‍योगि‍ता से चुना गया। लोगो में लेंस के सहारे नौकरी तलाशते युवा को दि‍खाया गया है। 

देशभर में प्रति‍सप्‍ताह चार लाख प्रति‍यों के प्रसार के साथ रोजगार समाचार केंद्र और राज्‍य सरकारों के वि‍भि‍न्‍न संगठनों में रोजगार के अवसरों के बारे में आकांक्षी युवाओं को जानकारी मुहैया करता है। यह एक साथ तीन भाषाओं हि‍न्‍दी, अंग्रेजी और उर्दू में प्रकाशि‍त होता है। उूर्द भाषा जानने वालों के लि‍ए तकनीकी सुवि‍धा का लाभ देते हुए उर्दू रोजगार समाचार का इलेक्‍ट्रॉनि‍क संस्‍करण भी शुरू कर दि‍या गया है। अगस्‍त 2012 से अंग्रेजी और हि‍न्‍दी में भी रोजगार समाचार के इलेक्‍ट्रॉनि‍क संस्‍करण शुरू हैं। (PIB)

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वि‍.कसौटि‍या/अनि‍ल/राजीव/449

Monday, February 4, 2013

महाकाल को मानव कैसे जीतेगा?

10.11.2012, 17:47 
सूरज बूढ़ा और पुराना हो जाएगा और वह सड़ने लगेगा 
बाद में मानव को मंगल ग्रह से भी दर-बदर होना पड़ेगा
                                                                                                                        © www.nasa.gov        (Courtesy:Voice of Russia)
क़रीब 2 अरब 80 करोड़ साल बाद सूरज बूढ़ा और पुराना हो जाएगा और वह सड़ने लगेगा यानी वह फूलना शुरू हो जाएगा और एक विशाल लाल आग के गोले में बदल जाएगा। सूरज में होने वाले इन बदलावों का पृथ्वी पर भी बहुत बुरा असर पड़ेगा । ज़मीन पर गर्मी इस बुरी तरह से बढ़ जाएगी कि जीवन पूरी तरह से ख़त्म हो जाएगा। एक भी जीव-जन्तु इस धरती पर बाक़ी नहीं रहेगा। वैसे तो एक अरब 80 करोड़ साल बाद ही पृथ्वी पर रहने वाले जीव-जन्तु और मनुष्य ख़त्म हो जाएँगे, लेकिन पानी में रहने वाले तरह-तरह के जीवाणु और कीटाणु तथा ज़मीन के भीतर गहराई में रहने वाले जीव फिर भी बचे रह जाएँगे।

यह भविष्यवाणी उन ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने की है, जो पृथ्वी पर रहने वाले जीवों के लुप्त होने की प्रक्रिया का क्रमबद्ध ढंग से अध्ययन कर रहे हैं। ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने न सिर्फ़ सूर्य की गरमी बढ़ने से पृथ्वी पर होने वाले बदलावों का अध्ययन किया है, बल्कि उन्होंने यह भी देखा है कि यदि अंतरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा में कोई बदलाव होता है तो उसका पृथ्वी के जीवों पर क्या असर पड़ेगा।

नक्षत्रशास्त्री यह जानते हैं कि सूरज की तरह के सितारे आख़िर में विशालकाय लाल गोलों में बदल जाते हैं और उनमें होने वाला बदलाव हमेशा इसी ढंग से होता है। जब हमारा सूरज आग के लाल विशालकाय गोले में बदलेगा तो उसका आकार बीसियों गुना बढ़ जाएगा और उसकी धूप की झलक भी पीली नहीं बल्कि लाल दिखाई देगी। सूरज जब फूलकर बुध और शुक्र ग्रहों को निगलकर पृथ्वी के महासागरों का पानी सुखा देगा, उससे बहुत पहले ही पृथ्वी पर परिस्थितियाँ जीवन के लायक नहीं रह जाएँगी। मास्को विश्वविद्यालय की एक जीव-वैज्ञानिक येलेना वराब्योवा भी इस बात से सहमत हैं कि जीवाणु और कीटाणु ही हमारी पृथ्वी के अन्तिम वासी होंगे क्योंकि वे ही सबसे पहले पृथ्वी पर अवतरित भी हुए थे। सबसे पहले धरती पर उन्हीं का जन्म हुआ था। येलेना वराब्योवा ने कहा :

