Saturday, January 8, 2022

सभी के लिए खुशियां मांगती काव्य रचना//नववर्ष//डॉ• अनुराधा शर्मा

7th January 2022 at 10:41 pm

 आशा बन जाओ किसानों में 


सभी के लिए खुशियां मांगती काव्य रचना आज के दौर में एक अजीब लेकिन सुखद अहसास देती है। आजकल रिवाज पड़ गया है न अपने लिए, अपने समुदाय के लिए सब कुछ मांगना लेकिन अन्यों को नज़रअंदाज़ कर जाना। ऐसे स्वार्थ पूर्ण दौर में भी विशेष झौंका आया है पठानकोट से। जैसे पठानकोट में खुलापन, सादगी और प्रकृति की सुंदरता है कुछ वही अहसास है इस रचना में भी। नव वर्ष पर सभी के लिए खुशियां मांगीं हैं डॉ• अनुराधा शर्मा ने नव वर्ष पर लिखी अपनी काव्य रचना में। -कार्तिका सिंह 

डॉ• अनुराधा शर्मा
स्वागत 

नव वर्ष प्रभात बेला |

मंगलमय

नूतन कान्तिमय बेला  |

तुम्हारा आविर्भाव

है आशीर्वाद मानव हित |

तुम विराजो

हृदय सुआसन पर |

हो सराबोर

सम्पूर्ण विश्व पटल |

हे! नूतन बेला

खुशियाँ भर दो हर जन में,

जीवन भर दो प्राणों में,

आशा बन जाओ किसानों में,

हरियाली भर दो खलिहानो में,

स्वर बन जाओ  प्रभाषी का,

प्रतिभा में साहस भर दो,

मानव हृदयस्पर्शी हो तुम |

स्वागत आशामयी बेला |

स्वागत नव  अमृत बेला ||


डॉ• अनुराधा शर्मा,

हिंदी अध्यापिका

सससस  नौशहरा नल बंदा |

ज़िला पठानकोट-145001

पंजाब |

फ़ोन - 9417194708

Monday, January 3, 2022

कविता कथा कारवां ने किया विशेष साहित्यिक आयोजन

3rd January 2022 at 3:33 PM

 2021 को विदा करके 2022 को सुस्वागतम कहा  


लुधियाना
: 3 जनवरी 2021: (कार्तिका सिंह//हिंदी स्क्रीन)::

उम्र निकल जाती है लेकिन ज़िंदगी का अहसास अनदेखा और अनछुया ही रह जाता है। उम्र और ज़िंदगी का राब्ता एक सपना रह जाता है। कभी इनका आमना सामना हो भी जाए तो बीएस पलक भर वक्त ही मिलता है। तब अहसास होता है कितनी क्षणभंगुर है ज़िंदगी। मन के अरमान मन में ही रह जाते हैं और हर बार पुराना साल निकल जाता है। रेत की तरह मुट्ठी में से निकल जाती है ज़िंदगी। 

हर बार नव वर्ष का आना और पुराने वर्ष का चले जाना एक विचलित करने वाला समय होता है। विदेशों की बात छोड़िए हम तो अतीत से आज भी प्रेम करते हैं। अतीत के एक एक पल से नए नए सबक सीखते हैं इसलिए उसे विदा भी प्रेम से ही करते हैं। नोटबुक का पेज फाड़ने की तरह उसे खुद से अलग नहीं कर देते। ऐसा सम्भव भी नहीं-ऐसा होना भी नहीं चाहिए। ज़बरदस्ती भुलाए गए लोग और पल ज़्यादा याद आने लगते हैं। विदा किए गए लोग और पल शांति और सांत्वना देने याद आते हैं। 

ऐसे में बहुत मुश्किल होता है नव वर्ष को सुस्वागतम कहना। क्रिसमस के बाद नए वर्ष की सेलिब्रेशन का रिवाज जिन लोगों ने भी चलाया वे बहुत हिम्मतवर लोग ठहरे होंगें। सर्दी के कहर की ठंडक का सामना करते हुए गर्मजोशी ले आना आसान तो नहीं रहा होगा। हमारे देश का कैलेंडर भी अलग है और मौसम का हिसाब किताब भी। त्यौहार भी इसी आधार पर हैं।  दुनिया के बड़े हिस्से की सुर से सुर मिलाते हुए कविता कथा कारवां ने भी इस बार जाते हुए वर्ष को विदायगी भी दी और आते हुए वर्ष को सुस्वागतम भी कहा। कविता कथा कारवां ने साहित्य की बात करते हुए किया विशेष साहित्यिक आयोजन किया। जाते हुए वर्ष में हमसे बिछड़े हुए अपनों को याद भी किया। नव आगुन्तकों में नई नई संभावनाएं भी देखीं। उन्हें प्रोत्साहन देने के लिए उनकी पीठ भी थपथपथाई। 

