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Monday, September 28, 2020

महिला काव्य मंच मोहाली ने भी कराई ऑनलाइन काव्य गोष्ठी

 शायरी के महिला हस्ताक्षरों ने बिखेरे अपनी कविताओं के रंग 

मोहाली: 28 सितंबर 2020: (अमरजीत कौर हिरदे//हिंदी स्क्रीन)::

बेहद संवेनदशील और जानेमाने पुरुष शायर श्री नरेश नाज़ द्वारा संस्थापित राष्ट्रीय महिला काव्य मंच लगातार सक्रिय है। इस मंच की मोहाली  इकाई की ओर से सितंबर 2020 माह की मासिक कवयित्री गोष्ठी का आयोजन ऑनलाइन गूगल मीट एप पर किया गया। 

इस काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता मैडम श्रुति शुक्ला ने की। उन्होंने बेटी दिवस पर अपनी तरफ से पूरे समाज के लिए और खासकर मांओं के लिए कुछ संदेश दिए के वह बेटियों में ऐसे संस्कार पैदा करें कि वह खुद सशक्त होकर जहां माई के परिवार से जुड़कर रहती है वही वह अपने ससुराल के परिवार को जोड़ कर रखें और बड़ों का सानिध्य पाती रहें। और उन्होंने बेटी के प्रेम से ओतप्रोत और उत्साहवर्धक एक काव्य रचना भी प्रस्तुत की। 

ट्राइसिटी अध्यक्ष सुश्री शारदा मित्तल और ट्राइसिटी उपाध्यक्ष राशि श्रीवास्तव का सानिध्य प्राप्त रहा। इसमें मोहाली की विदुषी कवयित्रियों ने मन से मंच तक में  कविता पाठ किया। कार्यक्रम  का संचालन डॉ रूपेंद्र जीत कौर ने किया। महिला काव्य मंच मोहाली इकाई की अध्यक्ष अमरजीत कौर हृदय ने सभी मेहमानों का स्वागत किया और गोष्ठी के अंत में सभी का धन्यवाद किया। 

काव्य गोष्ठी का शुभारम्भ सरस्वती वंदना से हुआ। इस रस्म को निभाने की औपचारिकता सुधा जैन 'सुदीप' द्वारा  विशेष रूप से मां सरस्वती को ज्योति प्रज्ज्वलित एवं पुष्प अर्पित करके की गई। 

गोष्ठी में सोनिमा सत्या, मीनू सुखमन, डॉ. सुनीत मदान, सुरिंदर कौर चिंगारी, प्रभजोत कौर, सुधा जैन 'सुदीप', डेजी बेदी जुनेजा, नीना सैनी, शैलजा पांडे, नीरजा शर्मा, संगीता शर्मा कुंद्रा अध्यक्ष चंडीगढ़ इकाई और संगीता गर्ग अध्यक्ष पंचकूला इकाई आदि ने काव्य पाठ किया। इसके साथ ही चंडीगढ़ और पंचकूला की बहुत सारी कवित्रीयोन ने श्रोताओं के रूप में शामिल हो कर कविता पाठ का आनंद लिया।