आज भी इस तरह के जीवाणुओं और कीटाणुओं की कमी नहीं है, जो गर्म पानी के जलाशयों और ख़ूब नमकीन पानी में रहते हैं। वैसे भी जीवाणु ऐसे जीव होते हैं, जो मानव के मुक़ाबले कठिन से कठिन जीवन-परिस्थितियों को भी झेलकर अपने अस्तित्त्व को सुरक्षित रखते हैं। हम आज यह कल्पना कर सकते हैं कि जब पृथ्वी पर जीवाणुओं के रूप में जीवन की शुरूआत हुई थी तो कैसी परिस्थितियाँ रही होंगी। तब न तो पेड़-पौधे ही थे और न ही दूसरी तरह की वनस्पतियाँ या जीव-जन्तु। इन जीवाणुओं से ही पृथ्वी पर जीवन की रचना हुई। इन जीवाणुओं के क्रमिक विकास से ही बाद में वनस्पतियों, जीव-जन्तुओं और मानव-जीवन का विकास हुआ।

तो जीवाणु ही पृथ्वी पर लम्बे समय तक जिएँगे। लेकिन मानवजाति क्या करे? वह कहाँ जाए? जीव-वैज्ञानिक येलेना वराब्योवा ने कहा -- मंगल-ग्रह पर जाकर रहा जा सकता है... :

मंगल-ग्रह पर उसके ध्रुवीय क्षेत्र में ठोस बर्फ़ के रूप में पानी जमा है। गरमी बढ़ने पर यह पानी तरल रूप ग्रहण कर लेगा और नदियों के रूप में बहने लगेगा, तब मंगल पर भी जीवन फूट पड़ेगा। शायद मंगल ही वह जगह है, जहाँ जाकर, पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा होने पर मानवजाति अपना जीवन बचा सकती है।

लेकिन बाद में मानव को मंगल ग्रह से भी दर-बदर होना पड़ेगा यानी कहीं और जाना होगा। तब तक शायद मानवजाति को अन्तरिक्ष में उपस्थित दूसरे नक्षत्र-मंडलों की भी विस्तृत जानकारी हो जाएगी। कहीं न कहीं तो ऐसी परिस्थितियाँ होंगी ही, जहाँ जाकर आदमी रह सकेगा। बहुत से रूसी वैज्ञानिक भी अपने ब्रिटिश सहयोगियों की बातों से सहमत हैं। हाँ, वे उनके द्वारा बताई गई अवधि को कुछ संदेह की निगाह से देखते हैं। इसका कारण यह है कि पृथ्वी जिन प्रक्रियाओं से गुज़रेगी, उन पर न सिर्फ़ सूरज पर बढ़ने वाली गर्मी का असर पड़ेगा या पृथ्वी की कक्षा में होने वाले बदलावों का असर पड़ेगा, बल्कि सवाल यह भी है कि पृथ्वी की जलवायु और जीवमण्डल में उन प्रक्रियाओं की वज़ह से क्या बदलाव आएँगे। अभी से इसकी भविष्यवाणी करना बेहद कठिन है। हमारा विज्ञान आज, अभी तक इतना ज़्यादा विकसित नहीं हुआ है कि वह जीव-मंडल में आने वाले बदलावों में लगने वाले समय की भविष्यवाणी कर सके। वैसे भी बात सदियों-सहस्त्राब्दियों की नहीं, करोड़ों-अरबों वर्षों की हो रही है। (रेडियो रूस से साभार)