इस अनूठे अंदाज़ में कविता कथा कारवांँ (रजि.) ने स्थानीय माया नगर के सेठ कांफ्रेंस हॉल में पिछले साल को विदाई देने और नए साल 2022 की शुभकामनाएं देने के लिए एक दिलकश समारोह का आयोजन किया जिसमें विधायक कुलदीप सिंह वैद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। डाक्टर रविंद्र सेठ दशकों से साहित्य और समाज सेवा से जुड़े लोगों को प्रोत्साहित करते आ रह हैं। 

इसी तरह एम एल ए कुलदीप सिंह वैद भी गैरराजनीतिक पृष्ठ भूमि से सियासत में आए हैं तांकि सियासत के ज़रिए समाज का कुछ संवारा जा सके। उन्होंने कहा कि समाज में नेतृत्व करना साहित्यकारों और लेखकों की जिम्मेदारी है। उन्हें अपनी इस ज़िम्मेदारी को निभाने के लिए बढ़चढ़ कर आगे आना चाहिए। श्री वैद 1992 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं जिन्हें 2007 में ए आई एस के तौर पर पदोन्नत किया गया। अपनी राजकीय सेवा के दौरान वह मोगा के दीप्ती कमिश्नर भी रहे और ग्लाडा के अतिरिक्त मुख्य प्रशासक भी। इस तरह के अनुभवी लोग जब सत्ता में एते हैं तो आम जनता को इसका काफी फायदा होता है। दुनिया के बहुत से देशों-अमेरिका, कनेडा, इंग्लैण्ड, सिंगापुर, थाईलैंड,साऊदी अरबिया और हांगकांग इत्यादि में भी अच्छी तरह वहां के कल्चर को देख चुके हैं। पंजाब को वैसा ही बनाने के लिए अग्रसर भी हैं। निश्चय ही कलम वालों को भी इस जज़्बात का फायदा होगा ही होगा चाहे कुछ देर सवेर बेशक हो जाए। 

कविता कथा कारवांँ की संस्थापिका और अध्यक्षा डॉ. जसप्रीत कौर फ़लक ने काव्यात्मक अंदाज में नव वर्ष की बधाई दी और संगठन की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। गौरतलब है की अति व्यस्त होने के बावजूद डाक्टर जसप्रीत कौर फलक किसी किसी न मुद्दे पर कोई न कोई आयोजन करते रहती हैं। कोविड-19 ने जो अंतराल पैदा क्र दिया था उसे तोडना आसान नहीं था लेकिन फलक अपनी टीम के साथ तभी से निरंतर लगी है कि इस दूरी को मिटाना भी है और कोरोना को हराना भी है।  कहीं हम कोरोना की दहशत के कारण आपस में मिलना जुलना ही न भूल जाएं। इस अवसर पर विभिन्न कवियों ने भी अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। ज्योतिष, पत्रकारिता और कला के ले बहुत पुराने समय से सक्रिय सुखमिंदर सिंह ने मुख्य अतिथि के बारे में जानकारी दी।

शायरों में से त्रैलोचन लोची, डॉ. रविंदर चंदी, हरदीप बिरदी, अशोक धीर,सुखमिंदर सिंह एशियन क्लब, प्रगट सिंह रंधावा,अशोक धीर, जिमी अहमदगढ़ और आंचल जिंदल जैसे प्रमुख कवियों ने इस काव्य दरबार और चर्चा में भाग लिया।  कार्यक्रम की शुरुआत शैली वाधवा के स्वागती भाषण से हुई।  मंच प्रबंधन की भूमिका धर्मेंद्र शाहिद खन्ना ने निभाई थी।  

इस सुअवसर पर दर्शकों में विशेष रूप से जसबीर कौर, बलकार सिंह, बखप्रीत सिंह, तमन्ना, सुखप्रीत कौर, हर्षदीप कौर, जसविंदर कौर, दलजीत कौर आदि शामिल थे।  कविता पाठ कारवांँ यूनिट के क्रिएटिव राइटर्स के नवकमल सिंह, नवप्रीत सिंह हैरी, हरमीत पोएट ने कविता पाठ में भाग लिया।  हरमीत पोएट ने संस्था की अध्यक्ष डॉ. जसप्रीत कौर फ़लक को काव्यात्मक चित्र भेंट किया।  कविता कथा कारवांँ सचिव जसबीर कौर और डॉ. रविंदर सेठ ने इस भव्य आयोजन की सराहना की।  मुख्य अतिथि को प्रतीक चिन्ह और उपाधियांँ देकर सम्मानित किया गया। अंत में संस्था के उपाध्यक्ष डॉ जगतार धीमान ने धन्यवादी शब्द कहे। संस्था द्वारा भाग लेने वाले कवियों एवं अतिथियों को सम्मानित किया गया।

