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Friday, January 16, 2026

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला-2026 में फेस-टू-फेस और कहानी पठन

 संस्‍कृति मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 16th January 2026 at 1:13PM by PIB Delhi Details:हिंदी स्क्रीन 

साहित्य अकादमी के कार्यक्रमों ने किया साहित्य प्रेमियों को आकर्षित 


नई दिल्ली
: 16 जनवरी 2026: (पी आई बी//हिंदी स्क्रीन डेस्क)::

इस बार भी नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला  बहुत यादगारी बन रहा है।  बहुत से स्टाल लगे हैं। बहुत सी किताबें हैं। लाखों की संख्या में इन किताबों के चाहने वाले हैं। नया साहित्य एक बार फिर एक ही मंच पर बहुत निखार कर सामने आया है। साहित्य अकादमी ने 15 जनवरी 2026 को नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के दौरान हॉल नंबर 2, भारत मंडपम, नई दिल्ली में भारत की बौद्धिक परंपराओं पर एक फेस-टू-फेस कार्यक्रम और एक पैनल चर्चा का आयोजन किया। 

इस बहुत से आकर्षण रहे। इनमें एक है फेस टू फेस का आयोजन। फेस-टू-फेस कार्यक्रम में प्रख्यात मलयालम लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता श्री केपी रामानुन्नी ने भाग लिया और अपने साहित्यिक जीवन और कार्यों से जुड़े अनुभव साझा किए। 

उन्होंने बताया कि वे कोझिकोड शहर से हैं, जिसे यूनेस्को द्वारा भारत का पहला और एकमात्र साहित्य नगर घोषित किया गया है[ सत्र के दौरान, उन्होंने अपनी मलयालम लघु कहानी 'एमटीपी' (गर्भाधान की चिकित्सा पद्धति) के कुछ अंश पढ़े, जिसका अंग्रेजी अनुवाद अबू बकर काबा ने किया है। 

नाटक के रूप में लिखी गई और सात भागों में विभाजित यह कहानी, लेखक के अपने जीवन के अनुभवों से प्रेरित होकर, गर्भपात की चिकित्सा प्रक्रिया से जुड़े गहन मानवीय नाटक का चित्रण करती है। अपने साहित्यिक सफर पर विचार करते हुए, श्री रामानुन्नी ने अपने प्रारंभिक वर्षों के बारे में बताया कि किशोरावस्था में वे एक साथ आध्यात्मिक और साम्यवादी साहित्य पढ़ रहे थे, जिससे उन्हें आंतरिक संघर्ष का सामना करना पड़ा और उन्होंने मनोचिकित्सक से परामर्श लिया[ हालांकि यह उपचार निरथर्क साबित हुआ, लेकिन इस अनुभव ने उन्हें लेखन के माध्यम से सुकून और अभिव्यक्ति पाने के लिए प्रेरित किया। 

इस बार फेस-टू-फेस कार्यक्रम के बाद भारत की बौद्धिक परंपराओं पर एक पैनल चर्चा हुई, जिसमें प्रो. रवैल सिंह, प्रो. हरेकृष्ण सतपथी और प्रो. बसवराज कालगुडी ने भाग लिया[ श्री रवैल सिंह ने पंजाब की बौद्धिक विरासत पर चर्चा करते हुए तक्षशिला के प्राचीन शिक्षा केंद्र से लेकर नाथ योगी, सूफीवाद और सिख धर्म तक के इतिहास का वर्णन किया[ प्रो. हरेकृष्ण सतपथी ने प्राचीन और समकालीन शिक्षा प्रणालियों की तुलना करते हुए ब्रह्मा, विष्णु और महेश को आदिगुरु बताया और वेदों का एक श्लोक सुनाया[ प्रो. बसवराज कालगुडी ने परिधीय ज्ञान प्रणालियों पर बात करते हुए, उन्हें मौखिक और लिखित परंपराओं में वर्गीकृत किया और प्राचीन भारत में जनजातीय और कृषि संबंधी ज्ञान परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डाला[

दोनों कार्यक्रमों को दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया, जिनमें विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक और साहित्य प्रेमी शामिल थे, और इनमें सार्थक संवाद और चर्चा देखने को मिली[ साहित्य अकादमी की ओर से सहायक संपादक डॉ. संदीप कौर ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। 