Sunday, February 3, 2013

भारतीय तटरक्षक ने समुद्री सुरक्षा पर ध्‍यान केंद्रित किया

01-फरवरी-2013 15:23 IST
दो फ्रिगेट 5 नावों की मामूली सूची से शुरूआत        रक्षा पर विशेष लेख  
आज इस सेवा बल के पास 77 पोत और 56 विमान *हामिद हुसैन
    भारतीय तटरक्षक 01 फरवरी, 2013 को अपनी 36वीं वर्षगांठ मना रहा है। अपनी स्‍थापना के बाद से यह सेवा एक बहुआयामी और एक उत्‍साहपूर्ण बल के रूप में यह उभरी है जो बहु-भूमिका वाले पोतों और विमानों की तैनाती कर हर समय भारत के समुद्री क्षेत्रों की चौकसी करता है।
    भारतीय नौ-सेना के दो फ्रिगेट और सीमा शुल्‍क विभाग के 5 नावों की मामूली सूची से शुरूआत कर आज इस सेवा बल के पास 77 पोत और 56 विमान हैं। गत वर्ष के दौरान एक प्रदूषण नियंत्रण पोत, 6 गश्ती पोत, 4 वायु कुशन पोत, 2 इंटरसेप्‍टर नौकाएं शामिल की गई हैं। इसके अतिरिक्‍त क्षेत्रीय मुख्‍यालय (एनई) की स्‍थापना तथा 8 सीजी स्‍टेशन का सक्रियण, सक्रियण/3 सीजी स्‍टेशनों की शुरूआत की योजना 2013 के प्रारंभ में की गई है।
    भारतीय तटरक्षक आज तीव्र विस्‍तार की राह पर है। इसमें आधुनिक स्‍तर के पोत, नौकाएं और विमान का निर्माण विभिन्‍न शिपयार्ड/ सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम में किया जा रहा है और भविष्‍य में तटरक्षक अकादमी की स्‍थापना की जाएगी। तटरक्षक के संगठनात्‍मक ढाँचे में 5 क्षेत्रीय मुख्‍यालय, 12 जिला मुख्‍यालय, 42 स्‍टेशन तथा सभी भारतीय तटों पर 15 एयर यूनिट कार्य कर रहे हैं।
    श्रम शक्ति की दृष्टि से इस सेवा ने सामान्‍य ड्यूटी में महिला अधिकारियों के लिए अल्‍प सेवा नियुक्ति की शुरूआत, मेधावी अधीनस्थ अधिकारियों को विभागीय पदोन्‍नति और विशेष नियुक्ति अभियान चलाकर अपने श्रम शक्ति में विस्‍तार किया है।
    बृहत विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और तट रक्षा पर सतत निगरानी के लिए औसतन 20 पोत और 8-10 विमान तैनात किए गए है। भारतीय तटरक्षक ने तटीय निगरानी नेटवर्क (सीएसएन) की भी स्‍थापना की है जिसमें तटीय निगरानी रडार नेटवर्क और 46 सुदूर स्‍थलों पर इलेक्‍ट्रो ऑप्‍टीक सेंसर शामिल है। इन सेंसरों में 36 मुख्‍य क्षेत्र में, 6 लक्ष्‍यद्वीप समूह और 4 अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में लगाएं गए हैं।
    भारतीय तटरक्षक द्वारा तट के आस-पास के गाँवों में नियमित समुदाय संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य मछली पकड़ने वाले समुदायों को मौजूदा सुरक्षा स्थितियों के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ खुफिया जानकारी जुटाने के लिए उन्‍हें सतर्क रखना है। इसके अतिरिक्‍त गत वर्षों के दौरान भारतीय तट रक्षक ने 20 तटीय सुरक्षा अभ्‍यास और 21 तटीय सुरक्षा अभियान चलाया है।
    भारतीय तटरक्षक द्वारा हर समय भारतीय खोज और बचाव क्षेत्रों में समुद्री जांच और बचाव किया जाता है। इस कठिन परिस्थिति में साहस दिखाते हुए पिछले वर्ष तटरक्षरक ने 204 लोगों की जान बचाई है। इस अवधि के दौरान भारतीय तटरक्षक द्वारा कुल 30 चिकित्‍सा बचाव किए गए।
    भारतीय तटरक्षक ने अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी अपनी पहचान स्‍थापित की है। सहयोग समझौता/ ज्ञापन के तहत संस्‍थागत यात्राएं नियमित की जाती हैं। 12वीं भारत-जापान तटरक्षक उच्‍च स्‍तरीय बैठक जापान के टोक्‍यो में जनवरी, 2013 में की गई। अक्‍तूबर, 2012 में नई दिल्‍ली में 8वां एशियाई तटरक्षक प्रमुखों का सम्‍मेलन आयोजित किया गया। यह सम्‍मेलन काफी महत्‍वपूर्ण था क्‍योंकि इसे पहली बार भारत में आयोजित किया गया। इसके अतिरिक्‍त, भारत-पाकिस्‍तान संयुक्‍त कार्य समूह बैठक का आयोजन पहली बार नई दिल्‍ली में जुलाई, 2012 में किया गया।
    भारतीय तटरक्षक लगातार अपना विस्‍तार कर रहा है और जिससे इसकी क्षमता में और विकास हो रहा है। सक्षम और पेशेवर अधिकारियों द्वारा आधुनिक पोतों और विमानों का संचालन किया जा रहा है जो देश सेवा और समुद्री सुरक्षा में कार्य कर अपने को गौरवान्वित महसूस करते है। वर्ष 2013 के लिए भारतीय तटरक्षक का शीर्षक है 'समुद्री सुरक्षा पर केंद्रित लक्ष्‍य'। यह शीर्षक इस सेवा की प्रतिबद्धता और संकल्‍प को प्रदर्शित करता है जो इसके आदर्श वाक्‍य 'वयम् रक्षाम:' में प्रतिबिम्‍बित है जिसका अर्थ है 'हम रक्षा करते है'। (PIB) (पसूका) 
*एपीआरओ (रक्षा) भारतीय तटरक्षक ने समुद्री सुरक्षा पर ध्‍यान केंद्रित किया 
मीणा/आनंद/लक्ष्‍मी - 33
पूरी सूची - 01.02.2013