कुल मिलकर यह आयोजन भी यादगारी रहा। जो रास्ते छूट गए उन पर फिर से चलने का मन मज़बूत किया गया। जो सपने सधुरे रहे उन्हें साकार करने के लिए फिर से कसम खाई गई। किसी की ज़िंदगी में कोई दुःख न रहे इसका संकल्प भी किया गया। कलम के बहाने एक परिवार और एक काफिले को मज़बूत किया गया। 

Tuesday, December 14, 2021

मीरा, महादेवी वर्मा और अमृता प्रीतम-परंपरा की उत्तराधिकारिणी:जसप्रीत कौर फ़लक

पुस्तक लोकार्पण के आयोजन में शामिल हुई प्रमुख शख्सियतें 


लुधियाना
: 12 दिसंबर 2021: (रेक्टर कथूरिया//हिंदी स्क्रीन)::

पाकिस्तान की मरहूम लेखिका बानो कुदसिया ने एक लम्बी कहानी या फिर नावलैट जैसी एक रचना लिखी थी आठवां रंग। यह कहानी बहुत सी भाषाओं में अनुवाद हो कर भी छपी। जिस जिस ने भी इस कहानी को पढ़ लिया वह इसे भूल नहीं पाया। हमारी ही ज़िंदगी में हमारे ही आसपास ऐसा बहुत कुछ घटित होता है जिसकी झलक का अहसास इस कहानी में  मिलता है। वैसे खतरा भी कि यह कहानी बहुत से लोगों को चिंताजनक हद तक निराशा में भी धकेल सकती है। इसे पढ़ पाना और फिर पहले की तरह बने रहना सब के बस का नहीं है। पंजाबी में इस अनुवाद को सर्वप्रथम अमृता प्रीतम ने अपनी लोकप्रिय रही पत्रिका "नागमणि" में प्रकशित किया था। फिर इस कहानी को अमृता जी ने अपने संकलन "13 अवाज़ां" में भी शामिल किया जिसे प्रकशित किया था दिल्ली के उस समय के जाने माने प्रकाशक राज पैकेट बुक्स ने। शयद चली पचास वर्ष पूर्व। बाद में यह किताब भी नज़र नहीं आ सकी और न ही यह कहानी भी। फिर शब्द नाम की पत्रिका ने जब बानो कुदसिया पर विशेषांक प्रकाशित किया थी फिर इस कहानी की चर्चा दोबारा से शुरू हुई। जब जसप्रीत कौर फलक की नयी पुस्तक मार्किट में आयी तो बानो कुदसिया की कहानी भी फिर से ज़हन में आ गई। इसी तरह आठवें रंग की तलाश में बेचैन लोगों की तलाश हमारी टीम को भी रहती है। वास्तव में कुछ गिनेचुए लोग ही ारहवें रंग में भटकना को गले लगते हैं। इसी तलाश में मुलाकात हुई जसप्रीत फलक से। वह भी आठवें रंग की तलाश में है। खूबसूरती के साथ साथ कलम का जूनून और अध्यापन का प्रोफेशन। आम तौर पर ऐसे लोग बेहद व्यस्त रहते हैं।आराम का भी वक्त नहीं मिल पाता लेकिन जसप्रीत फलक ने तो साहित्य साधना के लिए पुरा वक्त निकाला। 

साहित्यिक संस्था 'कविता कथा कारवां' (रजि.) एवं 'कथा कारवां प्रकाशन' की ओर से प्रसिद्ध हिन्दी कवयित्री जसप्रीत कौर फ़लक के नये पंजाबी कविता संग्रह 'अठवें रंग दी तलाश' का लोकार्पण पंजाबी भवन, लुधियाना में पंजाबी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. रविंदर भट्ठल की अध्यक्षता में आयोजित एक भव्य समारोह सम्पन्न हुआ। ज़िला भाषा अधिकारी श्री संदीप शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में पधारे। 

कनाडा से प्रवासी साहित्यकार मीता खन्ना विशिष्ट अतिथि के रूप में तशरीफ़ लाईं। वरिष्ठ साहित्यकार त्रिलोचन लोची ने सभी उपस्थित साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए जसप्रीत कौर फ़लक को पंजाब की श्रेष्ठ संभावनाशील कवयित्रियों में स्थान दिया। इस अवसर पर पुस्तक 'अठवें रंग दी तलाश' पर एक सारगर्भित विचार चर्चा भी करवाई गई। 

