Friday, March 12, 2021

अनामिका को पुरस्कार मिलने से हुआ प्रगतिशील काव्य का सम्मान

  नारीवादी लेखिकाओं में भी सम्मान की घोषणा बाद खुशी की लहर 


नई दिल्ली//लुधियाना: 12 मार्च 2021: (हिंदी स्क्रीन डेस्क)::

अनामिका को पुरस्कार मिलने की घोषणा होते ही हर तरफ प्रसन्नता की लहर दौड़ गई। लेखिकाओं ने एक दुसरे को बधाईयां दीं। वास्तव में अनामिका का सम्मान उस कलम का सम्मान है जिसने मानवीय संवेदना को पहचाना, जन के दुख्ख दर्द को पहचाना, नारीवाद की आवाज़ बुलंद करते हुए नए हिम्मतवर प्रयोग भी किये। यह सम्मान बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था।  बावजूद अब देरी से ही सही लेकिन बहुत अच्छा एलान आया है। पुरस्कार की खबर आप हमारी अलग पोस्ट में भी पढ़ सकते हैं।  

अनामिका जी के काम और साहित्य साधना का संक्षिप्त विवरण देते हुए अपरा सिन्हा बताती हैं: मुजफ्फरपुर की अनामिका को साहित्य एकेडमी पुरस्कार मिलना केवल बिहार के लिए नही बल्कि देश के लिए गौरव की बात है क्योंकि वह पहली हिंदी कवयित्री है जिन्हे यह अवार्ड मिला। यह अवार्ड तो महादेवी वर्मा को भी नही मिला था। अनामिका हमारे परिवार से जुड़ी रही हैं। उनके पिता श्यामानंदन किशोर खुद नामी लेखक थे। वे बिहार विश्विद्यालय के कुलपति रहे। अनामिका आंटी ने बहुत से अनुवाद भी किए हैं कई उपन्यास भी लिखे। उन्हें भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार भी मिल चुका है। गत वर्ष उनके घर गई तो मुझे बहुत प्यार और स्नेह दिया। इसी तरह बहुत से अन्य लेखकों और लेखिकाओं ने अनामिका  अपनी यादों को साँझा किया है। सभा सभाओं में यही चर्चा हो रही है और सोशल मीडिया पर भी। 

इस सम्मान की मुबारक देने वाले खुले मन से बधाईयां दे रहे हैं। ख़ुशी की एक ऐसी लहर जो बहुत देर बाद नज़र। 

छल का शिकार होने के बाद  Pexels-Photo-by RODNAE Productions


एक काव्य देखिये 

उससे छल करने में

कौन सी विचक्षणता

जिसने विश्वास कर लिया,

उसे मार देने में कौन सी बहादुरी

जो गोदी में आकर सो ही गया।

           ~अनामिका 

यह आखिरी लघु पोस्ट लक्ष्मी शर्मा जी के प्रोफ़ाइल से साभार 

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