Friday, February 1, 2013

लोकपाल विधेयक 2011 में सरकारी संशोधन

01-फरवरी-2013 20:10 IST
प्राथमिक जांच का आदेश दिए बिना सीधे जांच करने का अधिकार
लोकपाल के चयन का कॉलि‍जियम: विधेयक में लोकपाल के सदस्‍यों का चयन प्रधानमंत्री, अध्‍यक्ष (लोकसभा), नेता विपक्ष (राज्‍यसभा), भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीशों या मुख्‍य न्‍यायाधीश द्वारा मनोनीत सुप्रीम कोर्ट के न्‍यायाधीश और राष्‍ट्रपति द्वारा नामित जाने-माने न्‍यायविद की चयन समिति द्वारा किए जाने का प्रावधान है। प्रवर समिति ने सिफारिश की है कि चयन समिति का पांचवां सदस्‍य (जाने-माने न्‍यायविद) चयन समिति के चार सदस्‍यों की सिफारिश पर राष्‍ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाए। सरकार के इस सिफारिश को स्‍वीकार कर लिया है। सार्वजनिक एवं दान प्राप्‍त करनेवाली संस्‍थाओं पर अधिकार क्षेत्र प्रवर समिति ने जनता द्वारा दान प्राप्‍त करने वाली संस्‍थाओं और संस्‍थानों को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है। सरकार ने सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत ऐसी संस्‍थानों या प्राधिकारियों को छूट देने का निश्‍चय किया है जिनका गठन या नियुक्ति किसी केन्‍द्रीय पर राज्‍य या प्रांतीय अधिनियम के तहत सार्वजनिक धार्मिक या धर्मादि ट्रस्‍टों या इंडोमेंट्स या धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों में किया गया हो। सार्वजनिक रूप से दान प्राप्‍त करनेवाली अन्‍य गैरसरकारी संस्‍थाएं लोकपाल के दायरे में रहेंगी।सीधे तौर पर जांच करने का अधिकार: प्रवर समिति ने सिफारिश की है कि लोकपाल को प्राथमिक जांच का आदेश दिए बिना सीधे जांच करने का अधिकार दिया जाए बशर्ते कि लोकपाल को लगे कि प्रथम दृष्‍टया मामला बनता है। सरकार ने इस संशोधन के साथ यह भी सिफारिश स्‍वीकार कर ली है कि प्रथम दृष्‍टया मामला बनता है या नहीं इस निर्णय पर पहुंचने से पहले लोकपाल जनसेवक से स्‍पष्‍टीकरण मांगे और तब तय करे कि सीधी जांच प्रथम दृष्‍टया मामला बनता है या नहीं''।लोकसेवक की बात सुनने का अवसरः  चयन समिति ने सिफारिश की है कि जांच एजेंसी द्वारा प्रारंभिक जांच के दौरान लोकसेवक की टिप्पणी अनिवार्य  नहीं हो (धारा 20(2)। समिति ने यह भी सिफारिश की है कि जांच का आदेश देने से पहले लोकपाल द्वारा सुनवाई का अवसर समाप्त किया जा सकता है (धारा 20(3)) लोकसेवक और सरकार सक्षम अधिकारी को प्रारंभिक जांच स्तर और जांच का औपचारिक आदेश देने से बहुत से मामलों में संदेह समाप्त हो जाएगा और नियमित जांच के लिए मामलों की संख्या बहुत कम हो जाएगी। सरकार ने चयन समिति की इस सिफारिश को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है और वह इसके लिए संशोधन पेश करेगी।
Ø लोकसेवकों पर मुकदमा चलाने के लिए आदेश देने की शक्तिः
Ø समिति ने यह सुझाव दिया है कि लोकसेवकों पर मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी देने की शक्ति सरकार से हटाकर लोकपाल को दी जा सकती है। समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि इस प्रकार का निर्णय लेते समय लोकपाल के लिए सक्षम अधिकारी और लोकसेवक की टिप्पणियां प्राप्त करना जरूरी हो सकता है। सरकार ने समिति के इस सुझाव को स्वीकार करने का निर्णय लिया है।
Ø सीबीआई को सशक्त बनानाःसमिति ने सीबीआई को सशक्त बनाने के लिए विधेयक में कई संशोधन करने के लिए सुझाव दिये हैः-
Ø1.     सीबीआई निदेशक के नियंत्रणाधीन एक अभियोजन निदेशक की अध्यक्षता में एक अभियोजन निदेशालय की स्थापना करना।
2.         केन्द्रीय सतर्कता आयोग के सुझाव पर अभियोजन निदेशक की नियुक्ति करना।
3.         लोकपाल द्वारा भेजे गये मामले की देख-रेख के लिए लोकपाल की सहमति के साथ सरकारी अधिवक्ताओं को छोड़कर सीबीआई द्वारा अधिवक्ताओं का एक पैनल बनाना।
4.     लोकपाल द्वारा बताये गये मामले की जांच के लिए सीबीआई के पास पर्याप्त धन होने का प्रावधान।
5.     लोकपाल की स्वीकृति के साथ लोकपाल द्वारा भेजे गये मामले की जांच करने वाले सीबीआई अधिकारियों का स्थानांतरण करना।