विख्यात साहित्यकार-आलोचक प्रिंसिपल डॉ. गुरइकबाल सिंह ने जसप्रीत कौर फ़लक के संवेदना एवं रचना संसार पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए उन्हें भोगे हुए यथार्थ की कवयित्री सिद्ध किया और हिंदी भाषी होते हुए भी उत्कृष्ट पंजाबी सृजन के लिए उनकी सराहना की। विचार चर्चा को आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ शायर सरदार पंछी समेत हरमीत विद्यार्थी, मनिंदर गोगिया, सहजप्रीत मांगट, परमजीत सिंह सोहल, चरनजीत सिंह, करमजीत ग्रेवाल, शैली वधवा,अजमेर सिंह आदि ने जसप्रीत कौर फ़लक के रचना संसार के विविध पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। राजेन्द्र साहिल ने उनकी अनुभूति की प्रामाणिकता और सच्चाई को रेखांकित करते हुए उन्हें मीरा, महादेवी वर्मा और अमृता प्रीतम की परंपरा की उत्तराधिकारिणी सिद्ध किया। 

इसी के साथ-साथ संंस्था 'कविता कथा कारवां' के न्यूज लैटर का भी उपस्थित साहित्य प्रेमियों के कर-कमलों के द्वारा विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक धर्मेंद्र मसाणी, जतिंदर जीतू एवं गुरदर्शन धूरी और मीता खन्ना ने जसप्रीत कौर फ़लक को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनकी ग़ज़लों का सुमधुर गायन प्रस्तुत किया। समारोह में आयोजित कवि दरबार में अमरजीत शेरपुरी, हरमीत पोएट, हरजीत लाडवा, जसकीरत सिंह, नवकमल सिंह, नवप्रीत सिंह, सारा सैफ़ी आदि ने जसप्रीत फ़लक की काव्य रचनाएं प्रस्तुत करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अतिरिक्त संस्था द्वारा करवाए गए यू-ट्यूब लाइव कार्यक्रम में भाग लेने वाले नवोदित कवि-कवयित्रियों नभराज सिंह, हर सिमर सिंह एवं दिलप्रीत कौर को विशेष पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। 

इस अवसर पर तरसेम नूर, सागर सियालकोटी, अमृतपाल गोगिया, हरदीप विरदी, वरिंदर जटवाणी, इरादीप त्रेहन, राजदीप तूर, मीनू कटारिया, सिमरन धुग्गा, सिमरतजीत कौर, मनिंदर कौर मन, अनु शर्मा, अनु पुरी एवं अन्य साहित्यिक व्यक्तित्व उपस्थित थे। कार्यक्रम में उपस्थित समस्त साहित्य प्रेमियों, साहित्यकारों एवं विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। मंच संचालन की परिश्रम साध्य भूमिका प्रसिद्ध गीतकार प्रभजोत सोही ने निभाई। अंत में धर्मेंद्र शाहिद एवं जसप्रीत कौर फ़लक ने समस्त आगंतुकों को सहृदय धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए आभार प्रकट किया।

Wednesday, December 1, 2021

भाषा विभाग की ओर से फलक की नई पुस्तक रिलीज़

 जसप्रीत फ़लक का काव्य संग्रह 'अठवें रंग दी तलाश' अब मार्किट में 


लुधियाना
: 1 दिसंबर 2021: (हिंदी स्क्रीन ब्यूरो):: 

उर्दू के साथ साथ हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी में अपना हाथ आज़माने वाली शायरा जसप्रीत कौर फलक का नाम किसी जान पहचान का मोहताज नहीं है। उसने लगातार लिखा है और सक्रिय हो कर उसे छपवाया भी है। लिख लिख कर पांडुलिपियों का ढेर लगाने वाले ज़माने में जसप्रीत कौर फलक ने प्रकाशक ढूंढे या प्रकाशकों ने इस शायरा को ढून्ढ ´निकाला लेकिन कुछ कुछ अंतराल के बाद जसप्रीत कौर फलक की कोई न कोई पुस्तक सामने आती रही। इन पुस्तकों पर चर्चा  भी काफी हुई। इस बार जसप्रीत कर फलक सामने ै है अपनी नई पंजाबी पुस्तक को लेकर। पुस्तक का नाम है आठवें रंग की तलाश। फलक की इस नई पुस्तक को रिलीज़ करने का  यादगारी आयोजन करवाया भाषा विभाग पंजाब ने। आयोजन में बहुत से नामी कलमकार शामिल हुए।  