Saturday, September 5, 2020

लगातार जारी है अमृता प्रीतम का जादू

 चंडीगढ़ में अमृता प्रीतम की शब्द शक्ति पर हुआ विशेष वेबिनार 
चंडीगढ़: 03 सितंबर 2020: (पुष्पिंदर कौर//हिंदी स्क्रीन)::
शब्द रुकते नहीं शब्द झुकते नहीं!
शब्द दबते नहीं, शब्द मरते नहीं!
ये करिश्मा हैं कुदरत का देखो ज़रा!
इनसे बातें करो, इनको सुन लो ज़रा!                         (कार्तिका सिंह)
अक्सर लगता है कि शब्द अतीत हो गए लेकिन वे हमेशां वर्तमान  बने रहते हैं। अतीत की कहानियां भी सुनाते हैं और भविष्य की दस्तक का भी पता देते हैं। बहुत खुशकिस्मत होते हैं वे लोग जो शब्दों को समय पर सुन लेते हैं और इनमें छिपे रहस्य भी समझ लेते हैं। इन कालजयी शब्दों की रमज़ समझने के लिए इनसे एकरूप होना भी आवश्यक है। इनका जादू जब चलने लगता है तो फिर किसी से नहीं रुकता।
"मैं तवारीख हां हिंद दी" अमृता प्रीतम के 101वें जन्मदिन को समर्पित समागम "अनुरूप साहित्य संवाद मंच पंजाब" और "काव्य शास्त्र" (पंजाबी पत्रिका) के संयुक्त प्रयास से 31 अगस्त 2020 को पंजाबी साहित्य की शीर्ष लेखिका अमृता प्रीतम जी के 101वें जन्मदिन के अवसर पर एक रोज़ा वेबीनार और कवि दरबार आयोजित किया गया। आयोजन का शुभारम्भ अमरजीत कौर हिरदे के स्वागतीय भाषण से हुआ। उन्होंने कहा कि अमृता प्रीतम के जीवन,  साहित्य और शख्सियत को नए संदर्भ से पुनर्मूल्यांकन  करने की आवश्यकता है।  'अमृता प्रीतम की शख्सियत के विचारधाराई बिंब' सिरलेख के अंतर्गत उसकी शख्सियत और साहित्य के विश्वव्यापी पहलूओं के ऊपर कई अन्य पंजाबी चिंतकों ने भी महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। 
वेबीनार में डॉक्टर दरिया (प्रमुख पंजाबी विभाग, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी) ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि, "अमृता प्रीतम की शख्सियत पंजाबी साहित्य, साहित्यिक पत्रकारिता और लोक मनों के ऊपर छाई हुई है। अमिया कुंवर (पंजाबी लेखिका और आलोचिका) ने अमृता प्रीतम के साथ बिताए अपने पलों के अनुभवों को श्रोताओं के सन्मुख बहुत खूबसूरती से प्रस्तुत किया। डॉक्टर प्रवीण कुमार (पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़) ने कहा कि उनकी शख्सियत बहु-विधावी, बहु-दिशावी प्रभाव रखती है और पंजाबी कावि-आलोचना पर उसकी सियासत के संदर्भ में उसकी जद्दो-जहद, सिर्जना और जीवन के नए आयाम प्रस्तुत किए। डॉ अमरजीत सिंह (मुखी पंजाबी विभाग संत बाबा भाग सिंह यूनिवर्सिटी) ने अमृता प्रीतम को अंतरराष्ट्रीय पंजाबी सृजक के तौर पर मानता देते हुए कहा कि उनकी शख्सियत और साहित्य के विश्वव्यापी पहलूओं, साहित्यक राजनीति के प्रभाव और लोक चेतना में बसे बिंब को समग्र रूप में देखने की आवश्यकता है। डॉ कुलदीप सिंह (कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी) ने अमृता प्रीतम के साहित्य के विचारधाराई पहलुओं का आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस सैशन का मंच संचालन डॉक्टर रूपिंदरजीत कौर (संत बाबा भाग सिंह यूनिवर्सिटी) ने किया।
इस आयोजन के दूसरे सैशन में कवि दरबार किया गया। जिसमें पंजाबी जुबान के अजीम शायरों ने शिरकत की। अमरजीत कौर हृदय ने आए हुए कवियों का स्वागत करते हुए अमृता प्रीतम की समकालीन सार्थकता के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किए और उसके ऊपर अपनी कविता प्रस्तुत की। 
"जेकर तेरे कोल कुझ सी तां ओह सी तेरा इश्क 
तेरा हुनर अते    
तेरी कलम था जुनून 
अते एक तेरी साफगोई 
जिवें चिकड विच कमल 
इस काव्य महफिल में स्वामी अंतर नीरव, सेवा सिंह भाषो, सुदेश नूर मौदगिल, प्रिंसिपल जगदीप कौर अहूजा, नीना सैनी,  भूपिंदरप्रीत कौर, अमरजीत कसक, डॉक्टर सनोबर चिब, निम्मी वशिष्ठ, कुलदीप चिराग, रजनी वालिया, लखविंदर कौर लकी, ने अमृता प्रीतम की कविताएं और उसके जीवन चेतना, संवेदना और विचारधाराक नुक्ता-निगाह से कवियों ने अपनी शायरी प्रस्तुत की और उसको श्रद्धांजलि भेंट की। इस सैशन का मंच संचालन डॉ हरप्रीत सिंह (संत बाबा भाग सिंह यूनिवर्सिटी) ने किया। 
अब इसकी आयोजक टीम किसी नए आयोजन की तैयारी में है जिसका दिन, तारीख और समय जल्द ही बताया जायेगा। आप इसमें शामिल होने की तैयारी रखिये।