     सरकार ने अंतिम एक सुझाव को छोड़कर इन सभी सुझावों को मानने का निर्णय लिया है, जोकि लोकपाल द्वारा भेजे गये मामले की जांच करने वाले सीबीआई अधिकारियों के स्थानांतरण के लिए लोकपाल की मंजूरी से संबंधित हैं। इस प्रस्ताव को इसलिए नहीं माना जा सकता कि इससे सीबीआई के क्रियाकलाप पर प्रभाव पड़ेगा।

विधेयक की अन्य प्रमुख विशेषताएं
Ø      सीबीआई पर पर्यवेक्षण की शक्तियां- यह विधेयक लोकपाल को दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (सीबीआई) पर जांच के लिए लोकपाल द्वारा सौंपे गये मामले के संदर्भ में अधीक्षण की शक्तियां प्रदान करता है।
Ø      सीबीआई निदेशक की नियुक्तिः  प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति सीबीआई निदेशक के चयन के बारे में                                                                                                                                                                                                         संस्तुति करेगी।
Ø      अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति को जब्त करनाः अभियोजन लंबित रहने की स्थिति मे भी भ्रष्टाचार द्वारा अर्जित संपत्ति को जब्त करने के प्रावधान विधेयक में शामिल हैं।
Ø      भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के अधीन दंड़ को बढ़ानाः इस विधेयक में भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के अधीन दंड़ को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया हैः-
Øए)    सात वर्ष से लेकर दस वर्ष तक अधिकतम दंड
Øबी)   छः माह से लेकर दो वर्षों तक न्यूनतम दंड                    (PIB)

वि.कासोटिया/सुधीर/राजेन्द्र/मीना/सुनील/निर्मल-420