प्रसिद्ध हिन्दी कवयित्री जसप्रीत कौर फ़लक के नये पंजाबी कविता संग्रह 'अठवें रंग दी तलाश' का लोकार्पण भाषा विभाग पंजाब की ओर से आयोजित 'पंजाबी माह' के भव्य 'विदाई समारोह' में मुख्य अतिथि शिरोमणि पंजाबी आलोचक डॉ. जसविंदर सिंह, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. सुरजीत लीअ, विशेष मेहमान शिरोमणि पंजाबी साहित्यकार निंदर घुंघिआणवी और पंजाबी, हिंदी, उर्दू साहित्य के अनेक प्रमुख हस्ताक्षरों के कर-कमलों के द्वारा सम्पन्न हुआ। 

भाषा विभाग की डायरेक्टर श्रीमती करमजीत कौर ने जसप्रीत कौर फ़लक की इस सृजनात्मक उपलब्धि पर उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की और उन्हें भविष्य में निरंतर सृजनशील रहने के लिए प्रेरित किया। जसप्रीत कौर फ़लक ने इस पल को अपने जीवन का अविस्मरणीय पल बताया। इस समारोह में विख्यात पंजाबी गायिका अमर नूरी विशेष रूप से उपस्थित थीं। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर प्रसिद्ध साहित्यकार ओमप्रकाश गासो, दीपक जालंधरी, सरदार पंछी, सतनाम सिंह, वीरपाल कौर आदि समेत अनेक गणमान्य साहित्यकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

Friday, November 5, 2021

कातिलों के हाथ में देकर देश...//-रीतू कलसी

क्यों नही उठती इतने शोर में भी यह भारत माता 

किसान शवों की तस्वीर बोलता भारत टीवी के पेज से साभार 

रीतू कलसी प्रोफेशन से पत्रकार है और दिल से शायरा। बहुत ही बेबाकी से लिखने वाली पत्रकार और लिहाज़ शायरी में नहीं करती। उसकी कब्रों और ऋüपोर्टों में शायरी की झलक मिल जाती है और शायरी में खबरों की। मीडिया की डयूटी ने कभी जालंधर, कभी फ़िरोज़पुर, कभी लुधियाना, कभी नोयडा और कभी इंदौर। इस तरह डयूटी ने घाट घाट का पानी पिलवा दिया और कलम के बहाने बहुत सी जगहों के लोग देख लिए। इन रंगों से इंद्रधनुष तो  लेकिन अब उस आठवें रंग की रंग की झलक भी मिलने लगी है जिसकी तलाश साहित्य की दुनिया बानो पाकिस्तान की लेखिका बानो कुदसिया ने भी की थीऔर भी बहुत से लोग कर रहे हैं। देखिए इस काव्य रचना की एक झलक। --रेक्टर कथूरिया 

कातिलों के हाथ में देकर देश 

कर रहे हैं हम न्याय की बातें 

पत्रकारिता और शायरी का 
कॉम्बिनेशन है रीतू कलसी 
जिस देश के नेता करते हों बातें

लठ मारने की किसानों को।

ऐसे देश में न्याय की बातें

जहां गाड़ियों के नीचे रौंदे जाते हों अन्न दाता।

एसी कमरों में बैठ कर खाते हों खाना

इन्हीं अन्न दाता के हाथ से पैदा किए हुए को

लगाते साथ में ठहाके बिना शर्म कर।

तुमने कितने मारे

मैंने इतने मारे करते होंगे बातें

जैसे खेल रहें हों कोई खेल 

लगाते जोर-जोर से नारे 

भारत माता की जय।

क्यों नही उठती इतने शोर में भी यह भारत माता 

क्या बहरी हुई पड़ी है 

क्यों नही तड़प रही, या तड़पन को छुपा रही है।

उठो कुछ तो करो अब फैसले की घड़ी है 

अपने साथ उठाओ अपने अवाम को भी। 

सबक़ सिखाने की घड़ी आ पहुंची है।

बहुत बह गया है खून अपनों का 

कभी हिन्दू-मुस्लिम करते 

कभी अमीर-गरीब करते

कभी सवर्ण-दलित करते।

बस अब बहुत हुआ 

एक साथ सबको अब होना है

न्याय की मशाल को खुद ही उठाना है

                          -रीतू कलसी

Monday, November 1, 2021

लुधियाना के पंजाबी भवन में हुआ अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन

डॉ. अंजना कुमार की पुस्तक "कुछ मेरे दिल ने कहा" का विमोचन 


लुधियाना
: 31 अक्टूबर 2021: (ज्योति बजाज//हिंदी स्क्रीन)::