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Friday, January 24, 2025

पुस्तक मेले में भेंट हो सकेगी वाणी प्रकाशन से भी

Vani Prakashan 23rd January 2025 at 5:46 PM World Book Fair Input and Edited by Kartika Kalyani Singh

करीब 85 नयी पुस्तकों के साथ 12,000+ उत्कृष्ट कृतियाँ मिल सकेंगी


मोहाली: 24 जनवरी 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//हिंदी स्क्रीन डेस्क)::

शब्दों में शक्ति होती है। शब्दों से चमत्कार जैसे अनुभव संभव हैं। जब तन मिट जाता है तो उस समय सब कुछ रख होने के बाद भी शब्द ही हमें ज़ाद दिलाते हैं की फलां फलां कलमकार कैसा था और उसने दुनिया बदलने के लिए कितना सोचा और आम लोगों के सामने नई तब्दीलियों का ब्लू प्रिंट रख दिया। ज़ेह रोड मैप की तरह सदियों तक समाज को रह दिखता है। ऐसी शक्तियों वाले शब्दों को सहेजने के लिए लेखक, प्रकाशक और पुस्तक मेले बहुत ही अमूल्य योगदान दे रहे हैं। ऐसा ही एक पुस्तक मेला दिल्ली में भी लग रहा है पहली फरवरी को। 

पिछले कुछ दशकों में पुस्तकों की लोकप्रियता को बरकरार रखने में पुस्तक मेलों का विशेष योगदान रहा है। विभिन्न पुस्तक मेलों ने पुस्तक कल्चर को प्रशंसनीय बढ़ावा दिया है। पुस्तकों को घर घर पहुँचाने में एक क्रान्ति घरेलू लाइब्रेरी योजना भी लेकर आई थी। आजकल के दौर में जब पुस्तकों के अस्तित्व को खतरा सा महसूस  उस समय पुस्तक मेले इस अस्तित्व को मज़बूत करने में जुटे हुए हैं। वाणी प्रकाशन  इस संबंध में बहुत अच्छी खबरें लाए हैं। 

खुशखबरी यह है कि हर वर्ष की तरह इस बार भी वाणी प्रकाशन ग्रुप विश्व पुस्तक मेला 2025 में नयी किताबों के साथ आपका स्वागत करने के लिए तत्पर है। हम, वाणी प्रकाशन (हॉल नम्बर 2-3, स्टॉल नम्बर N-03), यात्रा बुक्स और भारतीय ज्ञानपीठ की पुस्तकों के स्टॉल (हॉल नम्बर 2-3, स्टॉल नम्बर P-05) पर आपसे 1-9 फ़रवरी 2025 तक, सुबह 11 बजे से शाम 8 बजे तक मिलेंगे। आपका साहित्य घर आपकी प्रतीक्षा करेगा। और आप जानते ही हैं कि साहित्य से सबंधित प्रतीक्षा किस्मत वालों के हिस्से में न ही आते है। 

आधुनिक तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाते हुए आज के डिजिटल युग में किताबों के हर रूप — मुद्रित, ई-पुस्तक या ऑडियो बुक—हम हर माध्यम से अपने पाठकों के समीप पहुँचने के लिए उत्सुक हैं।


आगामी पुस्तक मेले में लगभग 85 नयी पुस्तकों के साथ 12,000+ कालजयी साहित्य, जिसमें कविता, कहानी, उपन्यास, शायरी, कथा साहित्य, बाल साहित्य व अनुवाद की उत्कृष्ट कृतियाँ आपकी प्रतीक्षा में रहेंगी।


वाणी प्रकाशन, भारतीय ज्ञानपीठ और यात्रा बुक्स की गौरवमयी परम्परा के अंतर्गत प्रकाशन, साहित्य व लेखकों को समर्पित है। 


इस मेले में साहित्य की नज़दीकियों का आनंद लेने के इच्छुक कलमकारों और  साहित्य स्नेहियों से निवेदन है कि अपनी सम्भावित आगमन तिथि के बारे में वाणी प्रकाशन को अग्रिम तौर पर अवश्य सूचित करें, ताकि इस संबंध में नेशनल बुक ट्रस्ट को सूचना दी जा सके और आपका हार्दिक स्वागत भी प्रेम के साथ किया जा सके। 


यदि आप इस संबंध में अग्रिम सूचना दे सकें साहित्यिक पत्रकारिता से जुड़े लोगों को भी आपसे संपर्क में आसानी रहेगी।