ईश्वर के आशीर्वाद से साहित्यक दीप वेलफेयर सोसाइटी (रजि) द्वारा तिथि 31 अक्टूबर, 2021 दिन रविवार को शहर लुधियाना के पंजाबी भवन में अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं डॉ. अंजना कुमार जी की लिखी हुई पुस्तक "कुछ मेरे दिल ने कहा" का विमोचन समारोह भी आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में श्रीमती डॉ. अंजना कुमार जी कानपुर से यहां उपस्थित हुई। सुप्रसिद्ध गज़लकार एवं लेखक श्री सागर सियालकोटी जी और श्री तरसेम नूर जी ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की भूमिका निभाई। मुख्य मेहमान के रूप में अजय सिंह जी(अंबाला),  विवेक जी, गौरव जी तथा धरेंद्र सिंह जी भी शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत ज्योति प्रज्वलन करने के बाद  कुमारी श्वेता जी ने सरस्वती वंदना पढ़ के की। मंच संचालन का कार्य बड़ी ही शालीनता एवं प्रेम से श्रीमती शैली  वाधवा जी एवं श्री अकरम बलरामपुरी जी ने संभाला। इस कवि सम्मेलन में नेपाल से फयाज़ फैज़ी जी, योगेंद्र सुन्द्रियाल जी दिल्ली से, शब्द दीप्ती जी करनाल से, मनोज मनमौजी जी फरीदाबाद से, चंद्रमणि चंदन जी दिल्ली से, क्रांति पांडे दीप क्रांति जी मध्य प्रदेश से, शिवेश ध्यानी जी सहारनपुर से, हरी  बहादुर सिंह प्रतापगढ़ से, प्रांशु जैन देवबन्द से, गिरीश सोनवाल राजस्थान से शामिल हुए। इसके अतिरिक्त लुधियाना से मलकीत सिंह मालधा जी, मोनिका कटारिया जी, पूनम सपरा जी, सिमरन धुग्गा जी, सुखमनदीप कौर मिनी जी, छाया शर्मा जी, रंजीत कौर सवी जी एवं इरादीप त्रेहन जी ने इस कवि सम्मेलन में अपनी अनूठी प्रस्तुतियां पेश कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। 

साहित्यक दीप  वेलफेयर सोसाइटी (रजि) कार्यक्रम में पहुंच कर अपना स्नेह एवं आशीर्वाद देने वाले हर साहित्य प्रेमी को  प्रेम पूर्वक धन्यवाद करती है।  कार्यक्रम के अंत में इस संस्था की संस्थापिका कुमारी रमनदीप कौर (हरसर जाई) जी, सह संस्थापिका ज्योति बजाज जी एवं सेक्रेटरी सरदार बूटा सिंह काहने के कार्यक्रम की कामयाबी के लिए सच्चे दिल से ईश्वर को धन्यवाद देते हो यही प्रार्थना की कि हमारी संस्था द्वारा साहित्य की सेवा होती रहे एवं संस्था को साहित्य प्रेमियों से प्रेम मिलता रहे। --ज्योति बजाज 

Saturday, October 16, 2021

इस बार पुस्तक चर्चा "कोई ख़ुशबू उदास करती है''

हिंदी पुस्तक में पंजाबी का रंग इसे और भी  यादगारी  बना देता है


नई दिल्ली
: 16 अक्टूबर 2021: (हिंदी स्क्रीन डेस्क)::

ज़िंदगी और किस्मत जब रंग बदलती हैं तो सचमुच इसका पता तक नहीं चलने देती। गिरगिट भी मात खा जाता है। बदलाहट के बाद ही अहसास होता है कि अब पहले जैसा वो सब नहीं रहा। इसके बावजूद सतर्क कलमकार और बुद्धिजीवी इस बदलाहट को उसी वक्त पहचान लेते हैं जब यह दस्तक दे रही होती है। नीलिमा शर्मा ने बदलाहट का पता देने वाली उस मूक दस्तक की भयभीत करने वाली ख़ामोशी भरी आवाज़ के सूक्ष्म क्षणों को सफलता से पकड़ा है। उस हत्यारे दौर की तबाही को कलात्मक ढंग से कलमबद्ध किया है नीलिमा शर्मा ने। उस ज़हर को नीलकंठ की तरह पीने का प्रयास भी किया, कुछ सफलता भी मिली लेकिन वह नीलिमा थी न जिसके पास इंसान की सीमित शक्तियां होती हैं। वह देव न बन सकी। नीलकंठ न बन सकी। लेकिन इस प्रयास ने उसे बहुत ऊंचाई प्रदान की है। यह पुस्तक उस दौर की गहन उदासी से निकली है जिसकी टीस अभी सदियों तक महसूस की जाएगी। यह पुस्तक-"कोई ख़ुशबू उदास करती है'' बहुत ही विशिष्ट पुस्तक है। इसकी अनुभूति भी नीलिमा शर्मा ही कर सकती थी और इसकी अभिव्यक्ति की कला और क्षमता भी महांदेव ने नीलिमा को ही प्रदान की। तबाही अभी जारी है। तबाही की खामोश सी दस्तक भी अभी जारी है। नीलिमा जी अभी भी सुन रही हैं। इस किताब को पढ़ कर शायद आप बच सकें इस तबाही की मार से जो हम सभी की नियति ही बन गई लगती है। इस किताब को पढ़ना तो फायदेमंद रहेगा ही लेकिन पहले पढ़ लीजिए थोड़ा सा साराँश कि कैसे बनी यह पुस्तक? कैसे रखा गया  इसका नाम? यह दास्तान आपको भी उदास कर देगी लेकिन ज़िंदगी के लिए यह उदासी भी बेहद आवश्यक है। एक आवश्यक औषधि की तरह। -रेक्टर कथूरिया  

नीलिमा जी बताती हैं-एकांत की क्या कहूँ,बरसों से भीड़ के साथ रहते हुए भी मन का एक कोना अकेला है लेकिन उदास कभी नही रहता था। खुल कर ठहाके लगाना मेरी आदतों में शुमार था शायद मेरे ठहाकों को मेरी ही नज़र लग गयी। उस दिन किसी ने कहा तुमने अपनी कहानी की किताब का नाम "कोई ख़ुशबू उदास करती है'' क्यों रखा। आजकल तुम उदास लिखती हो तुम उदास लगने लगी हो, ज्यादा उदास रहने से उदासी की आदत बन जायेगी बस तब से सोच में हूँ ...

उदास होना तो प्रकृति ने सबकी नियति में लिखा है। हर कोई किसी न किसी क्षण में उदास होता है, लेकिन अवसाद को हावी नही होने देता । मैंने  तो कई बार उदासियों के महासागर देखे है लेकिन मेरे मन की छोटी सी नाव उम्मीद की पतवार के सहारे वास्को डी गामा बनकर अपनी  बाकी बचीकुची जिंदगी की तलाश में है। मन की यात्राएँ मुझे बहुत पसंद है औऱ हर बार सामने वाले को उदास देखकर अपनी ज़िन्दगी की खुशियों के लिए ईश्वर का शुकराना भी अदा करती हूँ।

आजकल मूडी हो गयी हूँ ,यस (चाहे तो) आप बूढ़ी भी पढ़ सकते है। आजकल कार की पिछली सीट पर बैठे बैठे मोबाइल में सर घुसाए रहती हूँ। शहनाज ओर सिद्धार्थ  के वीडियो देखती रहती हूँ।  परिजनों से 'कोई कंपनी मेरे बिना लॉस में नही जायेगी' के ताने उलाहने सुनती रहती हूँ। बार बार सबके कहने पर फोन को कुछ देर के लिए चार्जिंग रूपी ऑक्सिजन का मास्क पहनाती हूँ तो नजरें बाहर घूमती है कि "ओह यह तो दिल्ली है मेरी जान"। मुझे पता ही नही चलता कि दिल्ली है देहरादून ,मुज़फ्फरनगर है या मेरठ।  हवाओ की ठंडक कभी कभार ही अहसास दिलाती है कि जिस शहर में आजकल तुम रहती हो न वहाँ का मौसम थोड़ा नम है, ख़ुश्क है या  सर्द क्योंकि मन का मौसम तो आजकल खोया खोया रहता है।

खैर बात हो रही थी कार के बाहर झाँकने की।  कल दिल्ली कैंट की एक सड़क पर रेड लाइट पर ट्रैफिक काफी ज्यादा था। कारें धीरे धीरे सरक रही थी।अचानक एक काली बाइक आगे आयी। हेलमेट पहने कोई मध्यम कद काठी का लड़का (या आदमी) ड्राइव कर रहा था। एक मोटी लड़की (मुझसे कम) बाइक पर उसके पीछे बैठी थी।  झटके से एकदम मेरी विंडो के साथ  बाइक रुकी थी तो नज़र जाना स्वाभाविक ही था।  पाकिस्तानी लॉन प्रिंट का पलाज़ो सूट पहने उस लड़कीं का हाथ उस लड़के की कमर पर था और आगे से उसकी शर्ट को मुठ्ठी में हल्का पकड़ा हुआ था।  लड़के ने बड़े प्यार से उस हाथ को थामा औऱ अपने होठों तक ले जाकर हौले से चूम लिया । हेलमेट की  वजह से  उसका चेहरा नजर नही आया लेकिन लम्बी सी नाक हेलमेट के आगे शीशा/प्लास्टिक न लगे होने से बाहर तक नजर आ रही थी।  

न जाने वो दोनो कौन थे लेकिन उनको देख कर  एक प्यारा सा अहसास हुआ।  हर रेडलाइट पर फेविकॉल के जोड़ की तर्ज पर चिपके लड़के लड़कियां नजर आ जाते है लेकिन यह तो .......मौसम सुहाना सा लगने लगा था। 

फिर तो नज़र उस बाइक के साथ साथ चलती रही। कभी कार के आगे कभी कहीं पीछे बाइक हमारे साथ साथ रही। वेगास मॉल के फ़ूड कोर्ट में उस प्रिंट सूट को फिर मैंने अपने से आगे वाली टेबल पर बैठे देखा। अकेली बैठी वो चुपचाप फोन में एक तस्वीर देख रही थी। एक लड़के के साथ तस्वीर, लेकिन तस्वीर वाला लड़का साथ आये लड़के से अलग था।  मेरे बच्चे भी मेरे लिए खाना लेने के लिए गए थे। हर कोई आता और हम खाली कुर्सी ले सकते है कहकर  झुकने लगता। हर बार मना करती मेरी नजर उस महिला के सामने रखी खाली कुर्सी पर थी। जिसपर ज़ारा का शॉपिंग बैग था। तभी अचानक किसी का कॉल उसके फ़ोन पर आया।  

मंद स्वर से फुसफुसाती सी वो बोली.... " आहो बीजी आज मैनू मॉल लेके आये ने, पिज़्जा लेण गए ने , मैं नही रहणा एथ्थे,  मैं काके नू मिस कर रहिया। उन्ने रोटी खादी आज?  नही प्रशांत चंगा हेगा लेकिन  देव वर्गा तां नही हो सकदा न। बीजी जे कोरोना न  होंदा ते आज देव मेरे नाल हौंदा।" उसकी ख़ामोश सिसकियां सिर्फ मुझे सुनाई दी । मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा औऱ वो भीगी आँखों से मुस्कुरा दी।

आप  नही समझे न माजरा ? 

नामुराद कोरोना ने कितने घरों के चिराग बुझा दिए। कितने तकिये अंदर तक आँसुओं की सीलन से भीगे हुए है। लेकिन कुछ ऊँची दीवारों के बीच मंद बुझती आँखों ने उम्मीद नहीं छोड़ी।  ज़िन्दगी की उम्मीद, आने वाले कल की उम्मीद, अमावस की रात में जुगनुओं की रोशनी की उम्मीद, सुबह के आने की उम्मीद। उन बुझती उम्मीदों ने अपने बड़े बेटे के जाने के बाद  छोटे  बेटे की शादी बड़े की पत्नी से कर दी। छोटे ने मेरी लाइफ मेरा रूल मेरे सपने न कहकर उस ज़िम्मेदारी को प्यार से सम्हाल लिया।  (है न हमारी परिवार संस्था  महान)

नया  उनका नया नया रिश्ता है। अचानक  जुलाई में ही उन दोनो के रिश्ते ने  नाम और रंग बदला है। उनके रिश्ते की ख़ुशबू बदल गयी है सो लड़कीं के 4 साल के बच्चे को दादी ने साथ रख लिया कि अब यह दोनों आपस मे एक दूसरे को समझें। फिर बाकी सब अबकि बार साथ रहेंगे। पंजाब के गांव में ज़मीन बेचने की तैयारी चल रही है। खेती करने वाला किसान बेटा अब नही रहा। बूढ़ा बाप कब तक माफियाओं से ज़मीन बचायेगा।  द्वारका में फ्लैट खरीदने की बात चल रही है। अब जितनी ज़िंदगी बची है सब साथ  साथ बिताएँगे। 

अब बताओ ऐसी खुशबुएँ उदास करेंगी न .... चाहे उम्मीद भरी ख़ुशबू है। 

बहुत सी खुशबुएँ मेरे कहानी संग्रह में भी समाहित है ।

कुछ दोस्त मेरी किताब 'कोई ख़ुशबू उदास करती है'  मंगवाना चाहते है  तो उनके लिए यह लिंक दे रही हूँ ।आप Shivna Prakashan से सीधे  भी पुस्तक मँगवा सकते है । 

Koi Khushbu Udas Karti Hai, Neelima Sharma 

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